पुण्यतिथि किये गये शायर अब्दुल्ला खां गालिब

मिर्जा गालिब उर्दू अदब के महान शायर थे. वे उर्दू अदब के नगीना थे. गर उर्दू अदब से गालिब को निकाल दिया जाय तो उर्दू अदब काफी यतीम हो जायेगी
मधुपुर. शहर के भेड़वा नवाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में उर्दू के महान शायर अब्दुल्ला खां गालिब, हिन्दी के प्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान पुण्यतिथि व डाॅ बसीर वद्र जयंती पर याद किये गये. विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किया. इस अवसर पर धनंजय प्रसाद ने कहा कि मिर्जा गालिब उर्दू अदब के महान शायर थे. वे उर्दू अदब के नगीना थे. गर उर्दू अदब से गालिब को निकाल दिया जाय तो उर्दू अदब काफी यतीम हो जायेगी. उन्होंने उर्दू शायरी को एक अलग अदा, मुकाम व पहचान दी. आज गालिब की शायरी लोगों के सिर चढ़कर बोलता है. गालिब ने खुद ही कहा कि गालिब के अंदाज- ए- बयां कुछ और है. उन्होंने कहा कि सुभद्रा कुमारी चौहान हिन्दी साहित्य जगत की एक बड़ी पहचान थी. राष्ट्रीय बसंत की प्रथम कोकिला के रूप में जानी जाती रही है. उन्होंने बहुत ही कम समय में कम रचना कर काफी ख्याति पायी. उनकी प्रसिद्ध रचनाएं है झांसी की रानी, वीरों का बसंत, जलियांवाला बाग आदि थे. उन्होंने कहा कि डाॅ बसीर वद्र का स्थान मीर तकी मीर की विरासत से है. बसीर वद्र ने शब्दों से अपनी बात बुलवाने का काम किया है. वे उर्दू व हिन्दी के बेहतरीन शायर थे.
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