स्टेशन मास्टर के चैंबर में नजरबंद फर्स्ट-एड बॉक्स
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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बदहाली . संताल के स्टेशनों पर नहीं रहती प्राथमिक उपचार की सुविधा देवघर : संताल परगना के स्टेशनों से आप यात्रा करते हैं तो आपको ट्रेन में अपना फर्स्ट एड बॉक्स साथ रखना होगा. क्योंकि यदि ट्रेन में आंशिक घायल हुए तो आपको संताल के किसी भी स्टेशन पर फर्स्ट एड की सुविधा तुरंत नहीं […]
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बदहाली . संताल के स्टेशनों पर नहीं रहती प्राथमिक उपचार की सुविधा
देवघर : संताल परगना के स्टेशनों से आप यात्रा करते हैं तो आपको ट्रेन में अपना फर्स्ट एड बॉक्स साथ रखना होगा. क्योंकि यदि ट्रेन में आंशिक घायल हुए तो आपको संताल के किसी भी स्टेशन पर फर्स्ट एड की सुविधा तुरंत नहीं मिल पायेगी. संताल के सभी स्टेशनों पर फर्स्ट एड बॉक्स यात्रियों की आंख से ओझल हैं, खोजने से भी नहीं मिलेंगे. दरअसल संताल परगना या झारखंड के जितने भी स्टेशन हैं वहां फर्स्ट एड बॉक्स स्टेशन मास्टर या सहायक स्टेशन मास्टर के चैंबर में नजरबंद रहता है. किसी भी स्टेशन पर ये इंगित नहीं है कि फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा स्टेशन पर कहां मिलेगी.
जसीडीह स्टेशन से सावन माह में 9.54 करोड़ की आय : संताल परगना में अधिक आय देने वाला स्टेशन जसीडीह व पाकुड़ जंक्शन हैं. क्योंकि देवघर एक ऐसी जगह है जहां एक माह में 36 लाख से अधिक अतिरिक्त श्रद्धालु आते हैं. वहीं पाकुड़ स्टेशन पर माल ढुलाई में अधिक आमदनी होती है. जामताड़ा स्टेशन भी अधिक आय देने वाला स्टेशन है. लेकिन अधिक आय देने वाले स्टेशन भी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित हैं तो अन्य स्टेशनों की तो बात ही अलग है.
न प्राथमिक उपचार और न ही चिकित्सक की व्यवस्था : संताल परगना के लगभग एक दर्जन स्टेशनों पर कहीं भी न प्राथमिक उपचार की सुविधा है और न ही रेलवे ने चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति की है. मधुपुर स्टेशन के बाहर रेलवे का चिकित्सालय है. लेकिन यात्रियों को बिरले ही वहां उपचार का मौका मिल पाता है. स्टेशन पर आंशिक रूप से घायल को बाहर के क्लीनिक या दवा दुकान का ही सहारा लेना पड़ता है.
संताल में हैं ये स्टेशन
जसीडीह, बैद्यनाथधाम, मधुपुर, देवघर, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, साहेबगंज, बरहड़वा सहित सभी स्टेशनों पर नहीं है फर्स्ट-एड का इंतजाम
भटकते हैं आंशिक घायल रेल यात्री
स्टेशन के बाहर क्लीनिक ही सहारा
संताल परगना के सभी स्टेशनों का यही हाल
जसीडीह, मधुपुर व पाकुड़ स्टेशन देते हैं करोड़ों की आय
केस स्टडी-1 : जसीडीह जंक्शन
पहले डॉक्टर आते थे, अब नहीं अाते
जसीडीह रेलवे स्टेशन पर यात्रियों में प्राथमिक उपचार की सुविधा सब स्टेशन प्रबंधक के कार्यालय में होती है. लेकिन यात्रियों को इसकी जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें यह सुविधा नहीं मिल पाती है. जिस कारण यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है. जानकारी के अनुसार उस फर्स्ट एड बॉक्स में गिनी-चुनी दवाएं उपलब्ध करायी जाती हैं, जो पर्याप्त नहीं माना जा सकता. रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार मधुपुर रेल अस्पताल से पूर्व में सप्ताह में रेलवे डॉक्टर आते थे लेकिन इन दिनों नहीं आ रहे हैं. स्टेशन पर किसी यात्री के साथ कोई छोटी-बड़ी घटना हो जाने के बाद यात्री स्टेशन प्रबंधक को यदि जानकारी देते हैं तो प्रबंधक अपने कार्यालय में रखे फर्स्ट एड से उसका उपचार करते हैं.
केस स्टडी-2 : पाकुड़ व साहेबगंज जंक्शन
उपचार के लिए एएसएम को खोजना होगा
पाकुड़ और साहेबगंज स्टेशन पर कहीं भी प्राथमिक उपचार की सुविधा नहीं है. एएसएम के चैंबर में फर्स्ट एड बॉक्स रखा रहता है. आंशिक घायल होने पर यात्री को एएसएम चैंबर जाकर ही उपचार कराना होता है. लेकिन स्टेशन पर कहीं भी इंगित नहीं है कि फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा कहां है. ज्यादा घायल होने पर पास के सदर अस्पताल भेज दिया जाता है.
केस स्टडी-3 : दुमका जंक्शन
सूचना पट के अभाव में नहीं मिलती फर्स्ट एड की जानकारी
दुमका रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को प्राथमिक उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है. ऐसा नहीं है कि स्टेशन पर फर्स्ट-एड बॉक्स नहीं है. लेकिन सूचना पट पर इंगित नहीं है कि कहां मिलेगी प्राथमिक उपचार की सुविधा. काफी पूछताछ के बाद पता चला कि स्टेशन मास्टर के कक्ष में ही फर्स्ट-एड-बॉक्स रखा रहता है. कक्ष में उपस्थित कर्मचारियों ने बताया कि प्राथमिक उपचार का सामान उपलब्ध है. जरूरत पड़ने पर सुविधा दी जाती है.
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