सीबीएसइ को गलत सूचना देते हैं पब्लिक स्कूल
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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धनबाद : धनबाद के प्राय: पब्लिक स्कूल फीस व अपने यहां उपलब्ध सीटों को ले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसइ) को गलत सूचना देते हैं. यह खुलासा आरटीआइ से हुआ है. झारखंड अभिभावक महासंघ के महासचिव मनोज मिश्रा ने सीबीएसइ से आरटीआइ के जरिये धनबाद के पब्लिक स्कूलों के बारे में जानकारी मांगी थी. उन्होंने […]
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धनबाद : धनबाद के प्राय: पब्लिक स्कूल फीस व अपने यहां उपलब्ध सीटों को ले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसइ) को गलत सूचना देते हैं. यह खुलासा आरटीआइ से हुआ है. झारखंड अभिभावक महासंघ के महासचिव मनोज मिश्रा ने सीबीएसइ से आरटीआइ के जरिये धनबाद के पब्लिक स्कूलों के बारे में जानकारी मांगी थी.
उन्होंने सीबीएसइ को भेजी जाने वाली वार्षिक रिपोर्ट की मांग करते हुए कहा था कि स्कूल बोर्ड को भेजी जानेवाली रिपोर्ट में ट्यूशन फीस काफी कम बताते हैं. वहीं वास्तविकता और होती है. कई स्कूल फीस से 50 फीसदी कम राशि की जानकारी प्रेषित कर रखे हैं. मनोज मिश्रा ने इन स्कूलों को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने सीबीएसइ से धनबाद के पब्लिक स्कूलों से संबंधित यह जानकारी सत्र 2016-17 के लिए हासिल की है. याद रहे, अधिकतर निजी स्कूल शैक्षिक व अशैक्षणिक गतिविधियों के नाम पर धन बटोरने में कोई कोताही नहीं बरतते हैं. जैसे ये धन बटोरने की दुकान बन गये हैं.
पकड़ी गयी गलत सूचना : प्राप्त जानकारी पर गौर करें तो सीबीएसइ से संबद्धता प्राप्त पब्लिक स्कूलों ने ट्यूशन फीस को ले सीबीएसइ से बड़ा झूठ बोला है. सत्र 2016-17 की रिपोर्ट में स्कूलों ने पहली से पांचवीं कक्षा तक की ट्यूशन फीस 310 से 600 रुपये तक दर्शायी है. छठी से आठवीं तक 360 से 650 रुपये, जबकि नौवीं से 12वीं तक 410 से 750 रुपये तक ट्यूशन फीस लेने की बात कही है. वास्तविकता इससे परे है. इन स्कूलों की ट्यूशन फीस किसी वर्ग में 1000 रुपये से कम नहीं है.
छात्रों की संख्या सवालों के घेरे में
प्राय: पब्लिक स्कूलों ने सीबीएसइ को भेजी गयी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में प्रत्येक क्लास में छात्रों की संख्या 55 से लेकर 65 तक बतायी है. जूनियर कक्षाओं में प्रत्येक स्कूल में चार से आठ सेक्शन हैं. जब बात शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीइ) के तहत बीपीएल परिवारों के बच्चों को नामांकन देने की आती है, तो स्कूल शिक्षा विभाग को अपने यहां उपलब्ध सीटों की संख्या कम दिखाते हैं. इस तरह वे दो अलग-अलग सरकारी संस्थाओं को अलग-अलग जानकारी देते हैं.
सरप्लस है आय
प्राय: पब्लिक स्कूल सीबीएसइ के तय मानक से सरप्लस आय कर रहे हैं. स्कूलों का संचालन नॉन प्रोफिटेबल संस्था द्वारा किया जाता है. इसके लिए वे 10 फीसदी से अधिक सरप्लस आय नहीं कर सकते हैं. वित्तीय वर्ष 2014 से लेकर 2017 के दौरान स्कूलों की आय देखें तो यह सरप्लस पायी गयी.
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