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Ration Card News: धनबाद में 2 वर्ष से मंजूर नहीं हो रहे पीला, हरा, लाल राशन कार्ड के नये आवेदन

Updated at : 08 Aug 2024 9:36 PM (IST)
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धनबाद में 2 साल से राशन कार्ड के नए आवेदन नहीं हुए मंजूर.

Ration Card News: धनबाद जिले में 2 वर्ष से पीला, हरा, लाल या किसी अन्य राशन कार्ड के आवेदन को मंजूरी नहीं मिल रही है. इससे लोग परेशान हैं.

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Ration Card News|धनबाद, संजीव झा : धनबाद जिले में पिछले 2 वर्ष से भी अधिक समय से लाल, पीला, हरा, गुलाबी किसी तरह के राशन कार्ड का आवेदन स्वीकृत नहीं हो रहा है. इस वजह से 25 हजार से अधिक आवेदन, जो जिला मुख्यालय से अग्रसारित किया गया है, राज्य स्तर पर मंजूरी के लिए लंबित है. बहुत सारे आवेदन जिला स्तर पर भी लंबित है. यहां राशन से ज्यादा आयुष्मान योजना का लाभ लेने के लिए राशन कार्ड बनवाने के लिए लोग ज्यादा परेशान हैं.

क्यों फंस रही है योजना

अधिकृत सूत्रों के अनुसार, सरकार ने राशन कार्ड को लेकर निर्देश जारी किया है. उसके अनुसार जिलावार अंत्योदय, लाल व हरा राशन कार्ड के लिए अलग-अलग संख्या मंजूरी की गयी है. धनबाद जिला में हर तरह के राशन कार्ड के लिए कुल स्वीकृत संख्या 4,86,000 है. धनबाद में यह संख्या लगभग तीन वर्ष पहले से फुल है.

किन परिस्थितियों में बनता है नया राशन कार्ड

नये नियम के तहत कोई भी नया लाल, हरा, पीला, राशन कार्ड तभी बनेगा जब कोई पूर्व राशन कार्ड रद्द होता है या फिर सरेंडर किया जाता है. यह तभी संभव है, जब किसी कार्डधारी की मौत हो जाये या फिर वह कार्डधारी धनबाद से बाहर चला जाये. रिक्ति के बिना किसी स्तर से भी नये राशन कार्ड मंजूर नहीं किया जा सकता.

झारखंड में राज्य स्तर पर पेंडिंग हैं राशन कार्ड के 25000 आवेदन

धनबाद जिले में पिछले 2 वर्ष के दौरान लाल, हरा राशन कार्ड के लिए आये आवेदनों को जिला स्तर से, तो मंजूर किया जा रहा है. लेकिन, राज्य स्तर पर जा कर पेंडिंग हो जा रहा है. अभी लंबित आवेदनों की संख्या 25 हजार से अधिक है.

ऑनलाइन आवेदन के बाद शुरू होती है प्रक्रिया

किसी भी तरह के राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन ही आवेदन करना है. आवेदन के बाद यह पहले संबंधित प्रखंड या शहरी क्षेत्र के आपूर्ति पदाधिकारी के लॉग इन में जाता है. वहां से आवेदनों को जांच के बाद डीएसओ या एडीएम (आपूर्त) के लॉगइन में जाता है. धनबाद जिला में डीएसओ या एडीएम (आपूर्त) के लॉग इन से अग्रसारित 25 हजार से अधिक आवेदन भी क्यू में लगा हुआ है.

राशन कार्ड नहीं बनने की वजह से लोगों को हो रही परेशानी

नये कार्ड नहीं बनने से लोगों को भारी परेशानी हो रही है. खासकर आयुष्मान योजना के लिए राशन कार्ड बनवाने के लिए लोग जिला मुख्यालय से लेकर रांची तक का चक्कर लगा रहे हैं. उपायुक्त कार्यालय में मंगलवार व शुक्रवार को लगने वाले जनता दरबार में भी सबसे ज्यादा आवेदन भी राशन कार्ड के लिए ही आ रहा है. आयुष्मान योजना से लोगों को गंभीर बीमारी के उपचार में काफी मदद मिल जाती है.

राशन नहीं उठाने वालों का भी नहीं रद्द हो रहा कार्ड

पहले यह नियम था कि लगातार कई माह तक राशन का उठाव नहीं करने वालों का राशन कार्ड रद्द किया जा सकता है. लेकिन, अब यह नियम बदल गया है. राशन कार्ड रद्द करने से पहले कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती है. यह नहीं के बराबर हो रहा है. पिछले कुछ वर्षों में काफी कम राशन कार्ड ही रद्द हुए हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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