बांग्ला सावन 2026: बाबा बैद्यनाथ धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, स्पर्श पूजा का मिला विशेष अवसर

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बांग्ला सावन की हुई शुरुआत

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Bangla Shravan 2026: बांग्ला सावन शुरू होते ही बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है. इस दौरान भक्तों को जलाभिषेक के साथ शिवलिंग की स्पर्श पूजा का विशेष अवसर मिलता है.

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Bangla Sawan 2026: शुक्रवार से बांग्ला पंचांग के अनुसार सावन माह की शुरुआत हो गई है. इस पवित्र महीने को भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. बांग्ला पंचांग का पालन करने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे हैं. सावन शुरू होते ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है. शिवभक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं.

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पांच सोमवार का विशेष संयोग

इस वर्ष बांग्ला सावन 17 अगस्त तक रहेगा और इसमें पांच सोमवार पड़ रहे हैं, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है. पहली सोमवारी 20 जुलाई, दूसरी 27 जुलाई, तीसरी 3 अगस्त, चौथी 10 अगस्त और पांचवीं 17 अगस्त को होगी. सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा का महत्व होता है. मान्यता है कि इन दिनों विधिपूर्वक जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

पूर्वी राज्यों और पड़ोसी देशों से पहुंचते हैं भक्त

बाबा बैद्यनाथ धाम में पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा समेत पूर्वी भारत के विभिन्न राज्यों और पड़ोसी देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. वरिष्ठ पंडा लंबोदर परिहस्त के अनुसार बांग्ला सावन का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है और इस दौरान प्रतिदिन 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं. हिंदी पंचांग के सावन में अत्यधिक भीड़ के कारण अरघा प्रणाली से जलाभिषेक कराया जाता है, जबकि बांग्ला सावन में भक्तों को शिवलिंग स्पर्श कर पूजा करने का अवसर मिलता है.

स्पर्श पूजा और बेलपत्र अर्पण का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बांग्ला सावन में भगवान शिव को दुर्लभ बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इसी अवधि में मां दुर्गा और मां काली की प्रतिमाओं के निर्माण का कार्य भी शुरू हो जाता है. नेपाल सीमा से सटे बिहार के किशनगंज और अररिया सहित कई क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु हर वर्ष बांग्ला सावन में बाबा धाम पहुंचकर जलाभिषेक और स्पर्श पूजा करते हैं. उनका मानना है कि इस दौरान भगवान शिव के निकट जाकर पूजा करने से विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है.


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