कोयलांचल का गौरव सिजुआ स्टेडियम का अस्तित्व खतरे में, धरना-प्रदर्शन बेअसर

सिजुआ स्टेडियम | Prabhat Khabar Network
कोयलांचल का ऐतिहासिक सिजुआ स्टेडियम उपेक्षा के कारण कबाड़ बन रहा है. माली सोमनाथ वेतन और स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए तीन महीने से धरने पर बैठे हैं.
इंद्रजीत पासवान
सिजुआ. एक समय था जब कोयलांचल का सिजुआ सिजुआ स्टेडियम सैकड़ों युवाओं के सपनों को पंख देता था. दर्जनों प्रतिभावान खिलाड़ी इसी मैदान पर अपनी मेहनत से तैयार हुए. जिनमें से कई खिलाड़ी न केवल निजी कंपनियों में अच्छी नौकरियां हासिल कीं, बल्कि रक्षा बलों (सेना, अर्धसैनिक बल) में भी अपनी जगह बनाये है. आज वही स्टेडियम उपेक्षा की शिकार होकर धीरे-धीरे कबाड़ बनता जा रहा है. उचित देखभाल के अभाव में इसका अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है.
स्टेडियम के माली सोमनाथ को वर्षों से वेतन नहीं
जिन्होंने वर्षों तक इस मैदान को हरा-भरा रखने और युवाओं की प्रतिभा निखारने में अहम भूमिका निभाई, अब खुद अपनी आजीविका और स्टेडियम की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं. पिछले दो वर्षों का बकाया वेतन और स्टेडियम की उचित देखरेख सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर वे बीते तीन माह से बीसीसीएल के कतरास क्षेत्रिय कार्यालय के समक्ष धरना पर बैठे हुए हैं.
उपेक्षा की दास्तान
सिजुआ सिजुआ स्टेडियम एक बार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका था. स्थानीय युवा यहां फुटबॉल, एथलेटिक्स जैसी विभिन्न खेल गतिविधियों में भाग लेकर अपनी प्रतिभा दिखाते थे. माली सोमनाथ ने न केवल घास-फूस की देखभाल की, बल्कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित भी किया. उनके प्रयासों से कई युवा देश-सेवा में जा सके. लेकिन आज हालात बिल्कुल उलट हैं. पानी के आभाव स्टेडियम की हरियाली नष्ट हो गयी, स्टेडियम का दिवार टुट गया है. स्टेडियम की साफ सफाई नियमित नहीं होने के कारण कचरे से भरा पड़ा है. उचित रखरखाव न होने के कारण बारिश में पानी भर जाता है और खेल गतिविधियां लगभग बंद हो गई हैं. स्थानीय युवाओं के लिए यह अब कोई वरदान नहीं, बल्कि उपेक्षा का प्रतीक बन गया है.
धरना-प्रदर्शन बेअसर
माली सोमनाथ का आंदोलन अब तीसरे महीने में प्रवेश कर चुका है, लेकिन न तो जिला प्रशासन और न ही बीसीसीएल के उच्चाधिकारियों पर कोई असर पड़ रहा है. उन्होंने बार-बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है . हद तब हो गई जब स्थानीय सांसद और विधायक ने भी उनके आंदोलन को समर्थन दिया. उनके समर्थन के बावजूद मामला ठंडे बस्ते में चला गया .सोमनाथ कहते हैं, “यह स्टेडियम सिर्फ मेरा नहीं, पूरे कोयला क्षेत्र के युवाओं का है. अगर इसे बचाया नहीं गया तो आने वाली पीढ़ी खेल की सुविधाओं से वंचित हो जाएगी.
ये हैं मुख्य मांगें
माली सोमनाथ का पिछले दो वर्षों का बकाया वेतन का तुरंत भुगतान हो, स्टेडियम की मरम्मत, स्टेडियम की हरियाली के लिए नियमित पानी की ब्यवस्था की जाये, गेट लाइटिंग आदि का तत्काल जीर्णोद्धार किया जाये, नियमित रखरखाव के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित हो. कोयलांचल जैसे क्षेत्र में जहां युवाओं के पास सीमित अवसर होते हैं, वहां खेल का मैदान ना सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि सामाजिक उत्थान का माध्यम भी होता है. सिजुआ सिजुआ स्टेडियम की बदहाली न केवल माली सोमनाथ की समस्या है, बल्कि पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक और खेल विरासत के क्षरण का प्रतीक है.
जिला प्रशासन और बीसीसीएल से अपील
सिजुआ के नागरिक एवं खेल प्रेमी ने मंग की है कि उपेक्षा की दीवार गिराएं और इस ऐतिहासिक स्टेडियम को पुनर्जीवित करें, ताकि यह फिर से सैकड़ों युवाओं का भविष्य संवार सके. समय अभी भी है, लेकिन ज्यादा देर हो जाने पर पछतावा ही रह जायेगा.
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By Prabhat Khabar News Desk
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