Dhanbad News : नगर निगम में रखरखाव के अभाव में कबाड़ हो गयी 30 करोड़ की संपत्ति

पांच चली नहीं और फिर खरीद ली गयी चार रोड स्वीपिंग मशीन, हावी है लूट तंत्र, सबने मिलकर किया सरकारी पैसों का दुरुपयोग
नगर निगम बोर्ड गठन के बाद धनबाद में दो बार शहर की सरकार बनी. दोनों ही बार बड़ी-बड़ी बातें हुई, पर हकीकत में हर बार लूट तंत्र ही हावी रहा. दोनों ही शहर सरकार के कार्यकाल में करोड़ों के वाहन खरीदे गये, पर ना तो इनका उपयोग हुआ और ना ही सही तरीके से रखरखाव. नतीजा यह कि खड़ी-खड़ी 60 से 65 सिटी बसें कबाड़ बन गयी. 25 हजार के पार्ट्स की खरीदारी नहीं कर 24 लाख की बॉबकेट मशीन खड़ी कर दी गयी. व्यवस्था की गड़बड़ी का आलम यह रहा है कि दोनों शहर सरकारों के कार्यकाल में निगम की 25-30 करोड़ की संपत्ति, जिनमें गाड़ियां ज्यादा हैं. कबाड़ बन गयी. इसी बीच चुनाव नहीं होने से जून 2019 से व्यवस्था की बागडोर प्रशासक के हाथ में आ गयी, पर सुधार नहीं दिखे. खराब पड़ी मशीनों को ठीक कराने की जगह प्रशासकों ने 13.80 करोड़ की नयी मशीनें खरीद ली. हद तो यह कि पांच रोड स्वीपिंग मशीन के रहते हुए चार और नयी रोड स्वीपिंग मशीन खरीद ली गयी. नयी रोड स्वीपिंग मशीन को बरटांड़ स्थिति रैमकी के वर्कशॉप में सील पैक रखा गया है. इधर, नगर निगम का दावा है कि जो रोड स्वीपिंग मशीन पहले खरीदी गयी थी, उसका भी उपयोग किया जा रहा है. हालांकि शहर की जनता को रोड स्वीपिंग मशीन नहीं दिखती है.
नहीं चली रोड स्वीपिंग मशीन, नयी खरीद ली गयी :
2018 में तीन करोड़ में पांच रोड स्वीपिंग मशीन खरीदी गयी. मुश्किल से माह दो माह भी सड़क पर नहीं चली. खड़े-खड़े रोड स्वीपिंग मशीन खराब हो गयी. इसे कबाड़ घोषित कर फिर चार करोड़ की लागत से चार मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन की खरीदारी कर ली गयी. यह मशीन पिछले तीन माह से सील पैक बरटांड़ बस स्टैंड के पीछे रैमकी के वर्कशॉप में रखी गयी है.मोक्ष वाहन को मोक्ष मिला :
जनवरी 2017 में दो मोक्ष वाहन की खरीद हुई. दो साल तक शहर के लोगों को नि:शुल्क सेवा दी गयी. शहर की सरकार का कार्यकाल खत्म होने के बाद इस पर शुल्क लगाया गया. कुछ माह तक मोक्ष वाहन चला, फिर यह खराब हो गया. नगर निगम से एक दो बार बनाया गया, लेकिन अब यह कबाड़ बन गया है. हीरापुर कंपेक्टर स्टेशन में खड़ा है.विवाद की भेंट चढ़ी 4.75 करोड़ की टीपर :
ए टू जेड व निगम के बीच विवाद के कारण 4.75 करोड़ के टीपर कबाड़ बन गये. फरवरी 2012 में नगर निगम व ए टू जेड के बीच करार हुआ. दो अक्तूबर 2012 से ए टू जेड ने काम शुरू किया. एक साल के अंदर विवाद शुरू हो गया. 2014 में मामला कोर्ट में चला गया. अब तक मामला कोर्ट में है. स्थिति यह है कि बरटांड़ में खड़े-खड़े 70 टीपर सड़ गये. अब फैसला चाहे जिसके भी पक्ष में आये, सभी टीपर कबाड़ा में ही बेचने पड़ेंगे.सड़ रही हैं 60 से 65 सिटी बसें :
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2010 में 14 करोड़ मेंं 70 सिटी बसें खरीदी गयी. लेकिन कभी भी सभी बसें सड़कों पर नहीं उतरी, जो चली भी, तो मेंटेनेंस नहीं किया गया. लिहाजा एक के बाद एक सभी खराब होती गयी. लगभग चार से पांच बसें कुछ रूट पर आज भी चल रही है. 60 से 65 सिट बसें कबाड़ बन गयी है. बरटांड़ में सिटी बसों को रखा गया है.सड़ गया 60 लाख का 200 गारबेज ठेला :
60 लाख का 200 गारबेज ठेला सड़ गया. 2018-19 में डोर टू डोर कचरा के लिए 60 लाख की 200 गारबेज ठेला खरीदा गया. एक-दो वार्ड में इसे शुभारंभ किया गया. लेकिन मुश्किल से 10से 15 दिनों में इसे बंद कर दिया गया. इसके बाद जमाडा कार्यालय के परिसर में लगाकर छोड़ दिया गया. गारबेज ठेला का उपयोग नहीं होने के कारण सभी ठेले सड़ गये. अब इसे बरटांड़ बस स्टैंड के पीछे रखा गया है.30 ट्रेलर खरीदा गया, उपयोग नहीं, खड़े-खड़े सड़ गये :
कचरा उठाव के लिए 30 ट्रेलर खरीदे गये. लेकिन इसका उपयोग नहीं किया गया. बरटांड़ बस स्टैंड में ट्रेलर खड़े-खड़े सड़ गये. कुछ ट्रेलर अंचलों में रखे रखे सड़ गये. जानकार बताते हैं कि कमिशन के चक्कर में ट्रेलर की खरीदारी की गयी. कोट2018 में जो पांच रोड स्वीपिंग मशीन खरीदी गयी है, उसका भी उपयोग किया जा रहा है. चार नया मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन खरीदी गयी है. इससे ज्यादा से ज्यादा एरिया को कवर किया जायेगा. नयी रोड स्वीपिंग मशीन के लिए रूट मैप जल्द तैयार किया जायेगा.
रवि राज शर्मा,
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By Prabhat Khabar News Desk
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