अपनों ने दिखायी बेरुखी, अब जिंदगी की जंग लड़ रहे वृद्ध
Updated at : 27 Sep 2018 5:54 AM (IST)
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देवघर : सदर अस्पताल में पिछले छह महीने से दो बुजुर्ग जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं. अस्पताल में इनकी स्थिति मानवीय संवेदनाओं को शर्मसार करने वाली है. बुजुर्गावस्था में दोनों को न तो अपनों का साथ मिला और न ही शहर के समाजसेवियों का. गंदगी व बदबू वाले कमरे में इन्हें मरने की हालत […]
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देवघर : सदर अस्पताल में पिछले छह महीने से दो बुजुर्ग जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं. अस्पताल में इनकी स्थिति मानवीय संवेदनाओं को शर्मसार करने वाली है. बुजुर्गावस्था में दोनों को न तो अपनों का साथ मिला और न ही शहर के समाजसेवियों का. गंदगी व बदबू वाले कमरे में इन्हें मरने की हालत में छोड़ दिया गया. लावारिस की भांति बेचारे दोनों बुजुर्ग जिंदा लाश बनकर रह गये हैं.
इलाज करने की बजाय अस्पताल प्रबंधन ने इन्हें ऊपरी तल्ले के एक ऐसे कमरे में छोड़ दिया, जहां गंदगी व बदबू के अलावा कमरे में कुछ भी नहीं है. अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति भी इस कमरे में आ जाये तो यहां से बीमार होकर ही निकले. मास्क लगाकर भी यहां नहीं आया जा सकता.
10 मार्च से ही भर्ती हैं झाझा के उमेश
जमुई जिला अंतर्गत झाझा थाना क्षेत्र के गोविंदपुर गांव निवासी उमेश मंडल को 10 मार्च को ही अस्पताल में पैर टूटने की शिकायत को लेकर भर्ती कराया गया था. उनके परिजनों को भी जानकारी दी गयी. लेकिन देखने तक नहीं आये. अस्पताल के डॉक्टरों ने उसके पैर में प्लास्टर कर रेफर कर दिया. लेकिन मरीज के बायें पैर के जांघ की हड्डी टूट कर बाहर निकल आयी है. ऑपरेशन करने की अावश्यकता है. अब उमेश के न परिजन आ रहे हैं और न ही अस्पताल प्रबंधन उनके इलाज के प्रति गंभीर दिख रहा. लावारिस की तरह बेड पर पड़े हैं.
झुन्नू साह भी महीनों से भर्ती
देवघर के सन्नी राउत ने झुन्नू साह को छह महीने पहले ही अस्पताल में भर्ती कराया था. झुन्नु को महीनों से पेशाब में दिक्कत हो रही थी. उसने अपना नंबर भी मरीज के बीएसटी में लिखवाया है. लेकिन उसका नंबर अब नहीं लगता है. इसके बाद डॉक्टरों ने उसे कैथेटर लगा कर अस्पताल में भर्ती कर दिया गया. अस्पताल कर्मियों ने बताया कि वह बीच में कहीं चला गया था. दो महीना पहले फिर से वापस अस्पताल में आया व भर्ती हो गया. उनका भी कोई परिजन देखने व हाल-चाल भी पूछने तक नहीं आये.
इंसानों के साथ जानवर जैसा सलूक
अस्पताल प्रबंधन की ओर से अस्पताल में मरीजों के लिए भोजन बनाने वाले कर्मियों को दोनों को खाना देने को कहा गया है. लेकिन कर्मियों ने भी उनके साथ जानवर जैसा सलूक कर दोनों को जैसे -तैसे भोजन दे दिया जाता है. जो मरीज उठ नहीं सकते उनके पैर के पास खाना रख दिया जाता है. अब वह खाना कैसे लेकर खा पायेंगे.
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