Chaibasa News : ‘कुड़मी को एसटी में शामिल किया, तो मिट जायेगी आदिवासियों की पहचान’
Published by : ATUL PATHAK Updated At : 11 Sep 2025 11:19 PM
कोल्हान आदिवासी एकता मंच के बैनर तले बुद्धिजीवियों ने की बैठक, कहा
तांतनगर
. चाईबासा के टाटा कालेज स्थित राजू ढाबा में गुरुवार को कोल्हान आदिवासी एकता मंच के बैनर तले बुद्धिजीवियों की बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता बिहार विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ चाम्पिया ने की. यहां कुड़मी(महतो) को आदिवासियों की सूची में शामिल होने से आदिवासी समाज को होने वाले नुकसान पर चर्चा हुई. बुद्धिजीवियों ने एक स्वर में कुड़मी( महतो) को आदिवासी सूची में शामिल करने का कड़ा विरोध किया. बुद्धिजीवियों ने कहा कि कुड़मी (महतो) कभी जनजाति सूची में थे. न अभी हैं और न कभी रहेंगे. सिर्फ आदिवासियों के जल, जंगल व जमीन पर गिद्ध दृष्टि लगाये हुए हैं. सभी ने अपनी अपनी राय भी दी.सांसद व विधायकों की चुप्पी चिंता का विषय:
बैठक में कहा गया कि उक्त ज्वलंत मुद्दे पर पश्चिमी सिंहभूम जिला के सांसद व पांच विधायक मौन धारण किये हुए हैं. यह आदिवासी समाज के लिए चिंता का विषय है. आरक्षित सीटों से आदिवासी मुद्दों पर सदन में बात रखने के लिए उन्हें भेजा गया है. इससे साफ जाहिर है कि सांसद व विधायक कुड़मी (महतो) को आदिवासी सूची में शामिल करने का मौन समर्थन करते हैं.…तो जनप्रतिनिधियों का पुतला दहन किया जायेगा :
बैठक की अध्यक्षता कर रहे देवेंद्र नाथ चम्पिया ने कहा कि कुड़मी महतो आदिवासी सूची में शामिल होने से आदिवासियों का सामाजिक अस्तित्व, अस्मिता व पहचान मिट जायेगा. उन्होंने कहा कि इस मामले लेकर सड़क से सदन तक लड़ाई होगी. सांसद व विधायक आदिवासी समाज की आवाज नहीं बनेंगे, तो घेराव किया जायेगा. जरूरत पड़ी तो जनप्रतिनिधियों का पुतला दहन भी किया जायेगा. आदिवासी भोले-भाले ईमानदार हैं.बताया गया कि डुमरी विधायक जयराम महतो अपने समाज को आगे बढ़ाने के लिए एंड़ी चोटी एक किये हुए हैं. वहीं हमारे आदिवासी समाज से आरक्षित सीटों से जीत कर गये सांसद- विधायक मौन धारण किये हैं. इस मुद्दे को लेकर अगली बैठक 16 सितंबर को कला संस्कृति भवन हरिगुटू में आहूत की गयी. इसमें मुख्य रूप से आदिवासी समाज जैसे हो, संताल, उरांव, आदि लोग व समाज के बुद्धिजीवी लोग शामिल होंगे. बैठक में चंद्र मोहन बिरुवा, बमिया बारी, यदुनाथ तियू, रामाय पुरती, मोरारी अल्डा, कुसुम केराई, महती पुरती, बीरसिंह बुड़ीउली, सनातन बिरुवा, बासुदेव सिंकू, प्रताप बिरुवा आदि शामिल थे.
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