Dhanbad News: खदान से सीधे रेल रैक तक पहुंचेगा कोयला

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Dhanbad News: खदान से सीधे रेल रैक तक पहुंचेगा कोयला

कोयला ढुलाई में होगा बड़ा बदलाव, 131 मिलियन टन क्षमता की 13 नयी परियोजनाओं पर मंत्रालय का फोकस.

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देश में कोयला परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है. इसके तहत खदानों से निकलने वाला कोयला ट्रकों के बजाय कन्वेयर बेल्ट, साइलो आदि के माध्यम से सीधे रेलवे वैगनों तक पहुंचेगा. इसके लिए कोल इंडिया ने फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाओं पर फोकस बढ़ा दिया है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में 131 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाली 13 एफएमसी परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इनमें झारखंड और पूर्वी भारत के कई महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्र शामिल हैं. गत 24 मई को नई दिल्ली में एफएमसी परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने लंबित परियोजनाओं के काम तेज करने के निर्देश दिये है.

क्या है एफएमसी परियोजना

फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी यानी खदान से निकलने वाले कोयले को पहले चरण में ही यांत्रिक व्यवस्था से रेलवे नेटवर्क तक पहुंचाने की प्रणाली. इसमें कन्वेयर बेल्ट, क्रशर, साइलो और रेलवे लोडिंग सिस्टम विकसित किये जाते हैं. वर्तमान में कई क्षेत्रों में कोयला ट्रकों से रेलवे साइडिंग तक पहुंचाया जाता है. इससे सड़कों पर दबाव बढ़ता है और प्रदूषण की समस्या होती है. एफएमसी प्रणाली इन समस्याओं को काफी हद तक समाप्त कर देगी.

झारखंड को होगा सीधा फायदा

झारखंड के कोयला क्षेत्रों में कई एफएमसी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं. इनमें कारो ओसीपी विस्तार, केडीएच-पूर्णाडीह, झंझरा सीएचपी व बीसीसीएल का महेशपुर साइलो सहित अन्य परियोजनाएं शामिल हैं. इनके शुरू होने से झरिया व बोकारो कोलफील्ड में कोयला निकासी व्यवस्था मजबूत होगी. विशेषज्ञों के अनुसार एफएमसी नेटवर्क विकसित होने से कोयला उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि खदानों से कोयले को तेजी से बाहर भेजा जा सकेगा.

आठ परियोजनाओं में हुई है देरी

कोल इंडिया की समीक्षा में सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्धारित आठ परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं. कुछ परियोजनाओं में रेलवे कनेक्टिविटी नहीं मिल सकी, जबकि कई जगह ठेकेदारों के खराब प्रदर्शन, भूमि संबंधी समस्याओं और साइट हैंडओवर में देरी के कारण काम प्रभावित हुआ. कंपनी ने अब ड्रोन मॉनिटरिंग, मासिक समीक्षा बैठक और विशेष निगरानी तंत्र लागू किया है, ताकि परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके.

क्या होंगे फायदे

– सड़क पर ट्रकों की संख्या घटेगी

– धूल और प्रदूषण कम होगा

– कोयला तेजी से रेलवे तक पहुंचेगा

– परिवहन लागत में कमी आएगी

– खदानों में कोयले का जमाव कम होगा

– उत्पादन और आपूर्ति क्षमता बढ़ेगी

– पर्यावरणीय मानकों का बेहतर पालन होगा

एफएमसी परियोजनाएं एक नजर में

2026-27 का लक्ष्य : 13 परियोजनाएंकुल क्षमता : 131 एमटीवाईस्पिलओवर परियोजनाएं : 8

नई परियोजनाएं : 5

ड्रोन निगरानी शुरू : दिसंबर 2025 से

2019 में शुरू हुआ था एफएमसी कार्यक्रम

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आशीष कुमार

लेखक के बारे में

By आशीष कुमार

आशीष कुमार प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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