दो वर्षो से बंद पड़ी जलमीनार, ग्रामीणों को नहीं मिल रहा योजना का लाभ

Edited by BALRAM
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हटिया परिसर में लगाये गये एक चापानल के भरोसे लोगों को किसी तरह से पेयजल उपलब्ध हो रहा है.

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करौं. स्थानीय हटिया परिसर में निर्माण कराये गये जलमीनार दो वर्षों से बंद पड़ी है, जिससे लोगों को पीने का पानी नसीब नहीं हो पा रहा है. हटिया परिसर में लगाये गये एक चापानल के भरोसे लोगों को किसी तरह से पेयजल उपलब्ध हो रहा है. सबसे कठिनाई बुधवार को लगने वाले हटिया में लोगों को पानी की समस्या को लेकर जूझना पड़ रहा है. वहीं, हटिया परिसर में एक कुआं भी है. इससे लोग पीने का पानी का उपयोग कर रहे हैं. उक्त कुआं से करौं बाजार के सैकड़ों घर वाले पीने का पानी ले जाकर अपनी प्यास बुझाते हैं. बुधवार को लगने वाले हटिया में कई दर्जनों गांव से लोग हटिया आते है. उन्हें भी पानी की समस्या से जूझना पड़ता है. वहीं, करौं हटिया में बस एवं टेंपो स्टैंड है. इसके कारण लोग गाड़ी पकड़ने आते जाते हैं. उन्हें भी पीने का पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ता है. बताया जाता है जब से जल मीनार का निर्माण किया गया है उसके कुछ ही दिनों के बाद से बंद पड़ी है. इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है. संबंधित विभाग द्वारा जलमीनार ठीक करने की दिशा में कोई पहल नहीं किया जा रहा है. इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. जो कभी भी जन आंदोलन का रूप ले सकता है. आलम यह है कि जल मीनार के चारों ओर झाड़ जंगल बन गया है. लगता है इसे देखने सुनने वाला कोई नहीं है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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