Dhanbad News: बीआइटी सिंदरी देगा नये इंजीनियरिंग कॉलेजों को शिक्षक

Edited by ASHOK KUMAR
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राज्य में नये सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खुल रहे हैं, लेकिन उनके संचालन का सबसे बड़ा आधार बन गया है बीआइटी सिंदरी. शिक्षकों की कमी से जूझ रहे इस प्रतिष्ठित संस्थान से ही हर नये कॉलेजों को शिक्षक उपलब्ध कराये जा रहे हैं.

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चंदनकियारी और गोड्डा में शुरू हो रहे इंजीनियरिंग कॉलेजों को यहीं से मिलेंगे शिक्षक

धनबाद.

राज्य में नये सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खुल रहे हैं, लेकिन उनके संचालन का सबसे बड़ा आधार बन गया है बीआइटी सिंदरी. शिक्षकों की कमी से जूझ रहे इस प्रतिष्ठित संस्थान से ही हर नये कॉलेजों को शिक्षक उपलब्ध कराये जा रहे हैं. यही नहीं, यह परंपरा इस वर्ष भी जारी है. झारखंड में बोकारो के चंदनकियारी और गोड्डा में शुरू हो रहे इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए बीआइटी सिंदरी से शिक्षक भेजे जायेंगे. इस प्रक्रिया के तहत प्रो उपेंद्र प्रसाद को चंदनकियारी स्थित बोकारो इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रभारी निदेशक और प्रो मदन गोपाल तिवारी को गोड्डा इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रभारी निदेशक बनाया गया है. ये दोनों बीआइटी सिंदरी के ही शिक्षक थे. इस वर्ष से दो नये कॉलेजों में तीन-तीन विभागों से शैक्षणिक गतिविधियों की शुरुआत होगी और इसके लिए शिक्षक इसी माह से सत्र शुरू होने से पहले प्रतिनियुक्त कर दिये जायेंगे.

इन विभागों से भेजे जायेंगे शिक्षक

बोकारो इंजीनियरिंग कॉलेज (चंदनकियारी) में कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल इंजीनियरिंग विभाग की शुरुआत हो रही है. वहीं गोड्डा इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल एंड मैकट्रॉनिक्स और माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग से हो रही है. इन सभी विभागों के लिए आवश्यक शिक्षक बीआइटी सिंदरी से ही भेजे जायेंगे.

स्वीकृत पदों से आधे से भी कम शिक्षक, फिर भी जिम्मेदारी भारी

बीआइटी सिंदरी में कुल 306 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल यहां सिर्फ 92 स्थायी शिक्षक, 34 संविदा शिक्षक और आठ नीड-बेस्ड शिक्षक कार्यरत हैं. कुल संख्या 134 ही है, जो स्वीकृत पदों का महज 34 प्रतिशत है. इतने कम संसाधनों के बावजूद अन्य कॉलेजों को शिक्षक उपलब्ध कराना संस्थान की क्षमता और दबाव दोनों को दर्शाता है.

छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि, शिक्षकों पर और बढ़ेगा दबाव

बीआइटी सिंदरी में वर्तमान में बीटेक के 11 प्रोग्राम में करीब 3800 छात्र पढ़ रहे हैं. एमटेक के 10 प्रोग्राम में 250 और पीएचडी में 150 शोधार्थी शोध कर रहे हैं. पिछले वर्ष संस्थान में सीटों की संख्या 780 से बढ़ाकर 1115 कर दी गयी है. इससे हर वर्ष छात्रों की संख्या में वृद्धि हो रही है. ऐसे में शिक्षकों पर काम का बोझ और बढ़ेगा, जबकि अन्य कॉलेजों को शिक्षक भेजने की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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