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Dhanbad News: डिग्री कॉलेज राजगंज : विवि प्रशासन ने सभी शिक्षकों के सेवा की शुरू की जांच

Updated at : 03 May 2025 1:54 AM (IST)
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Dhanbad News: डिग्री कॉलेज राजगंज : विवि प्रशासन ने सभी शिक्षकों के सेवा की शुरू की जांच

राजगंज डिग्री कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर हुए शिक्षकों के दो गुटों के बीच हुई झड़प के बाद विवि ने जांच शुरू कर दी है. विवि ने सभी शिक्षकों की सेवा पुस्तिका मंगायी है.

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धनबाद.

राजगंज डिग्री कॉलेज में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर हुए शिक्षकों के दो गुटों के बीच हुई झड़प के बाद उत्पन्न हालात को लेकर बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. कुलपति प्रो राम कुमार सिंह ने कॉलेज के सभी शिक्षकों की सेवा संबंधी जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और कार्य व्यवहार की फाइलें विवि में मंगा ली हैं. विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गई है.

कागजात की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने जड़ा प्राचार्य कक्ष में ताला

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए घटना के बाद पुलिस ने प्राचार्य कक्ष में ताला लगा दिया, ताकि वहां रखे दस्तावेजों से छेड़छाड़ न हो सके. शुक्रवार को भी कक्ष की निगरानी की गयी. उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल को प्रभारी प्राचार्य पीके त्रिवेदी केी सेवानिवृत्त होने के बाद नये प्रभारी की नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ था. कॉलेज में शिक्षकों के दो गुट आपस में भिड़ गये. हाथापाई हुई और कागजात फाड़े गये. ऐसे में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.

कुलपति स्वयं ले रहे मामले की जानकारी

शुक्रवार को कुलपति प्रो. सिंह ने कॉलेज के शासी निकाय के सचिव डॉ एएस बेक से इस विवाद की पूरी जानकारी ली. इसके बाद, कॉलेज के प्रधान लिपिक वीरेंद्र रजवार से सभी शिक्षकों की सेवा संबंधित फाइलें विश्वविद्यालय मुख्यालय मंगा ली गयीं. जल्द ही विवि की टीम राजगंज डिग्री कॉलेज जांच के लिए जायेगी.

विवाद की वजह

राजगंज डिग्री कॉलेज के शिक्षकों के बीच कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर कई दिनों से दो गुट आमने-सामने थे. ज्ञात हो कि बैंक ऑफ इंडिया राजगंज में डिग्री कॉलेज का बैंक खाता कई माह से न्यायालय व विश्वविद्यालय के नोटिस से फ्रीज है. काॅलेज के शासी निकाय के सचिव सह विश्वविद्यालय प्रतिनिधि डॉ अमूल्य सुमन बेक का आरोप है कि जनवरी 2025 को काॅलेज के तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य व वर्सर (अर्थपाल) ने अपने हस्ताक्षर से नौ लाख 33 हजार 183 रुपये की निकासी कर ली है. राशि की निकासी में काॅलेज के सचिव का हस्ताक्षर लिया नहीं गया है. शिकायत में सचिव ने कहा है कि मामले में दोषी लोगों व तत्कालीन बैंक प्रबंधक ने नियमों की अनदेखी कर कॉलेज को हानि पहुंचायी है. वहीं तत्कालीन प्रभारी (अभी सेवानिवृत्त) प्राचार्य डॉ प्रियतोष कुमार ने शासी निकाय के सचिव पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. कहा है कि सभी वित्तीय लेन नियमानुसार हुए हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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