20 फीसदी तक महंगी हुई नौनिहालों की पढ़ाई

Published at :05 Mar 2019 6:31 AM (IST)
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20 फीसदी तक महंगी हुई नौनिहालों की पढ़ाई

धनबाद : शहर के बड़े पब्लिक स्कूलों में अगले एक माह में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है. अपने नौनिहालों को अच्छे स्कूलों में नामांकन कराने का दौर लगभग थम चुका है. ऐसे सभी स्कूलों में एडमिशन के लिए चयनित छात्रों की सूची जारी की जा चुकी है. अब अभिभावकों की कमर टूटने […]

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धनबाद : शहर के बड़े पब्लिक स्कूलों में अगले एक माह में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है. अपने नौनिहालों को अच्छे स्कूलों में नामांकन कराने का दौर लगभग थम चुका है. ऐसे सभी स्कूलों में एडमिशन के लिए चयनित छात्रों की सूची जारी की जा चुकी है. अब अभिभावकों की कमर टूटने की बारी है.

अभिभावकों को पिछले साल के मुकाबले एक ओर 10 से 20 फीसदी तक एडमिशन फीस देनी पड़ रही है. इसके साथ ही इन्हें पहले से तय दुकानों से ड्रेस और किताबें खरीदने का पंपलेट भी स्कूलों में पकड़ा दिया जा रहा है. दूसरी ओर अपने बच्चों के भविष्य की मजबूरी में अभिभावक दुकानों पर किताबें और ड्रेस लेने के लिए पहुंच रहे हैं, जहां लंबा-चौड़ा बिल देख उनके पसीने छूट रहे हैं. स्कूलों की इस मनमानी पर लगाम लगाने में राज्य सरकार या कोई कानून भी असफल दिख रहा है.

नहीं दिख रहा है नया कानून का खौफ : दरअसल राज्य भर में निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए राज्य सरकार ने झारखंड शिक्षा न्यायधीकरण (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी है. नया कानून इसी वर्ष सात जनवरी से लागू भी कर दिया गया है. इस कानून के अनुसार नये सत्र 2019-20 से फीस बढ़ाने से पहले सभी प्रकार के निजी विद्यालयों को अभिभावक शिक्षक समिति से मंजूरी लेनी होगी.
यहां पर किसी तरह का विवाद होने पर इसे जिला समिति में ले जाया जा सकता है, लेकिन स्कूलों व जिला स्तर पर यह समिति अब भी दूर की कौड़ी बनी बनी हुई है. यही हाल पाठ्य पुस्तकों और ड्रेस को लेकर है. स्कूलों का खास दुकानों से पाठ्य पुस्तक या ड्रेस के लिए सीधी साठगांठ है. मगर जिले में इन निर्देशों की हवा निकल गयी है. स्कूलों में हर अभिभावक और विद्यार्थी को तय दुकानों से कोर्स और ड्रेसों की खरीद करने के लिए कहा गया है.
फीस वृद्धि में कोई कम नहीं : फीस वृद्धि को लेकर कोई भी स्कूल पीछे नहीं है. कुछ स्कूलों में अभिभावकों को एक बार में पूरे वर्ष भर की फीस देने के लिए बाध्य किया जा रहा है. स्कूलों द्वारा विभिन्न मदों में लिए जाने वाले वार्षिक शुल्क में भी 10 से 20 फीसदी की वृद्धि कर दी गयी है. इससे अभिभावक खासे परेशान हैं. वहीं शिक्षा विभाग निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने में विफल नजर आ रहा है.
ड्रेस पांच सौ से लेकर हजार मेें : विद्यालय की तय दुकानों पर मनमाने तरीके से अभिभावकों को लूटा जा रहा है. दुकानों में नर्सरी व केजी वन की ड्रेस एक सेट ड्रेस पांच सौ रुपये से शुरू हो रही है. वहीं 10वीं और 12वीं के छात्रों का एक सेट ड्रेस 700 रुपये से लेकर एक हजार रुपये में मिल रही है. वह विगत वर्ष के मुकाबले 20 फीसदी अधिक है.
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