दशरथ मांझी के संघर्ष और सामाजिक योगदान को ग्रामीणों ने किया याद, कार्यक्रम आयोजित
कार्यक्रम की फोटो
धनबाद में दशरथ मांझी की पुण्यतिथि मनाई गई। वक्ताओं ने उनके संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति को याद करते हुए उन्हें प्रेरणा का स्रोत बताया।
कतरास के लकड़का स्थित लाल घोड़ा में सोमवार को पहाड़ तोड़ बाबा दशरथ मांझी की पुण्यतिथि श्रद्धा के साथ मनाई गई. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष शामिल हुए और उनके संघर्ष एवं सामाजिक योगदान को याद किया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता निरंजन भुइयां ने की. जबकि संचालन राजेंद्र प्रसाद ने किया. मौके पर पार्षद निरुपमा देवी, जिला अध्यक्ष गणेश भुइयां, महामंत्री इंद्रदेव भुइयां, पूर्व मुखिया अर्जुन मुखिया, रामलखन राम, राजकुमार दास, झामुमो नेता रतिलाल टुडू, लखन भुइयां, आजाद भुइयां, राजेश कुमार, लक्ष्मण कुमार, सुनील कुमार, महिला नेत्री पिंकी देवी, रूबी देवी,महादलित परिसंघ के प्रदेश अध्यक्ष किस्मत कुमार मौजूद थे.
संघर्ष की मिसाल थे दशरथ मांझी
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि दशरथ मांझी को ‘माउंटेन मैन’ के नाम से जाना जाता है. बिहार के गया जिले के गेहलौर गांव के रहने वाले मांझी ने अपनी पत्नी की मौत के बाद पहाड़ के कारण होने वाली परेशानी को महसूस किया. इसके बाद उन्होंने अकेले छेनी और हथौड़े से पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का संकल्प लिया.
करीब 22 वर्षों तक अथक मेहनत कर उन्होंने पहाड़ के बीच रास्ता बना दिया. उनका जीवन दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और संकल्प की मिसाल माना जाता है. 2007 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनका संघर्ष आज भी लोगों को प्रेरणा देता है.
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