देवघर में एम्स लाने का प्रमाण दें, मैं संन्यास ले लूंगा : निशिकांत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Apr 2019 9:02 AM
संजीत मंडल सांसद डॉ निशिकांत ने हेमंत सोरेन, बाबूलाल मरांडी व प्रदीप यादव को दी चुनौती, कहा 2017 के बजट में मिली थी स्वीकृति, उस समय हेमंत सोरेन क्या थे देवघर : मोहनपुर प्रखंड के भगवानपुर में शनिवार को महागठबंधन की रैली में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस बयान […]
संजीत मंडल
सांसद डॉ निशिकांत ने हेमंत सोरेन, बाबूलाल मरांडी व प्रदीप यादव को दी चुनौती, कहा
2017 के बजट में मिली थी स्वीकृति, उस समय हेमंत सोरेन क्या थे
देवघर : मोहनपुर प्रखंड के भगवानपुर में शनिवार को महागठबंधन की रैली में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस बयान कि ‘देवघर को एम्स मेरे कलम से मिला है’ को सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने चुनौती दी है. डॉ दुबे ने कहा है कि देवघर के देवीपुर में एम्स लाने या स्वीकृति करवाने संबंधी कोई भी प्रमाण यदि पूर्व सीएम हेमंत सोरेन, बाबूलाल मरांडी या प्रदीप यादव दे दें, तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा.
सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2017 के बजट में इसकी स्वीकृति दी, उस वक्त हेमंत सोरेन क्या थे? कैसे उन्होंने देवघर में एम्स देने की बात कही. हेमंत, बाबूलाल व प्रदीप यादव जनता को बतायें कि देवघर में एम्स लाने की किसी फाइल में उन्होंने हस्ताक्षर किया है क्या?
हेमंत चाहते थे दुमका या बोकारो में बने एम्स
सांसद डॉ दुबे ने कहा : जब 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा था कि ”वे चाहते हैं कि हर राज्य में एक एम्स बनायें.” जून 2014 में मैंने संताल जैसे पिछड़े इलाके के लिए एम्स की मांग की. तब झारखंड में यूपीए की सरकार थी और सीएम हेमंत सोरेन थे. जब एम्स का प्रस्ताव केंद्र की ओर से मांगा गया, तो तत्कालीन सीएम हेमंत ने अधिकारियों को दुमका और बोकारो में स्थल चयन का निर्देश दिया था. क्योंकि हेमंत चाहते थे कि दुमका या बोकारो में एम्स की स्थापना हो.
उस वक्त तत्कालीन पर्यटन मंत्री सुरेश पासवान ने भी हेमंत की ‘हां’ में ‘हां’ मिलाया था. लेकिन तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी सजल चक्रवर्ती ने देवघर और दुमका दोनों ही जिले के डीसी को जमीन तलाशने का निर्देश दिया. इसी क्रम में तत्कालीन देवघर डीसी ने देवीपुर में 237 एकड़ जमीन उपलब्ध होने की जानकारी सरकार को दी. इसके बाद तत्कालीन सरकार ने चीफ सेक्रेटरी सजल चक्रवर्ती को हटा दिया. उसके बाद तत्कालीन हेमंत सरकार ने एम्स की फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया.
रघुवर ने सीएम बनते ही एम्स की फाइल साइन की
डॉ निशिकांत ने कहा कि दिसंबर 2014 में जब झारखंड में भाजपा की सरकार बनी और रघुवर दास सीएम बने. उस वक्त मैंने उनसे बाबाधाम में एम्स मांगा. वादे के मुताबिक सीएम ने बतौर सीएम देवघर में एम्स की फाइल साइन की और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेज दिया. इस प्रस्ताव में सरकार ने एम्स के लिए जरूरी 237 एकड़ जमीन उपलब्ध होने की भी बात कही गयी.
देवघर में एम्स बनाने के विरोध में थे कई सांसद
सांसद डॉ दुबे ने कहा कि जब रघुवर सरकार ने एम्स का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, तब झारखंड के ही कई सांसदों ने केंद्र को पत्र लिखकर देवघर में नहीं, रांची में एम्स की स्थापना की बात कही थी. इसमें कुछ भाजपा भी सांसद शामिल थे. तमाम विरोधों के बावजूद सीएम रघुवर ने इरादा नहीं बदला.
लोस की याचिका समिति के समक्ष रखा पक्ष
श्री दुबे ने इस दौरान लोकसभा की याचिका समिति के समक्ष देवघर में एम्स क्यों जरूरी है और कैसे यह इलाका एम्स के लिए उपयुक्त है, पूरी बात मजबूती के साथ रखी.
देवघर में एम्स की स्थापना में हो रही देरी को लेकर कई बार लोकसभा में मामला उठाया. तब याचिका समिति ने 9.12.2016 को देवघर एम्स को हरी झंडी दी. इसके लिए 2017-18 के बजट में 1103 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान भी कर दिया गया.
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