बंद कमरे में जंग खा रहे लाखों के स्वास्थ्य उपकरण
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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परेशानी. अनुमंडलीय अस्पताल का हाल, चिकित्सक वेतन ले रहे मधुपुर से व ड्यूटी निभा रहे कहीं और मधुपुर : अनुमंडलीय अस्पताल, मधुपुर में संसाधन व सुविधा पर सरकार प्रत्येक वर्ष करोड़ों खर्च कर रही है,लेकिन इसका समुचित लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. अस्पताल में चिकित्सकों की कमी तो है ही, यहां लाखाें […]
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परेशानी. अनुमंडलीय अस्पताल का हाल, चिकित्सक वेतन ले रहे मधुपुर से व ड्यूटी निभा रहे कहीं और
मधुपुर : अनुमंडलीय अस्पताल, मधुपुर में संसाधन व सुविधा पर सरकार प्रत्येक वर्ष करोड़ों खर्च कर रही है,लेकिन इसका समुचित लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. अस्पताल में चिकित्सकों की कमी तो है ही, यहां लाखाें के उपकरण जंग खा रहे हैं. चिकित्सकों के वेतन पर ही प्रत्येक माह लाखों खर्च होता है. अस्पताल में 13 चिकित्सक सरकार ने पदस्थापित किये लेकिन चार चिकित्सक ही अस्पताल में कार्यरत हैं. नौ चिकित्सक अलग अलग अस्पतालों में लंबे समय से प्रतिनियोजित हैं. इन सभी चिकित्सकों को वेतन तो मधुपुर अस्पताल से मिल रहा है, पर इलाज कहीं और कर रहे हैं.
मरीजों को हो रही परेशानी
नहीं है शिशु व महिला चिकित्सक
अस्पताल में शिशु व महिला रोड विशेषज्ञ नहीं है. महिला रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण प्रसव के दौरान जरूरत पड़ने पर सिजेरियन ऑपरेशन दो साल से बंद है. महिलाओं को इलाज के लिए दूसरे निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है. शिशु कुपोषण केंद्र भी एएनएम के भरोसे चल रहा है. एक अप्रैल से 30 जुलाई तक 25 कुपोषित बच्चे एमटीसी केंद्र में भर्ती हुए.
पांच साल बाद भी चालू नहीं हो सका ब्लड बैंक, अल्ट्रासाउंड का भी नहीं मिला फायदा
अस्पताल में ब्लड बैंक 2012-13 में बनकर तैयार हो गया था. इसके निर्माण व फ्रिजर, उपकरण आदि मशीन में लाखों खर्च किये गये. लेकिन आज तक ब्लड बैंक चालू नहीं हो पाया है. ब्लड बैंक प्रभारी चिकित्सक व तकनीशियन भी नहीं हैं. लाखों की लागत से खरीदे गये अल्ट्रासाउंड मशीन भी पांच साल से जंग खा रही है. अस्पताल में अभी प्रत्येक दिन औसतन 160 से 170 ओपीडी में आ रहे है और चिकित्सक की कमी के कारण घंटो बैठने के कारण उनका इलाज नहीं हो पाता है. बताया जाता है कि 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक ओपीडी में 16 हजार 489 रोगी का इलाज हुआ. वहीं 1221 गर्भवती का एचआईवी जांच, 1306 महिलाओ का प्रसव एएनएम के भरोसे हुआ. हालांकि अस्पताल में सरकार की ओर से सभी जीवन रक्षक दवा और उपकरण उपलब्ध कराया गया है. लेकिन इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.
कहते हैं उपाधीक्षक
अस्पताल में चिकित्सक की काफी कमी है. महिला व शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है. वरीय अधिकारियों को इससे अवगत कराया गया है.
डॉ सुनील मरांडी, अस्पताल उपाधीक्षक
कहते हैं मंत्री
बड़ी संख्या में चिकित्सकों का प्रतिनियोजन गंभीर मामला है. इसको लेकर वह सोमवार को रांची में स्वास्थ्य सचिव से मिल रहे है. चिकित्सकों को अपने मूल जगह पर लौटना होगा.
राज पलिवार,श्रम मंत्री
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