प्राइवेट क्लिनिक में दो नवजात की मौत के बाद परिजनों का हंगामा
Updated at : 12 Nov 2019 7:43 AM (IST)
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देवघर : बाजला कॉलेज के बगल में स्थित एक डॉक्टर दंपती के क्लिनिक में नवजात बच्ची की मौत के बाद परिजन काफी आक्रोशित हो गये. इससे वहां हंगामे की स्थिति बन गयी. परिजन डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा रहे थे. हालांकि अभिभावक की सतर्कता के कारण बात नहीं बढ़ी. अभिभावक द्वारा आक्रोशित परिजनों को […]
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देवघर : बाजला कॉलेज के बगल में स्थित एक डॉक्टर दंपती के क्लिनिक में नवजात बच्ची की मौत के बाद परिजन काफी आक्रोशित हो गये. इससे वहां हंगामे की स्थिति बन गयी. परिजन डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा रहे थे. हालांकि अभिभावक की सतर्कता के कारण बात नहीं बढ़ी. अभिभावक द्वारा आक्रोशित परिजनों को संभाल लिया गया.
घटना की सूचना मिलते ही नगर थाना प्रभारी सह पुलिस निरीक्षक विक्रम प्रताप सिंह व एएसआइ रामानुज सिंह पुलिस बलों के साथ मौके पर पहुंचे और जांच-पड़ताल में जुट गये. बाद में पुलिस ने मृत नवजात के परिजनों को थाने आकर शिकायत देने कहा. परिजन थाने पहुंचे भी, लेकिन नवजात बच्ची का पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं हुए.
परिजनों के मुताबिक, चितरा थाना क्षेत्र के सहरजोरी गांव निवासी संतोष कुमार सिंह की पत्नी प्रिया सिंह डॉ रीता ठाकुर व सतीश ठाकुर के क्लिनिक में सात नवंबर को भर्ती कराया गया. प्रिया को बच्ची हुई इसके बाद क्लिनिक से जच्चे-बच्चे की छुट्टी कर दी गयी. नवजात की हालत ठीक नहीं लगी, तो एक दूसरे शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाने परिजन ले गये.
उक्त डॉक्टर ने उसे निमोनिया होने की बात कहते हुए बोला कि जहां जन्म हुआ, वहीं ले जाइये. इसके बाद बच्ची को डॉ सतीश ठाकुर के पास लाकर भर्ती कराया गया.
हर दिन डॉक्टर द्वारा ठीक बताया गया, लेकिन सोमवार दोपहर में उसकी अचानक मौत हो गयी. पूछने पर डॉक्टर ने कहा कि निमोनिया के वजह से फेफड़े में ब्लड आने के कारण नवजात की मौत हुई है. इस संबंध में संतोष के पिता मोहन सिंह द्वारा नगर थाने में शिकायत भी दी गयी है. नगर पुलिस मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है.
इधर, उसी क्लिनिक में 14 दिनों से इलाजरत मारगोमुण्डा थाना क्षेत्र के लहरजोरी गांव निवासी समीर कुमार दे के भी एक नवजात की मौत हो गयी. समीर ने बताया कि उसके पुत्र की मौत गुर्दा में इंफेक्शन व सिर में ब्लड जमने से होने की बात कही गयी. समीर ने बच्चे की मौत से संबंधित कोई शिकायत थाने में नहीं दी है.
डॉक्टर ने कहा
मामले में डॉ सतीश ठाकुर ने बताया कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती है. नवजात को सीवियर डिजिज था और फेफड़े में ब्लीडिंग (पल्मोनरी हेम्ब्रेज) होने से उसकी मौत हुई है. आरोप निराधार है.
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