Dhanbad News : दीवारों पर सीलन, टूट चुके हैं खिड़की व दरवाजे, अपने पैसे खर्च कर बिजली व प्लंबिंग का काम कराते हैं छात्र

Updated at : 09 Feb 2025 1:27 AM (IST)
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Dhanbad News : दीवारों पर सीलन, टूट चुके हैं खिड़की व दरवाजे, अपने पैसे खर्च कर बिजली व प्लंबिंग का काम कराते हैं छात्र

हद है. सरकारी आइटीआइ हॉस्टल का हाल बेहाल, देखने वाला कोई नहीं

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धनबाद के झारूडीह स्थित जिले के एक मात्र सरकारी आइटीआइ में छात्रों के लिए बने हॉस्टलों का हाल बेहाल होता जा रहा है. 1962 में स्थापित आइटीआइ की हॉस्टल के भवनों की दीवारों पर सीलन है. इससे न केवल इसकी खूबसूरती कम हो रही है, वहीं मजबूती में भी सेंध लग रही है. बात यहीं खत्म नहीं होती है. अव्यवस्था का आलम यह है कि हॉस्टल में छात्र अपने पैसे खर्च कर बिजली व प्लंबिंग का काम करवाते हैं. जेनेरेटर या इनवर्टर के अभाव में लाइट कटने के बाद छात्रों को अंधेरे में रहना पड़ता है. सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे है. हॉस्टल में न तो वार्डन है और न ही मेस का इंतजाम. छात्र खुद खाना बनाते हैं.

खंडहर में तब्दील होता जा रहा हॉस्टल :

छात्रों के लिए बने ये हॉस्टल मरम्मत के अभाव में खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं. कई दीवार टूट चुकी हैं. बारिश के मौसम में कमरों में सीलन की वजह से यहां रहना मुश्किल हो जाता है. बदबू से छात्र परेशान हो जाते हैं. बारिश का पानी कमरों में प्रवेश कर जाता है. कई बार स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि छात्रों को खुद अपने खर्च पर दीवार की मरम्मत करानी पड़ती है.

तीन भवन में 60 कमरे, शौचालय सिर्फ छह

: हॉस्टल के तीन भवनों में लगभग 60 कमरों में तीन सौ स्टूडेंट्स रहते हैं. एक भवन जूनियर स्टूडेंट्स और दो भवन सीनियर स्टूडेंट्स के लिए है. इसमें सिर्फ छह शौचालय हैं. छात्रों की संख्या के हिसाब से शौचालय नाकाफी है. इसलिए छात्रों को हमेशा परेशानी होती है.

मरम्मत पर नहीं है संस्थान का ध्यान :

आइटीआइ के हॉस्टल की मरम्मत को लेकर संस्थान का ध्यान नहीं है. यहां आधारभूत संरचना को ठीक करने के लिए किसी ने कोई सुध नहीं ली. इतना ही नहीं हॉस्टल में कोई सुरक्षा कर्मी भी नहीं है. यहां की चहारदीवारी भी टूटी हुई है. इस वजह से यहां अक्सर असामाजिक तत्वों का प्रवेश होता है. आवारा पशु भी परिसर में घुस जाते हैं.

छात्रों के सिर पर गिर जाता है खिड़कियों का पल्ला :

छात्रों के लिए बने हॉस्टल में मरम्मत के अभाव में गेट व खिड़कियां टूट चुके है. खिड़की के पल्ले टूट कर अलग झूलते हैं. इससे अक्सर दुर्घटना भी होती है. कई बार छात्रों के सिर पर खिड़कियाें का पल्ला गिर जाता है. इससे वे चोटिल हो जाते हैं. छात्रों ने बताया कि कई बार कमरे का गेट भी टूट कर बाहर आ जाता है. इसके बाद उन्होंने खुद इसकी मरम्मत की.

शौचालय में टूट चुके हैं वासबेसिन :

आइटीआइ में छात्रों के लिए मात्र छह शौचालय है. इनका हाल भी बेहाल हो चुका है. शौचालय में वासबेसिन भी टूट चुके है. छात्रों को कभी कभी पानी की समस्या भी होती है. कई बार छात्रों ने संस्थान को शिकायत भी की. मगर अभी तक इसकी सुनवाई नहीं हुई.

खराब हो चुका है बिजली कनेक्शन :

हॉस्टल में बिजली कनेक्शन भी खराब हो चुका है. कई जगहों पर बिजली के तार जल चुके हैं. इससे छात्रों को करंट लगने का डर भी रहता है. छात्रों के लिए संस्थान द्वारा पंखा भी नहीं लगाया गया है. छात्रों ने अपने रूम में पंखा, वाई-फ़ाई आदि अपना पैसा खर्च कर लगाया है.

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