Dhanbad News: आयुूष्मान आरोग्य मंदिरों में तीन माह से शुगर, ब्लड प्रेशर समेत कई दवाएं खत्म

Edited by ASHOK KUMAR
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ग्रामीण इलाकों में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले भर में संचालित 120 आयुष्मान आरोग्य मंदिर इस समय गंभीर दवा संकट से जूझ रहे हैं.

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बेहतर चिकित्सा के दावे फेल, एनसीडी मरीजों पर दवा संकट की मार-बाहर से खरीदनी पड़ रहीं दवाएं, मरीजों की संख्या में आयी गिरावट

धनबाद.

ग्रामीण इलाकों में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले भर में संचालित 120 आयुष्मान आरोग्य मंदिर इस समय गंभीर दवा संकट से जूझ रहे हैं. पिछले तीन माह से इन केंद्रों पर नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) यानी मधुमेह (डायबिटीज) और हाइपरटेंशन (ब्लड प्रेशर) जैसी बीमारियों की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं. इन केंद्रों को प्राथमिक स्तर पर एनसीडी के मरीजों की पहचान, जांच करने और नियमित दवा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गयी है. लेकिन हकीकत यह है कि मरीज परामर्श तो पा रहे हैं, पर उन्हें दवा के लिए निजी मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ रहा है.

दवा पर बढ़ा खर्च, मजबूरी में बीच में ही छोड़ रहे दवाएं

ग्रामीण इलाकों के हजारों मरीज इन केंद्रों पर हर सप्ताह इलाज कराने पहुंचते हैं, मगर दवा नहीं मिलने के कारण उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है. इससे उनपर आर्थिक बोझ बढ़ गया है. बलियापुर प्रखंड के पंडरापाल निवासी 60 वर्षीय जगदीश रजक बताते हैं कि वह पिछले दो साल से आरोग्य मंदिर से डायबिटीज की दवा ले रहे थे, लेकिन तीन माह से दवा नहीं मिल रही है. डॉक्टर परामर्श देते हैं कि दवा चालू रखिए, पर बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है. इस पर करीब 800 रुपये खर्च हो जाते हैं. इसी तरह टुंडी प्रखंड की सरिता देवी कहती हैं कि ब्लड प्रेशर की दवा न मिलने के कारण कई बार इलाज बीच में रुक गया. बाहर से दवा खरीदना संभव नहीं है. कई लोग मजबूरी में इलाज छोड़ देते हैं.

30 प्रकार की एनसीडी दवाओं में एक भी उपलब्ध नहीं

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर में एनसीडी कार्यक्रम के तहत 30 तरह की आवश्यक दवाएं होनी चाहिए. इनमें ब्लड शुगर और बीपी नियंत्रित रखने वाली प्रमुख दवाएं शामिल हैं. एक सीएचओ ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि एनसीडी दवाओं की आपूर्ति पूरी तरह रुकी हुई है. जिला स्तर पर टेंडर प्रक्रिया लंबित है. इसी वजह से आपूर्ति नहीं हो पा रही. फिलहाल जो भी मरीज आते हैं, उन्हें सिर्फ परामर्श और जीवनशैली सुधार के सुझाव दिये जा रहे हैं.

टेंडर प्रक्रिया में देरी बनी बाधा : स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, एनसीडी कार्यक्रम की दवाओं की खरीद जिला स्तर पर सिविल सर्जन कार्यालय के माध्यम से की जाती है. लेकिन टेंडर प्रक्रिया तीन माह से लंबित है. कुछ दिनों पूर्व दवाओं की आपूर्ति के लिए टेंडर निकाला गया था. लेकिन वह भी तकनीकी कारणों की वजह से रोक दी गयी है.

मरीजों की संख्या में आयी गिरावट

दवा की किल्लत का असर मरीजों की संख्या पर भी पड़ा है. आंकड़ों के अनुसार, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पहले हर सप्ताह औसतन 100 से अधिक एनसीडी मरीज परामर्श के लिए पहुंचते थे. अब यह संख्या घटकर 40 से भी कम रह गयी है. स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि जिन मरीजों को नियमित दवा मिलती थी, वे केंद्रों पर हमेशा आते थे. लेकिन अब कई लोगों ने निजी क्लीनिक या प्राइवेट डॉक्टरों की ओर रुख कर लिया है.

एनसीडी की ये दवाएं खत्म

एम्लोडिपिन 5 मिग्रा, एम्लोडिपिन 10 मिग्रा, टेल्मिसर्टन 40 मिग्रा, टेल्मिसर्टन 20 मिग्रा, क्लोरथालिडोन 12.5 मिग्रा, मेटफॉर्मिन 500 मिग्रा, मेटफॉर्मिन 1000 मिग्रा, ग्लिमेपेरिड 1 मिग्रा, ग्लिमेपेरिड 2 मिग्रा, एस्पिरिन 75 मिग्रा, टैब. मेटोप्रोलोल 25 मिग्रा, मेटोप्रोलोल 50 मिग्रा, एटोरवास्टेटिन 10 मिग्रा, फोलिक एसिड, इंसुलिन इंजेक्शन, बिसाकोडिल एंटरिक आइपी 5 मिग्रा, इयर ड्रॉप फॉरवैक्स 10 मिली, पैरा डाइक्लोरो बेंजीन 2%, एटूइललाइन थियोइललाइन (150 मिग्रा एसआर), एटूइललाइन थियोइललाइन (300 मिग्रा एसआर, फैमोटिडाइन आइपी 20 मिग्रा, फ्रैमाइसेटिन सल्फेट (क्रीम) 30 ग्राम, जेंटामाइसिन आइपी 5 मिली, ग्रिसोफुल्विन आइपी 250 मिग्रा, लेवोथायरोक्सिन आइपी 25 माइक्रोग्राम, मेथिकोबालामिन 1500 माइक्रोग्राम, नियोमाइसिन बैसिट्रैसिन ऑइंटमेंट 15 मिलीग्राम, साल्बुटामोल सल्फेट आइपी 2 मिलीग्राम, सालबुटामोल सल्फेट आइपी इनहेलेशन 200, विटामिन डी 3 (पाउच) 1 ग्राम, कैलामाइन आइपी (लोशन) 100 मिली.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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