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राजा हो या रंक, अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है : अशोकानंद

Updated at : 29 Apr 2024 1:50 AM (IST)
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राजा हो या रंक, अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है : अशोकानंद

जियलगोड़ा मानस मंदिर में नौ दिवसीय मानस महाधिवेशन

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जोड़ापोखर.

जियलगोड़ा मानस मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय मानस महाधिवेशन के पांचवें दिन रविवार को अनिल पाठक व 10 वर्षीय बालक आयुष पाठक ने संगीतमय रामचरित मानस पाठ व भजन से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया. यज्ञ मंडप की परिक्रमा के लिए दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा. अखिलेशचंद उपाध्यक्ष ने प्रवचन में कहा कि रामचरित मानस जैसा मानवता का संदेश देने वाला कोई ग्रंथ नहीं है. 100 वर्ष पूर्व मुस्लिम देश इंडोनेशिया में प्रथम अंतर्राष्ट्रीय मानस महाधिवेशन हुआ था. उन्होंने कहा कि धर्म को नहीं मानने वाले देश रूस में रामचरित मानस का रूसी भाषा में अनुवाद करनेवाले व्यक्ति को सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार लेनिन अवार्ड दिया गया गया. बाल व्यास अशोकानंद जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति अपनी करनी का फल धरती पर भोगना पड़ता है. राजा हो या रंक, सभी को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है. पूर्व पार्षद अनूप साव, व्यापारी रंजन साह, भानू साह ने मंदिर कमेटी को बर्तन प्रदान किया. कमेटी के सचिव पिंटू अग्रवाल व अध्यक्ष धर्मेंद्र राय ने उन्हें अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया. मौके पर अशोक वर्मा, अनुभावक पंडित, मनोहर महतो,संदीप शर्मा, उमेश सिंह, विजय प्रकाश, शंकर मिश्रा, त्रिपुरारी ठाकुर, बृजेश राय, बजरंगी पाठक, राजन कुमार आदि थे.

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