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पारंपरिक रीति-रिवाज से साथ मनाया गया जिउतिया पर्व

Updated at : 14 Sep 2025 9:58 PM (IST)
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पारंपरिक रीति-रिवाज से साथ मनाया गया जिउतिया पर्व

जिउतिया पर्व धार्मिक वातावरण में मनाया गया

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मधुपुर. शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जिउतिया पर्व धार्मिक वातावरण में रविवार को मनाया गया. इसमें पूर्व से जुड़ी कथा को पंडित व पुरोहितों ने वर्ती महिलाओं को अनुसरण करवाया. इस दौरान कई घरों में मां गौरी की प्रतिमा बनाकर विधि विधान पूर्वक पूजन किया गया. पंचमंदिर हनुमान मंदिर परिसर में पुरोहित पंडित राम नरेश शर्मा व पंडित सुधांशु सोनू ने व्रतियों के बीच कथा कही, जिसको उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव से सुना. आशिन कृष्ण पक्ष के सप्तमी में नवमी तिथि तक महिलाएं जिउतिया पर्व मानती है. महिलाओं ने पुत्र की दीर्घायु जीवन की कामना के लिए निर्जलाव्रत रखकर कथा का श्रवण किया. यह व्रत सभी सौभाग्यवती महिला रखती है. माताएं अपने बच्चों की अच्छी सेहत की कामना से दिन व रात भर निर्जला यानी बिना पानी पिए उपवास रखती हैं. इस व्रत को करने से संतान को लंबी उम्र के साथ अच्छा स्वास्थ्य और संपन्नता प्राप्त होती है. पारंपरिक कथा अनुसार जिउतिया पर्व की अनेक लोक कथाएं प्रचलित है. इसके पूर्व शनिवार को नानी साग, सत्पुतिया, मछली, कंदा, मकई का बाल खीर आदि खाने का महत्व है. पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखा गया. क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बना हुआ है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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