Dhanbad News: सरकारी आदेश के बाद भी किसी स्कू्ल ने नहीं कराया वाहन सेफ्टी ऑडिट

जिले के 78 सीबीएसइ व पांच आइसीएसइ स्कूलों में चलते हैं 1000 से अधिक वाहन. शिक्षा विभाग ने आदेश के तीन माह बाद भी नहीं पूरी की ऑडिट प्रक्रिया.
जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जारी निर्देशों की अनदेखी सामने आयी है. गत वर्ष नवंबर माह में सरकार की ओर से राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंधन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय का हवाला देते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से जिले के सभी सरकारी समेत सीबीएसई व आइसीएसई मान्यता प्राप्त स्कूलों को आदेश जारी किया गया था कि वे अपने स्कूल में चलने वाले सभी वाहनों की सेफ्टी ऑडिट कराकर विभाग को रिपोर्ट दें. इसके तीन माह बाद भी किसी स्कूल ने अब तक इस दिशा में पहल नहीं की है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा पर भी जोखिम बना हुआ है.
जिले के स्कूलों में चलते हैं एक हजार से अधिक वाहन
जिले में संचालित 78 सीबीएसइ व पांच से अधिक आइसीएसइ बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में एक हजार से अधिक वाहन है. परिवहन विभाग के पास आंशिक आंकड़े जरूर हैं, लेकिन कई स्कूलों ने अब तक अपने वाहनों का अद्यतन विवरण नहीं दिया है. ऐसे में यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल है कि कितने स्कूली वाहन बिना सुरक्षा जांच के सड़कों पर दौड़ रहे हैं.
स्कूल प्रबंधन को उठाना था ऑडिट का खर्च
विभागीय निर्देश में यह स्पष्ट किया गया था कि सेफ्टी ऑडिट की पूरी जिम्मेदारी और खर्च संबंधित स्कूल प्रबंधन को ही वहन करना होगा. इसके लिए अधिकृत एजेंसियों की सूची भी उपलब्ध करा दी गयी थी. इसके बावजूद स्कूलों ने न तो एजेंसियों से संपर्क किया और न ही ऑडिट प्रक्रिया शुरू की.
निर्धारित एजेंसियों से ही कराना है ऑडिट : सेफ्टी ऑडिट के लिए सरकार की ओर से छह एजेंसियों को चिह्नित किया था. इन एजेंसियों को ही वाहन के ब्रेकिंग सिस्टम, फिटनेस, फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट, जीपीएस और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच करनी थी. इन एजेंसियों में पुणे की एआरएआइ, अहमदनगर की वीआरडीइ, मानेसर की आइसीएटी, पुणे की सीआरआरटी, हिसार की एनआरएमटीटी व बूंदी की सीएफएफएमटीटीआइ शामिल हैं.बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए लिया गया था निर्णय
यह निर्णय लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और स्कूल वाहनों में सुरक्षा खामियों को देखते हुए लिया गया था. राज्य स्तर पर सख्त कदम उठाते हुए सभी जिलों को निर्देश दिया गया था कि स्कूल वाहनों की जांच अनिवार्य रूप से करायी जाये.ऑडिट नहीं होने से बढ़ रहा खतरा
सेफ्टी ऑडिट नहीं होने से बिना जांच के चल रहे वाहन कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं. साथ ही, किसी दुर्घटना की स्थिति में स्कूल प्रबंधन व संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी. बीमा दावों में भी दिक्कत आ सकती है.स्कूल प्रबंधन को नहीं मिल रही एजेंसी की जानकारी
कुछ स्कूल प्रबंधन का कहना है कि सेफ्टी ऑडिट के लिए अधिकृत एजेंसियों की पूरी और स्पष्ट जानकारी उन्हें समय पर उपलब्ध नहीं करायी गयी. किस एजेंसी से संपर्क करना है, प्रक्रिया क्या होगी और शुल्क कितना लगेगा, इसे लेकर असमंजस बना हुआ है. इसी कारण कई स्कूल चाह कर भी ऑडिट प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाये हैं.क्या कहते हैं अधिकारी
जिला परिवहन पदाधिकारी दिवाकर सी द्विवेदी ने कहा कि परिवहन विभाग की ओर से भी सभी स्कूलों को नोटिस जारी कर निर्देश दिया जायेगा कि वे निर्धारित मानकों के अनुसार अपने वाहनों का सेफ्टी ऑडिट करायें. आदेश की अवहेलना करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी अभिषेक झा ने कहा कि इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से पहले ही सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किये गए थे कि वे अपने वाहनों का सेफ्टी ऑडिट सुनिश्चित करें. इसके बावजूद अपेक्षित अनुपालन नहीं हो पाया है. कुछ स्कूल की रिपोर्ट विभाग को मिली है. इसकी जांच की जायेगी. जल्द ही स्कूलों को रिमाइंडर नोटिस भेजा जायेगा. इसके बाद भी अगर स्कूल आदेश को नहीं मानते हैं तो उचित कार्रवाई की जायेगी.
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