संडे ड्यूटी समाप्त, अब स्टेगर्ड रेस्ट शुरू
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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धनबाद : माइंस एक्ट के तहत अब बीसीसीएल सहित कोल इंडिया की सभी सहायक कंपनियों में कर्मचारियों को सप्ताह में 48 घंटे ही काम करना होगा. इसके लिए खदानों में अब 30 दिन काम होगा. बीसीसीएल प्रबंधन ने इसे सख्ती से लागू करने की कवायद तेज कर दी है. कर्मचारियों को अब रविवार को छुट्टी […]
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धनबाद : माइंस एक्ट के तहत अब बीसीसीएल सहित कोल इंडिया की सभी सहायक कंपनियों में कर्मचारियों को सप्ताह में 48 घंटे ही काम करना होगा. इसके लिए खदानों में अब 30 दिन काम होगा.
बीसीसीएल प्रबंधन ने इसे सख्ती से लागू करने की कवायद तेज कर दी है. कर्मचारियों को अब रविवार को छुट्टी की जगह स्टैगर्ड रेस्ट चालू होगा. सनद रहे कि कोल इंडिया में थर्टी डे वर्क लागू करने को लेकर विगत नवंबर माह में अधिसूचना जारी की गयी थी. आधिकारिक सूत्रों की माने तो बीसीसीएल के सभी एरिया में इसे अविलंब लागू किया जायेगा, जबकि कई एरिया व कोलियरी प्रबंधन ने इसे लागू करने को लेकर कोलियरी कार्यालय के बाहर नोटिस भी चिपका दिया है.
रेस्ट के बदले मिलेगा रेस्ट
कोल इंडिया की सभी कंपनी में अब खदानें सातों दिन चलेंगी. कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश एक दिन न होकर अलग-अलग दिन में दिया जायेगा. इसका स्थानीय स्तर पर रोस्टर बना दिया जायेगा. अगर कर्मी को रेस्ट वाले दिन में काम पर बुलाया जाता है तो डबल हाजिरी दी जायेगी.
क्या है रेस्ट का प्रावधान
श्रम कानून के मुताबिक उत्पादन से जुड़े किसी कर्मी से लगातार छह दिन से अधिक काम नहीं लिया जा सकता है. अगर किसी कारणवश कर्मी को काम पर बुलाते हैं तो उसे कम से कम एक माह व अधिक से अधिक दो माह के अंदर कंपनसरी रेस्ट देना है. बीसीसीएल में मैनपावर की कमी थी तो नियमों को ताक पर रख कर संडे ड्यूटी दी जाती थी.
दो हजार करोड़ की होगी बचत
अभी कोल इंडिया में करीब 2.98 लाख मजदूर कार्यरत हैं. इसमें करीब 1.95 लाख से दो लाख कर्मियों को संडे, ओटी आदि का लाभ मिलता है. स्टेगर्ड रेस्ट का नियम लागू होने के बाद ऐसा नहीं होगा. इससे कोल इंडिया को करीब दो हजार करोड़ रुपये की बचत होगी. जानकारी हो कि क्योंकि संडे ड्यूटी करने पर मजदूरों को दो हाजिरी व एक रेस्ट दिया जाता था.
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