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आरएसपी के समक्ष नैक बड़ी चुनौती

धनबाद: आरएसपी कॉलेज झरिया के समक्ष नैक एक्रिडिटेशन (मान्यता) बड़ी चुनौती है. वर्ष 1951 में स्थापित जिले के इस सबसे पुराने कॉलेज का आस्तित्व संकट में है. नैक एक्रिडिटेशन के लिए कॉलेज के आवेदन के आलोक में मई से जुलाई 2015 के बीच निरीक्षण के लिए नैक टीम को यहां आना है, जबकि अभी तक […]

धनबाद: आरएसपी कॉलेज झरिया के समक्ष नैक एक्रिडिटेशन (मान्यता) बड़ी चुनौती है. वर्ष 1951 में स्थापित जिले के इस सबसे पुराने कॉलेज का आस्तित्व संकट में है. नैक एक्रिडिटेशन के लिए कॉलेज के आवेदन के आलोक में मई से जुलाई 2015 के बीच निरीक्षण के लिए नैक टीम को यहां आना है, जबकि अभी तक विकास संबंधी काम शुरू भी नहीं हुए हैं.
क्या है स्थिति : साढ़े सात हजार क्षमता वाले इस कॉलेज में पंद्रह विभाग संचालित हैं, जबकि जब कॉलेज के पास प्रयोगशाला मिला कर कुल 15 कमरे हैं . उनमें से कई की हालत जजर्र है. पुरानी लाइब्रेरी है, लेकिन वह वर्तमान जरूरत के अनुरूप नहीं. प्रयोगशाला अपडेट नहीं है. न मल्टी परपस हॉल है न कॉमन रूप सहित अन्य सुविधाएं हीं.
क्या है सबसे बड़ा संकट : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नये नियम के अनुरूप अब कॉलेज को कोई भी ग्रांट (अनुदान) उसके नैक एक्रिडिटेशन के आधार पर ही मिलेगा. इसके लिए कॉलेज को नये भवन का निर्माण सहित विकास संबंधी कई कार्य कराने हैं. जबकि, माइनिंग विभाग के अनुसार कॉलेज फायर एरिया में है. भविष्य में खतरे को ध्यान में रख कर कॉलेज को दूसरी जगह शिफ्ट कराना जरूरी है. अंदर-अंदर इसकी तैयारी भी चल रही है , ऐसे में यहां कोई नया निर्माण कार्य नहीं हो सकता. लोगों ने इसके विरोध में आंदोलन भी किए. इधर, कॉलेज क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए ट्रेंच कटिंग व अन्य कार्य भी हो रहे हैं. वहीं कॉलेज इस चिंता में है कि वह फायर एरिया में स्थित इस कॉलेज में खर्च कर वह विकास काम कैसे कराये.
बिना आधार विकास कार्य नहीं रोका जायेगा : वीसी
साढ़े सात हजार बच्चों के भविष्य को दावं पर नहीं लगा सकता. कॉलेज को शिफ्ट करने की कोई जानकारी विवि को नहीं है. बिना किसी आधार कॉलेज में विकास कार्य नहीं रोका जायेगा. इसमें कोई शक नहीं स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण इस पुराने प्रतिष्ठित कॉलेज के आस्तित्व खतरे में पड़ गया है.
निर्णय प्रशासन व विवि को करना है : प्राचार्य
प्राचार्य जेएम लुगुन कहते हैं कि मरम्मत को लेकर हाल में टेंडर भी हुआ, लेकिन उसे रोक देना पड़ा. हालांकि नैक के लिहाज से कॉलेज में विकास काम तो कराने ही होंगे, इसपर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता. यह निर्णय प्रशासन व विवि को लेना है कि वह कॉलेज के हजारों स्टूडेंट्स के भविष्य को ध्यान मे रख क्या करना चाहते हैं.
Prabhat Khabar Digital Desk
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