हड़ताल का साइड इफेक्ट : पीएमसीएच के वार्डों में मरीजों को कोई दवा देने वाला नहीं
Updated at : 21 Aug 2018 8:11 AM (IST)
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धनबाद : पीएमसीएच में कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी है. इमरजेंसी में मरीज को ड्रेसिंग करने वाले कर्मी आउससोर्सिंग पर थे. उनके नहीं रहने से मरीजों को परेशानी होने लगी. वहीं वार्ड में मरीजों के समय पर दवा व एंटीबायोटिक देने वाला भी कोई नहीं बचा है. अस्पताल में मात्र 15 के […]
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धनबाद : पीएमसीएच में कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी है. इमरजेंसी में मरीज को ड्रेसिंग करने वाले कर्मी आउससोर्सिंग पर थे. उनके नहीं रहने से मरीजों को परेशानी होने लगी. वहीं वार्ड में मरीजों के समय पर दवा व एंटीबायोटिक देने वाला भी कोई नहीं बचा है. अस्पताल में मात्र 15 के आसपास ही सरकारी नर्स बची है. वहीं लगभग 40 सरकारी कर्मी बचे हैं. अब इन्हीं के जिम्मे मरीजों के 500 सौ बेड हैं. पूरे वार्ड में अव्यवस्था का आलम है. दर्द से मरीज कराह रहे हैं, तो कई मरीज छुट्टी कराकर बाहर जा रहे हैं.
इमरजेंसी@2.30 : मुरली नगर से एक वृद्ध महिला मरीज आयी है. गिरने से हाथ की हथेली कट गयी है. दर्द से लगभग घंटों घटपटाती रही. इसके बाद दो महिला जूनियर डॉक्टर ने कटे हाथ में स्टीच करना शुरू किया. वृद्ध दर्द से कराहती रही. काफी मशक्कत के बाद हाथ में स्टीच लगा पायी. बाहर में भी झरिया व गोविंदपुर से तीन मरीज आये हुए हैं. वहीं भी दर्द से ओटी के पास कराहते रहे.
आइसीयू@2.30: आइसीयू के पास जामताड़ा से सुगदा हेंब्रम नामक महिला इलाज के लिए आयी हैं. महिला को आइसीयू में ले जाना है. लेकिन इमरजेंसी वार्ड में कोई भी वार्ड ब्वॉय नहीं है. मजबूरी में तीमारदार व परिजन खुद स्ट्रेचर ठेल कर अपने मरीज को वार्ड तक पहुंचा रहे हैं. व्हील चेयर लेकर दो, तीन व चौथे तल्ले पर मरीज को ले जाना पड़ रहा है.
क्या हैं मांगें
नर्सों को प्रति दिन 552 रुपये के हिसाब से मानदेय देना है. इस तरह से माह में 16500 से अधिक वेतन हुए. लेकिन नर्सों के अनुसार उन्हें 8500 रुपये मिलते हैं. यही हाल दूसरे कर्मियों का भी है. पूरा वेतन देने की मांग की गयी.
विगत तीन वर्षों का कुल दैनिक मानदेय सरकारी आदेशानुसार दें.
विगत तीन वर्षों का बोनस देना होगा.
सभी कर्मियों का इपीएफ-इएसआइ नियमित देना होगा.
स्वास्थ्य सेवा प्रभावित
ओपीडी में औसतन दो हजार मरीज आते हैं, हड़ताल होने से 17 सौ के आसपास मरीज पहुंचे.
स्त्री व प्रसूति रोग विभाग में औसन 15 से 20 डिलेविरी होती है, लेकिन सोमवार को मात्र (दिन में) तीन नार्मल डिलिवरी व एक सीजर हुआ.
डायलिसिस में चार लोगों का डायलिसिस हो पाया. समान्य 8-10 होते हैं.
ऑपरेशन थियेटर में आधे से कम ऑपरेशन हुए.
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