Dhanbad News : मरीजों के सिर्फ दांत उखाड़ रहा मेडिकल कॉलेज का डेंटल विभाग, ओपीडी में नहीं है आरसीटी व फिलिंग की व्यवस्था

Updated at : 07 Mar 2025 12:53 AM (IST)
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Dhanbad News : मरीजों के सिर्फ दांत उखाड़ रहा मेडिकल कॉलेज का डेंटल विभाग, ओपीडी में नहीं है आरसीटी व फिलिंग की व्यवस्था

प्रभात पड़ताल : अन्य डेंटल सेवाओं के लिए सदर अस्पताल का रुख कर रहे मरीज, राज्य के तीसरे सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में डेंटल चेयर जर्जर

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शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) के डेंटल विभाग मरीजों का सिर्फ दांत उखाड़ रहा है. अस्पताल के दंत विभाग के ओपीडी में मरीजों को चिकित्सीय परामर्श मिलता है, अन्य सेवाओं के लिए सदर अस्पताल या फिर निजी चिकित्सकों की ओर रुख करना पड़ता है. कहने को यह राज्य का तीसरा सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है. लेकिन दांतों की तकलीफ से जुड़े मरीजों का यहां समुचित इलाज नहीं मिलता है. यहां न तो आरसीटी की व्यवस्था है और न ही फिलिंग की. मेडिकल कॉलेज के डेंटल विभाग की ओपीडी में डेंटल चेयर तक जर्जर है. इसी चेयर पर बैठकर मरीजों के दांतों की जांच की जाती है. वर्तमान में ओपीडी में तीन में दो डेंटल चेयर जर्जर हो चुके हैं. मरम्मत कराकर इससे काम लिया जा रहा है.यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज के बजाय सदर अस्पताल के दंत विभाग के ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. रिकॉर्ड के अनुसार हर दिन मेडिकल कॉलेज के दंत विभाग के ओपीडी में 20 से 30 मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं. वहीं सदर अस्पताल के दंत विभाग की ओपीडी में हर दिन मरीजों के पहुंचने की संख्या औसतन 40 के पार हैं.

सिर्फ चिकित्सीय परामर्श देते हैं चिकित्सक :

मेडिकल कॉलेज के डेंटल विभाग में दांतों की फिलिंग, सफाई, इम्प्लांट समेत अन्य चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं है. डेंटल विभाग के कर्मियों के अनुसार संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं. चिकित्सक सिर्फ चिकित्सीय परामर्श देते हैं.

डेंटल विभाग में हैं कुल छह चिकित्सक :

बता दें कि वर्तमान में एसएनएमएमसीएच के डेंटल विभाग में कुल छह चिकित्सक की नियुक्ति है. इनमें एचओडी डॉ एके शिवम समेत तीन सीनियर रेजिडेंट (एसआर) व दो जूनियर रेजिडेंट (जेआर) शामिल हैं. इसके अलावा विभाग के ओपीडी में तीन स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति है.

बोले चिकित्सक : संसाधन नहीं मिलेगा, तो कैसे करेंगे इलाज

दंत विभाग के एचओडी डॉ एके शिवम ने बताया कि दांतों से जुड़ी विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए कई सामानों की जरूरत होती है. सामानों की सूची तैयार कर कई बार अस्पताल प्रबंधन को रिक्वायरमेंट लिस्ट भेजी गयी. अबतक सामान नहीं मिला है. जो संसाधन उपलब्ध हैं, उसी के अनुसार चिकित्सा सुविधा दी जा रही है. संसाधनों के बगैर मरीजों का समुचित इलाज कैसे करेंगे.

मेडिकल कॉलेज के डेंटल ओपीडी में होनी चाहिए ये सुविधाएं

जांच : डेंटल ओपीडी में दांतों की जांच की जाती है, इसमें दांतों की स्थिति, मसूड़ों की स्थिति, और मुंह के अन्य हिस्सों की जांच की जाती है.

दांतों की सफाई : डेंटल ओपीडी में दांतों की सफाई की जाती है, जिसमें दांतों की सतह से प्लाक और टार्टर को हटाया जाता है.

दांतों की भराई : डेंटल ओपीडी में दांतों की भराई की जाती है, इसमें दांतों के छेदों को भरा जाता है. दांतों की जड़ का इलाज : डेंटल ओपीडी में दांतों की जड़ का इलाज किया जाता है, इसमें दांतों की जड़ को साफ किया जाता है और उसे मजबूत बनाया जाता है.

दांतों की पुलिंग : डेंटल ओपीडी में दांतों की पुलिंग की जाती है. इसमें दांतों को हटाया जाता है. दांतों की क्राउन और ब्रिज : डेंटल ओपीडी में दांतों की क्राउन और ब्रिज की जाती है, इसमें दांतों को मजबूत बनाने के लिए क्राउन और ब्रिज लगाये जाते हैं.

दांतों की डेंचर : डेंटल ओपीडी में दांतों की डेंचर की जाती है, इसमें दांतों को बदलने के लिए डेंचर लगाये जाते हैं. दांतों की इम्प्लांट : डेंटल ओपीडी में दांतों की इम्प्लांट किया जाता है, इसमें दांतों को बदलने के लिए इम्प्लांट लगाये जाते हैं.

दांतों की व्हाइटनिंग : डेंटल ओपीडी में दांतों की व्हाइटनिंग की जाती है, इसमें दांतों को सफेद बनाने के लिए विशेष प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है.

वर्जन

मेडिकल कॉलेज के डेंटल विभाग में जल्द सभी चिकित्सीय सामान उपलब्ध होंगे. इस दिशा में कार्य किया जा रहा है. वर्तमान में एचओडी को जरूरत के सामान खरीदारी के लिए पांच करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति मिली है. राशि भी एचओडी के खाते में पहुंच चुकी है. वित्तीय संबंधित कुछ प्रक्रिया शेष बची हुई है. जल्द ही इसे पूरा करने के बाद एचओडी अपने विभाग के लिए सामान की खरीदारी कर सकेंगे.

डॉ एसके चौरसिया,

अधीक्षक, एसएनएमएमसीएच

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