Deoghar news : युवक को दोषी पाकर सुनायी गयी 10 वर्ष की सश्रम सजा, पांच हजार जुर्माना भी लगाया

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Deoghar news : युवक को दोषी पाकर सुनायी गयी 10 वर्ष की सश्रम सजा, पांच हजार जुर्माना भी लगाया

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकुलेश चंद्र नारायण की अदालत ने नाबालिग लड़की को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी पाकर युवक को 10 वर्ष की सश्रम सजा सुनायी.

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विधि संवाददाता, देवघर .अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुकुलेश चंद्र नारायण की अदालत ने आरोपित सुनील कुमार यादव को नाबालिग लड़की को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी पाकर 10 वर्ष की सश्रम सजा सुनायी है. अदालत ने सजायाफ्ता को पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर अभियुक्त को एक साल अतिरिक्त कैद की सजा काटनी होगी. सजा पाने वाला अभियुक्त मोहनपुर थाना के बंधुकुरुम टांड़ गांव का रहने वाला जिसकी उम्र महज 22 वर्ष है. इसके विरुद्ध गांव के ही एक व्यक्ति की शिकायत पर मोहनपुर थाना में 18 अप्रैल 2024 को एफआइआर दर्ज हुआ था. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से घटना के समर्थन में कुल आठ लोगों ने गवाही दी और दोष सिद्ध कराने में सूचक को कामयाबी मिली. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से अपर लोक अभियोजक अजय कुमार साह ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष से अधिवक्ता इशहाक अंसारी ने पक्ष रखा. अभियोजन व बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद नामजद को दोषी पाकर उपरोक्त सजा सुनायी गयी व अर्थदंड भी लगाया गया.

क्या था मामला

दर्ज मुकदमा के अनुसार एक साथ दो लड़की अपने घर से शौच के लिए निकली थी. रास्ते में घात लगाकर दो युवक बैठा था और गलत नीयत से पकड़ा लिया था. एक लड़की किसी तरह युवकों के कब्जे से भाग कर घर आ गयी. दूसरी नाबालिग का पता नहीं चला. गायब नाबालिग लड़की के परिजनों ने जब खोजबीन की, तो खेत में बने एक सिंचाई कूप के पास लड़की का चप्पल देखा. ग्रामीणों ने झग्गर के सहारे कूप में खोजा तो लड़की का शव मिला. इसके बाद मृतका के पिता के बयान पर नाबालिग की साजिश के तहत हत्या करने की धाराओं में केस दर्ज हुआ और ट्रायल चला. अदालत ने आत्महत्या के लिए मजबूर करने की धारा 305 में दोषी करार देते हुए सजा सुनायी. केस का स्पीडी ट्रायल हुआ व मृतका के पिता को महज 20 माह के अंदर न्याय मिला.

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फाल्गुनी मारिक

लेखक के बारे में

By फाल्गुनी मारिक

विगत 32 वर्षों से प्रभात खबर में पत्रकारिता करते आ रहा हूं. विशेष तौर पर कोर्ट से संबंधित खबरों के अलावा श्रावणी विशेषांक -बिल्व पत्र में धार्मिक आलेख लेखन, दुर्गापूजा के अवसर पर निकाली गयी दुर्वाक्षत में धार्मिक लेख लिखने, सामयिक कॉलम कोर्ट कचहरी का चक्कर, क्राइम स्टोरी आदि लेखन का अनुभव है. साथ ही लोक भाषा खोरठा में कविता, कहानी लेखन का अनुभव है. झारखंड अधिविध परिषद रांची के वर्ग अष्टम के पाठ्यक्रम में तथा आचार्य विनोवा भावे विश्वविद्यालय में बीए की कक्षा के पाठ्यक्रम में कविता शामिल हो चुकी है. विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविताएं, कहानियां व आलेखों का भी प्रकाशन हो चुका है.

प्रभात खबर में विगत 32 वर्षों से पत्रकारिता का अनुभव. विशेष तौर पर अदालत की खबरों पर पकड़ है. इसके अलावा विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं पर आलेख छपते रहा है. बिल्व पत्र श्रावणी विशेषांक में धार्मिक आलेख, सामयिक कॉलम- कोर्ट कचहरी का चक्कर, क्राइम स्टोरी आदि लेखन करते रहे हैं. लोक भाषा खोरठा की जानकारी है एवं इनकी कविता झारखंड अधिविध परिषद में वर्ग अष्टम तथा बिनोवा भावे विश्वविद्यालय में बीए पाठ्यक्रम में शामिल है.

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