बिहार के सुपौल में जमीन विवाद में चली गोली, युवक की हालत गंभीर

सुपौल में जमीन विवाद में घायल युवक से बयान लेती पुलिस
Bihar Crime: बिहार के सुपौल के एक शांत गांव में देर रात ऐसा कुछ हुआ, जिसने सबको चौंका दिया. अचानक अंधेरा, हंगामा और फिर गोलियों की आवाज. जब तक लोग समझ पाते, एक युवक जमीन पर गिर चुका था.
Bihar Crime: बिहार के सुपौल जिले में रिश्तों की डोर जमीन के विवाद में उलझकर लहूलुहान हो गई. त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र के लतौना वार्ड 13 में रविवार की देर रात वहशीपन का जो नंगा नाच हुआ, उसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है. महज कुछ फीट जमीन के लिए अपनों ने ही अपनों पर गोलियां बरसा दीं. रात के सन्नाटे को चीरती गोलियों की आवाज ने गांव की नींद उड़ा दी.
एक साल पुराना विवाद बना खून-खराबे की वजह
रविवार की रात 19 अप्रैल को जब पीड़ित रंजीत कुमार का परिवार अपने घर में था. 5 से 7 हमलावर अचानक उनके दरवाजे पर आ धमके और गाली-गलौज शुरू कर दी. उन्होंने सबसे पहले घर की बिजली काट दी. इसके बाद लाठी-डंडों से बेरहमी से मारपीट शुरू की गई.
जब परिवार ने विरोध किया, तो हमलावरों ने बदूंक निकाल लिए और फायरिंग शुरू कर दी. इसी बीच एक गोली रंजीत की कमर में जा धंसी और वह खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़े.
अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग
आनन-फानन में रंजीत को अस्पताल ले जाया गया, जहां की स्थिति देखकर डॉक्टर भी सन्न रह गए. डॉक्टर बीएन पासवान के अनुसार, गोली रंजीत की कमर के अंदर ही फंसी हुई है, जिससे उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है. प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उच्च केंद्र रेफर कर दिया गया है.
रंजीत के पिता योगेंद्र यादव और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. उनका कहना है कि यह विवाद एक साल से चल रहा था और थाने में मामला होने के बावजूद पुलिस की सुस्ती ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए, जिसका अंजाम आज इस खूनी वारदात के रूप में सामने आया है.
पुलिस जांच में जुटी
वारदात की खबर मिलते ही एसडीपीओ विभाष कुमार और थानाध्यक्ष राकेश कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और घायल का बयान दर्ज किया है. पुलिस का कहना है कि आरोपी पक्ष हाल ही में थाने में अपने दावों को साबित करने में नाकाम रहा था, जिसकी खीझ उन्होंने इस हमले के जरिए निकाली.
पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. सुपौल का यह मामला एक बार फिर बिहार में बढ़ते जमीनी विवादों और उसके हिंसक परिणामों की गवाही दे रहा है.(इनपुट-राजीव)
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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