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कागजों पर हो रहा धनबाद नगर निगम का ई-कचरा कलेक्शन, निस्तारण गंभीर चुनौती

Updated at : 14 Feb 2026 2:36 PM (IST)
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Dhanbad News

धनबाद के बरटांड़ में बंद पड़ा ई-कचरा कलेक्शन सेंटर. फोटो: प्रभात खबर

Dhanbad News: झारखंड की कोयलानगरी धनबाद में ई-वेस्ट कलेक्शन की योजना तीन साल बाद भी लागू नहीं हो सकी है. धनबाद नगर निगम के कलेक्शन सेंटर बंद पड़े हैं, जिससे जहरीले कचरे का खतरा बढ़ रहा है. विशेषज्ञों ने पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर असर की चेतावनी दी है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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धनबाद से सुधीर सिन्हा की रिपोर्ट

Dhanbad News: डिजिटल दौर में जहां मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. वहीं ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण की चुनौती भी गंभीर होती जा रही है. धनबाद नगर निगम ने करीब तीन साल पहले शहर में ई-वेस्ट कलेक्शन, री-साइक्लिंग और री-यूज की महत्वाकांक्षी योजना बनायी थी, लेकिन यह योजना अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी.

क्या थी योजना

योजना के तहत ई वेस्ट को री-साइकिल कर उसका दुबारा इस्तेमाल करना है. इसके लिए शहर में तीन जगहों पर ई वेस्ट कलेक्शन सेंटर बनाये गये हैं. डोर-टू-डोर ई-वेस्ट कलेक्शन के लिए अलग से एक टीम काम करेगी. एकत्रित कचरे को ई-कलेक्शन सेंटर में वैज्ञानिक तरीके से री-साइकिल कर उपकरणों के माध्यम से दुबारा इस्तेमाल के लिए प्रोडक्ट तैयार करना है.

कहां बने ई वेस्ट कलेक्शन सेंटर?

नगर निगम ने बरटांड़, धनसार और बनियाहीर क्षेत्र में ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर बनाये हैं. 2022 में ही ई कलेक्शन सेंटर बनकर तैयार हो चुके हैं, पर आज तक इसका ताला नहीं खुला है. अब तो यहां रखे उपकरणों पर जंग लगना भी शुरू हो गया है.

डोर-टू-डोर कलेक्शन नहीं, बढ़ रहा खतरा

डोर-टू-डोर ई वेस्ट कलेक्शन व्यवस्था लागू नहीं होने से लोग पुराने मोबाइल, बैटरी, कंप्यूटर पार्ट्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान सामान्य कचरे के साथ फेंक रहे हैं. जहरीले धातु (सीसा, पारा, कैडमियम) मिट्टी और पानी में घुल रहे हैं. ई वेस्ट के जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है. इससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ रहा है.

उप नगर आयुक्त से सवाल-जवाब

  • सवाल: तीन साल बाद भी योजना जमीन पर क्यों नहीं उतरी?
  • जवाब : टेंडर प्रक्रिया और एजेंसी चयन में विलंब हुआ है, जल्द प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू होगा.
  • सवाल : डोर-टू-डोर कलेक्शन कब से शुरू होगा ?
  • जवाब: पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे कुछ वार्डों में शुरू करने की तैयारी है.
  • सवाल: लोगों को जागरूक करने के लिए क्या कदम उठाये गये हैं?
  • जवाब: स्कूलों और वार्ड स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की योजना है
  • सवाल : ई वेस्ट को री-साइकिल कर क्या प्रोडक्ट बनाने की योजना है
  • जवाब : जिस तरह का ई-वेस्ट कलेक्शन होगा, उसके अनुरूप प्रोडक्ट तैयार किये जायेंगे. पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

बीबीएमकेयू के पूर्व विभागाध्यक्ष इंवायरमेंट साइंस डॉ एसके सिन्हा कहते हैं कि ई-वेस्ट की री-साइकिलिंग आज बड़ी जरूरत बन चुकी है, क्योंकि तकनीक के तेजी से बदलाव के कारण मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जल्द ही बेकार हो रहे हैं और ई-वेस्ट की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है. ई-वेस्ट में सीसा, पारा, कैडमियम जैसे जहरीले तत्व होते हैं, जो खुले में फेंके जाने पर मिट्टी, पानी और हवा को प्रदूषित करते हैं. इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है.

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उन्होंने बताया कि गलत तरीके से ई-वेस्ट निपटाने से मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है. सांस की बीमारी, त्वचा रोग और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ई-वेस्ट की री-साइकिलिंग से इन खतरनाक तत्वों को सुरक्षित तरीके से अलग किया जा सकता है. वहीं इसमें मौजूद तांबा, सोना, चांदी और एल्यूमिनियम जैसी कीमती धातुओं को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है. री-साइक्लिंग में नयी धातु निकालने की तुलना में कम ऊर्जा लगती है, जिससे लागत और कार्बन उत्सर्जन दोनों कम होते हैं. रोजगार के नये अवसर भी पैदा होते हैं और यह स्वच्छ पर्यावरण व सतत विकास की दिशा में एक जरूरी कदम है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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