Deoghar news बेटियों को पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत, नेतृत्व करने की है उनमें क्षमता

Updated at : 18 Feb 2025 8:29 PM (IST)
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Deoghar news  बेटियों को पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत, नेतृत्व करने की है उनमें क्षमता

देवघर के आरडीबीएम कॉलेज में बेटियों से है माता-पिता का स्वाभिमान थीम पर वर्कशॉप व सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें बेटियों के माता-पिता की मनोदशा पर चर्चा की गयी.

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संवाददाता, देवघर . आरडीबीएम कॉलेज में टू डॉटर्स क्लब और आइक्यूएसी के तत्वावधान में ””बेटियों से है माता-पिता का स्वाभिमान”” थीम पर वर्कशॉप व सेमिनार किया गया और बेटे-बेटियों में फर्क करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्ची की गयी कार्यक्रम की शुरुआत डॉ रीता ठाकुर, डालसा के सेक्रेटरी मयंक तुषार टोपनो, कॉलेज के प्राध्यापक डॉ पीसी दास, डॉ किसलय सिन्हा व को-ओर्डिनेटर ममता कुजूर ने किया. वहीं कार्यक्रम में उपस्थित दो बेटियों के माता-पिता डॉ किसलय सिन्हा, निमिषा रिचर्ड होरो, डॉ नृपाशु लता, रजनी कुमारी और समीर कुमार मिश्रा को अतिथियों ने शॉल ओढ़ाकर व मोमेंटो देकर सम्मानित किया. डॉ रीता ठाकुर ने कहा कि देश में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए कई संस्थाएं काम कर रही है. आज जरूरत उसको पढ़ाने पर फोकस करने की, जिससे वह बचेगी भी और आत्मनिर्भर भी बनेगी. उन्होंने इस दौरान अपने किये गये रिसर्च के स्लाइड भी दिखाये और बताया कि बेटे व बेटियों के सेक्स रेशयो के अंतर से नयी सामाजिक कुरीति पैदा हो सकती है. उन्होंन महिला हिंसा के कारणों पर भी विस्तार से बताया. वहीं कार्यक्रम में डालसा सचिव ने लड़कियों से संवाद स्थापित कर घरेलू जीवन के उदाहरणों के जरिये बेटियों या महिलाओं की महत्ता समझायी. उन्होंने घरेलू कामों में महिलाओं की योगदान की चर्चा की. कार्यक्रम में टू डॉटर्स क्लब के फाउंडर मेंबर ज्ञानेश श्रीवास्तव ने कहा कि बेटियों के मां-बाप को सम्मान देने की पीछे की सोच है कि सामाजिक ताने-बाने में बिना बेटे के मां-पिता को कई तरह की मानसिक प्रताड़नाओं से गुजरना पड़ता है. वह सोच बदलनी है. पत्रकार राकेश रंजन ने बेटियों के आगे रखने के क्या रोड मैप हो सकते है. उसके बारे में बताया और कि बेटे नहीं बेटियां भी किसी परिवार की अगुवा हो सकती है. वहीं प्रो डॉ किसलय सिन्हा, प्रभारी डॉ पीसी दास और आइक्यूएसी की प्रोग्राम को-अर्डिनोटर ममता कजूर ने भी उन माता-पिता की मनोदशा के बारे में समझाया, जिन्हे सिर्फ बेटियों होने के कारण परिवार में ही किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है. सेमिनार का संचालन वरुण राय ने किया और बेटियों के आगे बढ़ाने की इस मुहिम का हिस्सा बनने की अपील की. कार्यक्रम में कई छात्राओं ने भी अपने विचार रखे और घरों में होने वाले भेदभाव के बारे में बताया. कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक, संस्था के सदस्य सहित छात्रा ज्योतिका रावत, श्वेता भारती, साक्षी, अपूर्वा, सोनी और रानी मेघा सिंह ने भी विचार रखे.

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