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को-ऑपरेटिव बैंक, पैक्स में काला धन!

धनबाद: काला धन छिपाने के लिए कई सहकारी बैंक, छोटे-छोटे पैक्सों का सहारा लिया जा रहा है. यह आशंका जतायी है केंद्रीय वित्त मंत्रलय ने. केंद्रीय वित्त मंत्रलय के आदेश पर आयकर विभाग ने धनबाद आयकर परिक्षेत्र के सभी जिलों में कार्यरत को-ऑपरेटिव बैंक तथा छोटे-छोटे पैक्स से बड़े खाताधारियों का ब्योरा तलब किया है. […]

धनबाद: काला धन छिपाने के लिए कई सहकारी बैंक, छोटे-छोटे पैक्सों का सहारा लिया जा रहा है. यह आशंका जतायी है केंद्रीय वित्त मंत्रलय ने. केंद्रीय वित्त मंत्रलय के आदेश पर आयकर विभाग ने धनबाद आयकर परिक्षेत्र के सभी जिलों में कार्यरत को-ऑपरेटिव बैंक तथा छोटे-छोटे पैक्स से बड़े खाताधारियों का ब्योरा तलब किया है.

लेकिन बैंकों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है. इस मामले में सहयोग नहीं कर रहे को-ऑपरेटिव बैंक के एक दर्जन शाखा प्रबंधकों का वेतन रोक दिया गया है. सभी को तीन दिनों में लगभग छह हजार खाताधारियों के बारे में सूचना उपलब्ध कराने को कहा गया है.

क्या है पूरा मामला : अधिकृत सूत्रों के अनुसार केंद्रीय वित्त मंत्रलय ने आयकर विभाग को इस बात का पता लगाने को कहा है कि सहकारी बैंकों, पैक्स में बड़े रसूखदारों का पैसा तो जमा नहीं है. मंत्रलय को अंदेशा है कि सरकारी बैंकों में कड़ाई के बाद कर वंचना करने वाले लोग सहकारी बैंकों, पैक्सों में काला धन जमा कर रहे हैं. जांच करने को कहा गया है कि ऐसे बैंकों, पैक्स में सरकारी गाइड लाइन का पूरी तरह से अनुपालन किये हुए खाते खोले जा रहे हैं या संचालित हो रहे हैं अथवा नहीं. कई खाताधारियों के खाते में बहुत लंबे समय से केवाइसी (आवासीय प्रमाण पत्र) भी नहीं जमा हुआ है. धनबाद में को-ऑपरेटिव बैंक तथा पैक्स में कई बड़े कोयला एवं जमीन कारोबारियों के खाता होने की सूचना आयकर विभाग को मिली है. इस संबंध में आयकर विभाग के अनुसंधान शाखा की ओर से को-ऑपरेटिव बैंक तथा निजी बैंकों को पत्र लिख कर बड़े खाताधारियों की सूची मांगी गयी है.
जमीन के धंधे में काला धन का उपयोग
सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग अपने स्तर से भी ऐसे व्यापारियों की सूचना एकत्र कर रहा है, जिनका रिटर्न कम है. लेकिन चल-अचल संपत्ति ज्यादा है. कई जमीन कारोबारियों के बारे में सूचना एकत्रित कर केंद्रीय वित्त मंत्रलय तथा आयकर विभाग के बड़े अधिकारियों को सूचना दी गयी है. एक बड़े आयकर अधिकारी के अनुसार यहां काला धन का ज्यादा इस्तेमाल जमीन कारोबार में हो रहा है.
आयकर विभाग को ब्योरा मुहैया कराया जायेगा
आयकर विभाग से मिले नोटिस का समय पर जवाब नहीं देने के कारण को-ऑपरेटिव बैंक के एक दर्जन मैनेजरों का वेतन रोका गया है. एक सप्ताह के अंदर आयकर विभाग को सूची व ब्योरा मुहैया करा दिया जायेगा. को-ऑपरेटिव बैंक के एक दर्जन शाखा में लगभग छह हजार खाताधारी ऐसे हैं जो आयकर विभाग के नोटिस के मापदंड में आ रहे हैं.
देवेंद्र सिंह, एमडी, को-ऑपरेटिव बैंक, धनबाद.

Prabhat Khabar Digital Desk
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