Chaibasa News : बिजली दर बढ़ोतरी का विरोध, आयोग बोला- सबके हित का ख्याल रखेंगे

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 19 Feb 2026 11:17 PM

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गलत बिल और सुधार नहीं होने पर आयोग ने जीएम को व्यक्तिगत निगरानी के निर्देश दिये

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चाईबासा. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से गुरुवार को पिल्लई हॉल में आयोजित जनसुनवाई हंगामेदार रही. आयोग के अध्यक्ष सह सेवानिवृत्त न्यायाधीश नवनीत कुमार ने अध्यक्षता की. जन सुनवाई में शहर के घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर बड़े उद्योगपतियों ने शिरकत की. सभी ने एक सुर में झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) से प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी का पुरजोर विरोध किया. जनसुनवाई के अंत में आयोग ने आश्वासन दिया कि उपभोक्ताओं के सुझावों और आपत्तियों पर गहन विचार किया जायेगा. टैरिफ निर्धारण में आम जनता और उद्योगों के हितों का ध्यान रखा जायेगा. मौके पर मोहित अग्रवाल, चाईबासा चेंबर के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे.

गलत बिलिंग और विभागीय लापरवाही पर फूटा गुस्सा

जन सुनवाई में उपभोक्ताओं ने बिजली बिल में गड़बड़ी और सुधार नहीं होने की शिकायतों की झड़ी लगा दी. कृष्णा प्रसाद साहू ने बताया कि उनके बिल भुगतान का विवाद लंबे समय से लंबित है. बार-बार शिकायत के बावजूद विभाग इसे एडजस्ट (समायोजित) नहीं कर रहा है. इसी तरह मो. खालिक ने बिजली बिल की अधिकता और सुधार में होने वाली देरी पर नाराजगी जतायी.

टैरिफ को घटाकर पांच रुपये यूनिट करने का सुझाव:

जनसुनवाई में हेमंत केसरी ने टैरिफ को घटाकर 5 प्रति यूनिट करने का सुझाव दिया. वहीं, दुर्गेश खत्री ने मांग की है कि पश्चिम बंगाल की तरह उद्योगों को रियायती दर पर बिजली दी जाये, ताकि वे बाजार में टिक सकें.

पीएम सूर्य घर योजना और ग्रामीण बिजली:

चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय चौबे ने पीएम सूर्य घर योजना की सुस्त रफ्तार पर सवाल उठाये. आयोग ने स्पष्ट किया कि पोर्टल के माध्यम से आवेदन जारी है. इस योजना की फ्रंट कॉस्ट (शुरुआती लागत) अधिक होने के कारण ग्रामीण उपभोक्ता इसमें अधिक रुचि नहीं ले पा रहे हैं. वर्तमान में डोमेस्टिक उपभोक्ताओं को मिल रही 200 यूनिट फ्री बिजली पर भी चर्चा हुई.

विभाग ने तकनीकी चुनौतियां भी रखीं

जेबीवीएनएल की ओर से दिये गये प्रेजेंटेशन में बताया गया कि कंपनी तकनीकी और कॉमर्शियल नुकसान को अगले 5 वर्षों में 14% तक कम करने का लक्ष्य रख रही है. अधिकारियों ने बताया कि 33 केवी लाइन पर केवल 2 से 3% बिजली का नुकसान होता है, लेकिन ग्रामीण और घरेलू क्षेत्रों में विस्तार के कारण यह लॉस बढ़ जाता है. जुलूस या बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से जिला प्रशासन के सहयोग से ही बिजली काटी जाती है.

उपभोक्ता सीजीआरएफ या रांची में अपील कर सकते हैं : अध्यक्ष

आयोग के अध्यक्ष नवनीत कुमार ने जीएम को इन शिकायतों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने को कहा. उन्होंने उपभोक्ताओं को सलाह दी कि यदि वे संतुष्ट नहीं हैं, तो जमशेदपुर स्थित उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (सीजीआरएफ) या रांची मुख्यालय के कंप्लेंट सेल में अपील कर सकते हैं.

बंगाल की तरह सस्ती बिजली मिले, वरना राइस मिल पर संकट : वासुदेव

चाकुलिया के राइस मिल मालिक वासुदेव रुंगटा ने चेतावनी दी कि यदि झारखंड में बिजली दरें बढ़ीं, तो यहां का चावल उद्योग पड़ोसी राज्यों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पायेगा. उन्होंने कहा कि महंगी बिजली से राज्य की तरक्की बाधित होगी. नयी पीढ़ी उद्योगों में रुचि नहीं लेगी.

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