मसानजोर डैम विवाद : झारखंड व बंगाल के बीच मामला गहराया, लोकसभा में गूंजा मुद्दा केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Aug 2018 7:00 AM

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नयी दिल्ली /देवघर : दुमका के मसानजोर डैम का मुद्दा सोमवार को लोकसभा में छाया रहा. गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने लोकसभा में मसानजोर डैम के मुद्दे को मजबूती से भारत सरकार के सामने रखा. सांसद ने कहा : बंगाल की मुख्यमंत्री झारखंड जैसे छोटे राज्य को दबाने का काम कर रही हैं. मसानजोर […]

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नयी दिल्ली /देवघर : दुमका के मसानजोर डैम का मुद्दा सोमवार को लोकसभा में छाया रहा. गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने लोकसभा में मसानजोर डैम के मुद्दे को मजबूती से भारत सरकार के सामने रखा. सांसद ने कहा : बंगाल की मुख्यमंत्री झारखंड जैसे छोटे राज्य को दबाने का काम कर रही हैं. मसानजोर डैम को लेकर 1978 में जो तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर और बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने जो एग्रीमेंट साइन किया था. उस एग्रीमेंट का अनुपालन आज तक बंगाल सरकार ने नहीं किया.
श्री दुबे ने कहा : एग्रीमेंट में यह साफ है कि यदि बंगाल सरकार एग्रीमेंट का अनुपालन नहीं करती है तो डैम के अॉर्बीट्रेटर सुप्रीम कोर्ट के जज होंगे. एग्रीमेंट हुए 40 साल बीत गये. बंगाल सरकार न तो दो डैम बनायी न बिजली दे रही है और न पानी. इसलिए भारत सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और झारखंड की जनता को न्याय दिलाये. झारखंड में सिंचाई के साधन नहीं
सांसद डॉ निशिकांत ने लोकसभा में कहा : मैं जिस राज्य से आता हूं, झारखंड, किसानों की हालत बेहद खराब है. यहां केवल आठ प्रतिशत सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं. कांग्रेस की सरकार ने 1951-52 में तीन डैम बनाये. उसमें से एक मसानजोर है. जो मेरे इलाके में है. जो नदी मयूराक्षी है वह मेरे लोकसभा देवघर से निकलती है. अभी का मसला वही है. झारखंड की कैबिनेट मंत्री लोइस मरांडी वो धरने पर बैठी हुई हैं. कल से लगातार आंदोलन चल रहा है.
ये जो मसानजोर, पंचेत और मैथन डैम बना, तीनों के तीनों झारखंड की जमीन पर बना. इसमें यह तय हुआ था कि संतालपरगना के रानीश्वर प्रखंड को पानी दिया जायेगा. उसके बाद 1978 में इसका एक रिवीजिट हुआ. उस वक्त के तत्कालीन सीएम कर्पूरी ठाकुर जी और बंगाल के सीएम ज्योति बसु जी ने 19 जुलाई 1978 को एक एग्रीमेंट साइन किया. इसमें यह तय हुआ कि इन डैम के बदले बंगाल सरकार को दो डैम बनाना है- एक नून डैम और कालीपहाड़ी डैम.
40 साल में आज तक वह डैम नहीं बना. डैम हमारी जमीन पर है, जो गेट लगा है हमारा है. उस डैम पर बंगाल सरकार ने कब्जा कर लिया है. दूसरा जो डैम का गेट है उस पर भी बंगाल सरकार ने कब्जा कर लिया है. वीरभूम के डीसी-एसपी जाते हैं और हमसे लड़ने को तैयार हैं. मेरा आपके माध्यम से आग्रह है कि 1978 में जो एग्रीमेंट हुआ था. वह एग्रीमेंट यह कहता है कि यदि अर्बीट्रेटर जो स्टैंडिंग सुप्रीम कोर्ट का जज होगा, यदि यह एग्रीमेंट लागू नहीं होगा. इसलिए भारत सरकार से आग्रह है कि हम लोगों को न्याय दिलाइये.
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, जिनको प्रधानमंत्री बनने की इच्छा है वो झारखंड जैसे छोटे राज्य को दबाने का जो काम मुख्यमंत्री जीकर रही हैं, उसमें भारत सरकार हस्तक्षेप करे और हम लोगों को न्याय दिलाये.”
