चतरा में वैज्ञानिक विधि से खेती कर सिमरिया के किसान बने आत्मनिर्भर

Updated at : 30 Oct 2023 1:59 PM (IST)
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चतरा में वैज्ञानिक विधि से खेती कर सिमरिया के किसान बने आत्मनिर्भर

मोती दांगी 20 एकड़ में साग-सब्जी उगाकर हर वर्ष सात लाख की आमदनी करते हैं. गरीबी के कारण कक्षा छह तक ही पढ़ाई कर पाया. इसके बाद पिता के साथ खेती करना शुरू किया.

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धर्मेंद्र कुमार, सिमरिया

प्रखंड के कई किसान खेतीबारी कर अपनी किस्मत बदले हैं. प्रखंड के किसानो के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं. तरह-तरह के साग-सब्जी उगाकर हर वर्ष अच्छी आमदनी कर रहे हैं. दूसरे के खेतो में काम करने वाले किसान आर्थिक रूप से मजबूत होकर कई लोगों को रोजगार दे रहे हैं. साथ ही खेती करने का गुर सिखा रहे हैं. बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं. वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए कई तरह के उपकरण की खरीदारी कर रहे हैं. सालोंभर खेती कर घर परिवार चला रहे हैं. बच्चो को उच्च शिक्षा दे रहे हैं. पक्का मकान बनाकर आवास का सपना पूरा किया हैं.

इन फसलों की कर रहे हैं खेती

किसान टमाटर, धनिया, पत्ता गोभी, फूलगोभी, बंधा गोभी, खीरा, ककड़ी, मूली, गाजर, मिर्चा, प्याज, लहसुन, बैंगन, भंटा, फ्रेंचबीन, झींगी, परोर, स्ट्रॉबेरी, शिमला मिर्च आदि फसल की खेती ड्रिप इरिगेशन के माध्यम से कर रहे है.

प्रखंड के इचाकखुर्द गांव के मोती दांगी, राजेंद्र दांगी , गणेश दांगी, डाड़ी गांव के गोपाल महतो, आमगांवा के विरेंद्र साहु, तलसा गांव के भुनेश्वर इन दिनो किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं. मोती दांगी 20 एकड़ में साग-सब्जी उगाकर हर वर्ष सात लाख की आमदनी करते हैं. गरीबी के कारण कक्षा छह तक ही पढ़ाई कर पाया. इसके बाद पिता के साथ खेती करना शुरू किया. खेती कर अपने दो भाईयों को सरकारी सेवक बनाया. राजेंद्र दांगी दस एकड़ में खेती कर हर वर्ष पांच से छह लाख रुपये की आमदनी करते हैं. खेती कर अपने भाई को पढ़ाया और भाई व देवरानी को सरकारी शिक्षक बनाया. बच्चों को उच्च शिक्षा दे रहे हैं. गणेश दांगी 10 साल से पांच एकड़ में खेती करते आ रहे हैं.

खेती के साथ-साथ बीएड तक की पढ़ाई की हैं. भाई व बच्चो को उच्च शिक्षा दिला रहे हैं. खेती के लिए ट्रैक्टर समेत अन्य उपकरण की खरीदारी किया हैं. हर वर्ष पांच लाख रूपये की आमदनी करता हैं. गोपाल महतो दस एकड़ में सालोभर खेती कर हर वर्ष तीन से चार लाख रूपये की आदमनी करते हैं. मेहनत के बल पर अपनी पहचान बनायी हैं. विरेंद्र साहू 20 वर्षो से खेती करते आ रहे हैं. पांच एकड़ में खेती कर आर्थिक रूप से मजबूत हुआ हैं. अपने पिता से खेती करने का गुर सीखा था. वैज्ञानिक पद्धति से खेती कर अच्छी आमदनी कर रहा हैं. दिल्ली, छत्तीसगढ़, बिरसा यूनवर्सिटी से खेती करने का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं. उनका नाम एक प्रशिक्षित किसान के रूप में आता है. हर वर्ष खेती के माध्यम से पांच लाख रुपये की आमदनी करते हैं. भुनेश्वर महतो पांच एकड़ में खेती कर हर वर्ष तीन लाख की रुपये की आमदनी करते हैं. बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के साथ-साथ परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं. ड्रिप इरिगेशन से खेती करते हैं.

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