Dhanbad News: जिले में एग्यारकुंड प्रखंड की मृदा में सबसे अधिक पोटैशियम
Updated at : 07 Jun 2025 12:32 AM (IST)
विज्ञापन

कृषि में उपज वृद्धि के लिए नाइट्रोजन व पोटैशियम जैसे पोषक तत्व अत्यंत जरूरी हैं. कृषि विभाग ने इसे लेकर वर्ष 2024-25 के लिए मिट्टी परीक्षण के आंकड़े जारी किये हैं.
विज्ञापन
धनबाद.
कृषि में उपज वृद्धि की बात हो तो नाइट्रोजन व पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों का नाम सबसे पहले आता है. ये दोनों तत्व फसलों के लिए उतने ही जरूरी हैं, जितना इंसानों के लिए प्रोटीन व विटामिन. बदलते मौसम, घटती उपज व मिट्टी की खराब होती गुणवत्ता के बीच अब किसान वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती करें व समझें कि कौन सी फसल को किस पोषक तत्व की जरूरत है. धनबाद जिले में सबसे अधिक पोटैशियम कि मात्रा एग्यारकुंड प्रखंड की मिट्टी में है. एग्यारकुंड में 97.53 प्रतिशत, गोविंदपुर में 50.37, तोपचांची में 44.14, टुंडी में 40.96, पूर्वी टुंडी में 34.17, बाघमारा में 12.71, केलियासोल में 5.21, धनबाद में 4.27 व सबसे कम निरसा में 3.71 प्रतिशत पोटैशियम है.निरसा की मिट्टी में है सबसे अधिक नाइट्रोजन
वहीं पौधों में प्रोटीन, एंजाइम व क्लोरोफिल (हरितलवक) के निर्माण में सहायक पदार्थ नाइट्रोजन की बात करें तो निरसा प्रखंड की मिट्टी में यह सबसे अधिक 45.29 प्रतिशत है. वहीं केलियासोल में 37.10, धनबाद में 23.08, पूर्वी टुंडी में 6.44, गोविंदपुर में 3.38, एग्यारकुंड में 2.47, तोपचांची में 2.43, बलियापुर में 2.22, टुंडी में 1.26 व बाघमारा में 0.63 प्रतिशत नाइट्रोजन है.
नाइट्रोजन : हरा-भरा जीवन
नाइट्रोजन पौधों के विकास के लिए सबसे अहम पोषक तत्वों में से एक है. यह पौधों में प्रोटीन, एंजाइम व क्लोरोफिल (हरितलवक) के निर्माण में सहायक होता है, जिससे पौधे हरे-भरे और स्वस्थ रहते हैं. धान, गेहूं, मक्का, गन्ना जैसी फसलों में नाइट्रोजन की ज्यादा जरूरत होती है. यह पौधों की पत्तियों को हरा रखने, तनों की वृद्धि और बीज उत्पादन में मदद करता है. नाइट्रोजन की कमी होने पर पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और विकास रुक जाता है.पोटैशियम: फसल की रोग प्रतिरोधक ताकत
पोटैशियम फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, जल संतुलन बनाए रखने व फलों के स्वाद व आकार को बेहतर करने में अहम भूमिका निभाता है. आलू, टमाटर, केला, कपास, मिर्च और सब्जियों में पोटैशियम का प्रयोग अधिक होता है. यह पौधों को सूखा, कीट और बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. पोटैशियम फलों की गुणवत्ता और चमक को भी बढ़ाता है.मिट्टी की जांच करना जरूरी
जिला कृषि पदाधिकारी अभिषेक मिश्रा का मानना है कि बिना मिट्टी की जांच कर खाद देना बीमारी जाने बिना इलाज करने जैसा है. हर क्षेत्र की मिट्टी की पोषण क्षमता अलग होती है. किसानों को मिट्टी जांच के बाद ही खाद का प्रयोग करना चाहिए. कृषि विभाग भी अब किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए जागरूक कर रहा है. फसल विशेष पोषण सलाह के तहत किसानों को बताया जा रहा है कि कौन सी फसल में किस तत्व की कितनी मात्रा डालनी चाहिए.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




