सीएस के आदेश के बाद भी सरकारी 10 एंबुलेंस में नहीं लगा जीपीएस, प्राइवेट पर दे रहे दबाव
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Nov 2019 2:48 AM
देवघर : जिले से भी चल रहे गैर सरकारी अस्पताल, क्लिनिक और अन्य सस्थानों से एंबुलेंस की सूची सिविल सर्जन की ओर से मांगी गयी थी. साथ ही सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थान के एंबुलेंस में जीपीएस लगाने का आदेश सिविल सर्जन की ओर से दिया गया था. लेकिन अबतक किसी भी गैर सरकारी […]
देवघर : जिले से भी चल रहे गैर सरकारी अस्पताल, क्लिनिक और अन्य सस्थानों से एंबुलेंस की सूची सिविल सर्जन की ओर से मांगी गयी थी. साथ ही सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थान के एंबुलेंस में जीपीएस लगाने का आदेश सिविल सर्जन की ओर से दिया गया था. लेकिन अबतक किसी भी गैर सरकारी अस्पताल, क्लिनिक, और अन्य संस्थानों से एंबुलेंस की सूची नहीं दी गयी. साथ ही किसी भी सरकारी और प्राइवेट एंबुलेंस में जीपीएस नहीं लग सका है.
स्वास्थ्य विभाग की ओर से ही चलाये जा रहे दस सरकारी एंबुलेंस में अबतक जीपीएस नहीं लगा है और निजी एंबुलेंस वालों पर दबाव बनाया जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकारी एंबुलेंस में ही जीपीएस लगाने के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है तो फिर प्राइवेट एंबुलेंस पर दबाव क्यों दिया जा रहा है. पहले अपनी व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत है तब आदेशों का अनुपालन होना चाहिए.
कब कब निकाला गया था आदेश : स्वास्थ्य विभाग के आदेशानुसार सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार ने निजी अस्पताल, क्लिनिक और अन्य संस्थानों से तीन बार 07, 19 तथा 25 सितंबर को पत्र जारी कर एंबुलेंस की सूची मांगी गयी थी. दो दिनों को वाहनों की सूची जमा करने की चेतावनी भी दी थी. लेकिन, अबतक एंबुलेंस की सूची विभाग को नहीं सौंपी गयी.
इसके अलावा सरकारी और सभी गैर सरकारी एंबुलेंस में जीपीएस लगाने के लिए 25 सितंबर तथा नौ नवंबर को सीएस कार्यालय से पत्र जारी किया गया था. जिसमें सभी एंबुलेंस में जीपीएस लगाने को आदेश दिया गया था. 24 घंटे के अंदर सभी एंबुलेंस में जीपीएस लगाते हुए विभाग को सूचना देने को कहा गया था.
जीपीएस लगाने से क्या मिलती है सुविधा : जिले के सभी सरकारी और गैर सरकारी एंबुलेंस में जीपीएस लगाये जाने से, दुर्घटना ग्रस्त लोगों को सुविधा मिलेगी. देवघर जिले के किसी भी जगह पर यदि किसी प्रकार की घटना होती है, तो तुरंत जीपीएस के माध्यम से आसपास क्षेत्र में रहे एंबुलेंस को कनेक्ट किया जा सकेगा. उसे घटना स्थल भेजा जा सकेगा ताकि, जल्द घायल मरीज को अस्पताल पहुंचाया जा सके. उसकी जान बचायी जा सके.
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