सांसद डॉ निशिकांत ने शून्यकाल में कहा : 1978 के एग्रीमेंट का अनुपालन नहीं कर रही बंगाल सरकार, केंद्र करे हस्तक्षेप
एग्रीमेंट के मसौदे के मुताबिक अनुपालन नहीं करने पर डैम के अॉर्बीट्रेटर सुप्रीम कोर्ट के जज होंगे
उल्टे चोर कोतवाल को डांटे : इच्छा रखती हैं पीएम बनने की व झारखंड जैसे छोटे राज्य को मुख्यमंत्री दबा रही हैं
40 सालों में न तो नून डैम बना और न ही कालीपहाड़ी डैम
वीरभूम के एडीएम पहुंचे दुमका, नहीं हुई डीसी से मुलाकात
दुमका. मसानजोर डैम प्रकरण में पश्चिम बंगाल के दो अधिकारी दुमका समाहरणालय पहुंचे. यहां उन्हें जिले के डीसी मुकेश कुमार के साथ मसानजोर विवाद तथा हाल में उत्पन्न विषयों पर बैठक करना था. लेकिन यहां उन्हें पता चला कि डीसी बासुकिनाथ में श्रावणी मेले की दूसरी सोमवारी का प्रबंधन देख रहे हैं. जानकारी पाकर दोनों अधिकारी बिना बैठक किये बैरंग वापस हो गये. पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के एडीएम रंजन कुमार झा और मयुराक्षी सिंचाई परियोजना के कार्यपालक अभियंता किंशुक मंडल दुमका डीसी के साथ वार्तालाप के लिए पहुंचे थे.
मुद्दा था मसानज़ोर डैम को लेकर चल रहा लोगो विवाद तथा रंग-रोगन का बंद कराया जाना. यहां के डैम के समीप झारखंड की सड़क पर बंगाल सरकार ने गेट बनवा दिया है, जिस पर वेस्ट बंगाल लिखे जाने व वहां का लोगो लगवाये जाने पर बवाल मचा हुआ है. डैम पर हो रहे कलर को लेकर भी बहस जारी है. बंगाल के दोनों अधिकारी लगभग आधे घंटे से अधिक समाहरणालय में बैठे रहे. वीरभूम के एडीएम रंजन कुमार झा ने बताया कि वे अपने डीएम के निर्देश पर मसानजोर डैम में हो रहे विवाद पर चर्चा के लिए आये थे. जब उनसे इस विवाद पर उनका पक्ष पूछ गया तो उन्होंने किसी भी तरह का जवाब देने या टिप्पणी करने से इंकार कर दिया.
दुमका के उपायुक्त के कार्यालय के बाहर बैठे पश्चिम बंगाल से आये पदाधिकारी.
केंद्र व दोनों राज्यों की सहमति से सार्वजनिक हो सकता है एकरारनामा
कोलकाता. झारखंड सरकार की समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी द्वारा मसानजोर डैम का एकरारनामा खुलासा करने की मांग को खारिज करते हुए पश्चिम बंगाल के सिंचाई मंत्री सोमेन महापात्रा ने कहा कि वर्ष 1950 में केंद्र सरकार की मध्यस्थता में बिहार सरकार व पश्चिम बंगाल सरकार के बीच त्रिपक्षीय स्तर पर एकरारनामा हुआ था. इस कारण इस एकरारनामा का खुलासा सभी पक्षों की सहमति से ही संभव है. कोई एक पक्ष इस एकरारनामा का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं कर सकता है.
श्री महापात्रा ने सोमवार को प्रभात खबर से बातचीत करते हुए कहा कि फिलहाल यह मुद्दा एकरारनामा के खुलासे का नहीं है, वरन विवाद सुलझाने का है. पश्चिम बंगाल सरकार चाहती है कि इस विवाद का समाधान हो. उन्होंने कहा कि विवाद को हल करने के लिए बुधवार को वीरभूम और दुमका के जिलाधिकारी की बैठक होगी. इस बैठक में विवाद का हल निकालने की कोशिश की जायेगी. सोमवार को पश्चिम बंगाल के अधिकारियों से दुमका के जिलाधिकारी के मुलाकात नहीं करने के संबंध में पूछे जाने पर श्री महापात्रा ने कहा कि व्यस्तता के कारण दुमका के जिलाधिकारी समय नहीं दें.
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कई नेता दोनों राज्यों के बीच भेदभाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. बंगाल सरकार कभी भी विवाद नहीं चाहती है और ना ही इस विवाद के लिए बंगाल सरकार जिम्मेदार है बल्कि इस विवाद के लिए झारखंड सरकार व भाजपा दल के कई नेतागण जिम्मेदार हैं, जो राज्यों के बीच भेदभाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ऐसा कुछ भी कदम नहीं उठायेगी, ताकि जिससे किसी का अहित हो.
उन्होंने कहा कि 1950 से पश्चिम बंगाल सरकार इस डैम (बांध) को संभालने का दायित्व लिया है. लेकिन ऐसा अचानक क्या हुआ कि राज्यों के बीच भेदभाव की कोशिश की जा रही है. ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है, जो कि दुखजनक है.
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