जंगल में खोद दिया डोभा, ढूंढ़ सकें तो ढूंढ़ लें

Updated at : 04 Aug 2019 5:40 AM (IST)
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जंगल में खोद दिया डोभा, ढूंढ़ सकें तो ढूंढ़ लें

संजीव झा, धनबाद : जंगल में खोद दिया डोभा, ढूंढ़ सके तो ढूंढ़ ले. यह हाल है बलियापुर प्रखंड की आमझर पंचायत के सुफलडीह परघा गांव का है. घने जंगल के बीच एक-दो नहीं, बल्कि 16 डोभा खोद दिये गये. डोभा के नाम पर लाखों रुपये का वारा-न्यारा हो गया. जहां डोभा खुदा वहां आदमी […]

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संजीव झा, धनबाद : जंगल में खोद दिया डोभा, ढूंढ़ सके तो ढूंढ़ ले. यह हाल है बलियापुर प्रखंड की आमझर पंचायत के सुफलडीह परघा गांव का है. घने जंगल के बीच एक-दो नहीं, बल्कि 16 डोभा खोद दिये गये. डोभा के नाम पर लाखों रुपये का वारा-न्यारा हो गया. जहां डोभा खुदा वहां आदमी तो दूर, पशु भी नहीं जा सकते.

विकास के नाम पर लूट : बलियापुर अंचल की आमझर पंचायत के सुफलडीह परघा में मनरेगा से वित्तीय वर्ष 2016-17 में डोभा निर्माण की योजनाएं ली गयी. ग्रामीणों के अनुसार सभी डोभा की खुदाई मशीन के सहारे तीन दिनों में पूर्ण करा दिया गया था. न आमसभा हुई और न ही लाभुकों का चयन. अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने मिल कर योजनाओं का चयन किया और उसे क्रियान्यवित भी करा दिया.
धनबाद से बलियापुर जाने वाली सड़क किनारे स्थित इस गांव में जहां आबादी है तथा जहां किसान खेती करते हैं, वहां डोभा नहीं बनाया गया. बल्कि राजबाड़ी शिव मंदिर जाने वाले रास्ते में एक जंगल में दो सौ मीटर की परिधि में सभी डोभा को खुदवा दिया गया. तीन डोभाें को नियम के खिलाफ बिल्कुल सटा कर खोदा गया है. अभी तीनों में झाड़-झंकार उग आया है.
किसी भी डोभा में पानी नहीं : इस इलाका में अधिकांश डोभा तो जंगल में खो चुका है. बहुत मुश्किल से दिखता है. जंगलों में डोभा के नाम पर कितनी खुदाई हुई यह कोई नहीं बता सकता. खेतों के बीच बने दोनों डोभा भी प्राक्कलन के अनुरूप नहीं है.
ग्रामीणों ने कहा इन डोभा में बरसात के मौसम में ही थोड़ा बहुत पानी जमा होता है. आज तक यहां के किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिला. प्रभात खबर की टीम ने जब डोभा का निरीक्षण किया तो पाया कि सभी डोभे सूख चुके हैं. बरसात के मौसम में भी किसी भी डोभा में पानी जमा नहीं था.
क्या कहते हैं ग्रामीण, मुखिया
यहां बने किसी भी डोभा का इस्तेमाल खेती के लिए नहीं कर पाते हैं. बेकार स्थानों पर डोभा बनाया गया है, जिसमें कभी पानी नहीं रहता. बहुत ज्यादा बारिश होने पर थोड़ा बहुत पानी जमा होता है. खेती के लिए हम लोग बारिश या तालाब के पानी पर निर्भर रहते हैं. मजबूरी में बहुत कम खेती कर पा रहे हैं.
निरंजन मंडल, किसान
सुफलडीह परघा में मनरेगा के तहत डोभा की योजना ली गयी थी. इतना ज्यादा डोभा का निर्माण यहां किसानों के हित में खुदवाया गया था, ताकि खेतों तक पानी पहुंच सके. रखरखाव के अभाव में जंगल-झाड़ उग गया है. डोभा खुदाई के लिए कहीं मशीन का इस्तेमाल नहीं किया गया था.
संतोष रवानी, मुखिया, आमझर पंचायत, बलियापुर
क्या था डोभा निर्माण का उद्देश्य
रघुवर सरकार ने राज्य में डोभा की खुदाई जल संचयन तथा खेती में उपयोग के लिए कराया था. उद्देश्य था कि बरसात में बारिश का पानी डोभा में स्टोर हो सके. साथ ही भू-जलस्तर में भी सुधार हो सके. उसे रिचार्ज किया जा सके. खेती के लिए किसान डोभा के पानी का इस्तेमाल कर सकें. कम से कम सब्जी बगैरह के उत्पादन के लिए इसका उपयोग कर सके.
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