Dhanbad News: नगदा खदान हादसे में 50 श्रमिक हुए थे शहीद, घटना को याद कर आज भी सिहर उठते हैं लोग

Updated at : 06 Sep 2024 2:08 AM (IST)
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Dhanbad News: नगदा खदान हादसे में 50 श्रमिक हुए थे शहीद, घटना को याद कर आज भी सिहर उठते हैं लोग

Dhanbad News:बीसीसीएल नगदा खदान हादसे की आज 18 वीं बरसी है. छह सितंबर 2006 की उस हादसे की याद आते ही भाटडीह व महुदा क्षेत्र के लोग सिहर उठते हैं.

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Dhanbad News:बीसीसीएल नगदा खदान हादसे की आज 18 वीं बरसी है. छह सितंबर 2006 की उस हादसे की याद आते ही भाटडीह व महुदा क्षेत्र के लोग सिहर उठते हैं.

Dhanbad News: बीसीसीएल की भाटडीह कोलियरी के नगदा खदान हादसे की उस स्याह रात को महुदा क्षेत्र के लोग कभी भूल नहीं पायेंगे. कोयला उद्योग की बड़ी त्रासदी में शुमार नगदा हादसे की आज 18 वीं बरसी है. छह सितंबर 2006 की उस हादसे की याद आते ही भाटडीह व महुदा क्षेत्र के लोग सिहर उठते हैं.

क्या हुआ था छह सितंबर 2006 को

नगदा 17 नंबर इंक्लाईन में शाम 7:30 बजे अचानक भयंकर विस्फोट हो गया था. चारों तरफ धुआं ही धुआं फैल गया. इलाके में कोहराम मच गया. खदान के अंदर 50 श्रमिक अपनी दूसरी पाली की ड्यूटी में गये थे. विस्फोट के बाद खदान के ऊपर बैठे कोलियरी के पदाधिकारी स्थिति को देखकर वहां से भाग खड़े हुए. देखते ही देखते नगदा से लेकर महुदा तक वाहनों का तांता लग गया. प्रबंधन राहत कार्य समय पर शुरू नहीं कर सका. घटना के बाद तत्कालीन सीएम शिबू सोरेन, सीएमडी पार्थो भट्टाचार्या सहित कई मंत्री, पुलिस अधिकारी, नेता व समाजसेवी पहुंचे. काफी जद्दोजहद के बाद 7 सितंबर की शाम प्रबंधन ने किसी तरह मनोज मिश्रा का शव निकाला. बाद में रेस्क्यू टीम द्वारा एक-एक कर शहीद हुए 49 श्रमिकों के शवों को खदान से बाहर निकाला गया.

मिथेन गैस विस्फोट से घटी थी घटना

घटना मिथेन गैस विस्फोट से घटी थी. नियमानुसार भूमिगत खदान से एक तरफ कोयला निकाला जाता है, दूसरी ओर बालू बंकर के माध्यम से खदान के खाली हिस्से को बालू और पानी से भरा जाता है. लेकिन खदान के अंदर से कोयला तो लगातार निकाला गया, परंतु इसमें बालू भराई नहीं के बराबर हुई. नतीजा कोयला निकाले गये सभी जगह खाली पड़े थे. उक्त खाली जगहों में मिथेन गैस भर चुकी थी. वहीं सही ढंग से ऑक्सीजन भी खदान के अंदर नहीं जा रही थी. नतीजा खदान के अंदर गैस भर गयी और अचानक विस्फोट हो गया.

कैपलैंप नंबर से हुई थी शवों की शिनाख्त

खदान के अंदर के सभी श्रमिकों के शव झ्स कदर जल चुके थे कि किसी को भी पहचान पाना मुश्किल था. सभी का शव एक जैसा दिख रहा था.सभी के कमर में जो बत्ती (कैपलैंप) का बैट्री टंगा हुआ था, उसी बत्ती के नंबर से सभी शवों की शिनाख्त हो पायी.

हादसे के बाद से ही वीरान पड़ा हुआ है क्षेत्र

यह हादसा मानो भाटडीह कोलियरी क्षेत्र के लिए अभिशाप बन गया. प्रबंधन ने नगदा की दोनों खदानें 14 नंबर व 17 नंबर को बंद कर दिया. श्रमिकों का स्थानांतरण अन्यत्र कर दिया गया. कोलियरी पर निर्भर छोटे-छोटे दुकानदारों, ठेला वालों, खोमचा वालों को अपनी-अपनी दुकानें बंद कर देनी पड़ी. देखते ही देखते कोयले से भरा यह भाटडीह कोलियरी क्षेत्र वीरान हो गया.50 हजार की आबादी प्रभावित हो गई.दो-तीन सालों तक बीसीसीएल के सीएमडी व अन्य आला अधिकारियों सहित कई मंत्रियों एवं नेताओं ने खदानों को पुनः चालू करने का आश्वासन दिया परंतु अब सभी ने चुप्पी साध ली है. घटना के बाद प्रबंधन ने इस क्षेत्र को यूं ही उपेक्षित छोड़ दिया. कभी भी कोई सार्थक पहल नहीं हुई.

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