मकर संक्रांति पर आदिवासी समाज ने शिकार खेलकर मनाया जतरा
मारगोमुंडा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में मकर संक्रांति पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. सभी जाति-समुदाय के लोग इसे अलग-अलग रूप में मनाते हैं. आदिवासी समाज में मकर संक्रांति पर शिकार कर जतरा करने की परंपरा है.
मारगोमुंडा. प्रखंड क्षेत्र विभिन्न गांवों में मकर संक्रांति पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. सभी जाति-समुदाय के लोग इसे अलग-अलग रूप में मनाते हैं. आदिवासी समाज में मकर संक्रांति पर शिकार कर जतरा करने की परंपरा है. मंगलवार को आदिवासी समाज के लोग सुबह पारंपरिक हथियार के साथ जंगलों व खेत, नदी, नाला में जाते हैं और शिकार करते हैं. आदिवासी समुदाय के बच्चे, बूढ़े व युवा पर्व पर घर से तीर धनुष, लाठी, टांगी, कुदाल, बरछी, गुलेल आदि लेकर निकलते हैं. जंगल व नदी-नाला व खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जंगली जानवरों का शिकार कर जतरा बनाते हैं. संताल समाज के लोगों ने बताया कि पूर्वजों की परंपरा के तहत वह 14 जनवरी को शिकार कर जतरा बनाते हैं और 15 जनवरी को नये चावल की खिचड़ी बनाकर सेवन करते हैं. प्रखंड के विभिन्न जंगलों में आदिवासी समाज के विभिन्न टोली शिकार करते नजर आये. आदिवासी समाज में मकर संक्रांति पर शिकार कर जतरा करने की परंपरा
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