Jharkhand News : चाईबासा में एक मार्च से नहीं खुलेंगे पार्क, जानें क्या है कारण

Jharkhand Park Reopen, Chaibasa News : चाईबासा क्षेत्र में 5 पार्क है. काेरोना वायरस संक्रमण के कारण पिछले कई दिनों से पार्क बंद है. पिछले दिनों झारखंड सरकार ने पार्क समेत शिक्षण संस्थान और सरकारी कार्यालयों में शत- प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गयी है. वहीं, चाईबासा क्षेत्र में पार्क एक मार्च से नहीं खुलेंगे. पार्क नहीं खुलने से लोगों में मायूसी छा गयी है.
Jharkhand Park Reopen, Chaibasa News, चाईबासा (सुनील कुमार सिन्हा) : झारखंड की हेमंत सरकार द्वारा एक मार्च, 2021 से पार्क, शिक्षण संस्थान, सिनेमा हॉल, सरकारी कार्यालयों में शत- प्रतिशत उपस्थिति समेत अन्य संस्थानों को खोलने की अनुमति दी है. इस दौरान कई शर्तें भी रखी गयी है जिसे पूरा करना अनिवार्य है. वहीं, चाईबासा क्षेत्र के पार्क एक मार्च से नहीं खुलेंगे. नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के मुताबिक, अभी तक राज्य सरकार की ओर से पार्क खोलने संबंधी कोई आदेश नहीं आया है. इस कारण एक मार्च से चाईबासा क्षेत्र के पार्क खुलने की उम्मीद नहीं है.
चाईबासा क्षेत्र में 5 पार्क है. काेरोना वायरस संक्रमण के कारण पिछले कई दिनों से पार्क बंद है. पिछले दिनों झारखंड सरकार ने पार्क समेत शिक्षण संस्थान और सरकारी कार्यालयों में शत- प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गयी है. वहीं, चाईबासा क्षेत्र में पार्क एक मार्च से नहीं खुलेंगे. पार्क नहीं खुलने से लोगों में मायूसी छा गयी है.
पिछले करीब एक साल से बंद पार्कों में जहां बड़े- बड़े घास उग आये हैं, वहीं पेड़ से गिरने वाले सूख पत्ते पार्कों की खूबसूरती को ग्रहण लगा रहे हैं. चाईबासा में मनोरंजन के साधन के नाम पर न तो यहां एक भी सिनेमा हॉल है और ना ही कोई बार. लोगों के मनोरंजन के साधन के नाम पर शहर में सरकारी स्तर पर 3 और निजी सेक्टर के एक पार्क हैं. इनमें जिला प्रशासन द्वारा संचालित जुबली तालाब पार्क, नगर परिषद द्वारा संचालित दादा-दादी और बच्चों का पार्क के अलावा टीपी साव के देख-रेख वाला शहीद पार्क है.
Also Read: Jharkhand News : मागे पर्व मनाकर लौट रहे थे घर, बाइक-साइकिल की टक्कर में छात्र की मौत, चार घायल, मैट्रिक की परीक्षा देने वाला था मृतकपूर्व में इन पार्कों में रोजाना करीब 800 से 900 लोग घूमने आते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण काल में 22 मार्च 2020 को घोषित लॉकडाउन के बाद से बंद पड़े हैं. हालांकि, निजी सेक्टर का पार्क होने के कारण रूंगटा गार्डेन को पूर्व की तरह ही व्यवस्थित रखा गया है, लेकिन सरकार के अधीन वाले पार्कों की न तो मुकम्मल साफ- सफाई हो पा रही है और ना ही दादा- दादी की लाठी की ठक-ठक की आवाज व बच्चों की किलकारियां सुनायी पड़ रही है. ऐसे में एक मात्र मनोरंजन के साधन का पार्क विरान पड़ा है. वहीं पार्क को खोलने के लिए राज्य सरकार द्वारा संबंधित विभाग को निर्देश नहीं मिलने के कारण यहां घुमने के लिये आने वालों की उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है.
शहर के बीचो- बीच करीब 3 एकड़ में फैला जुबली तालाब पार्क में सबसे ज्यादा रोजाना 300 से 400 लोग घूमने आते थे. इनमें 80 फीसदी शहर के लोग शामिल हैं. शेष 20 फीसदी लोग ग्रामीण क्षेत्र से यहां पहुंचते थे. वहीं, छुट्टी के दिन सरकारी कर्मियों के परिवार भी यहां घूमने और मनोहर वादियों को निहारने के लिए आते थे. इस पार्क में तैरते हंसों के जोड़े, पानी के रंग- बिरंगे फुहारें, झूले, स्टैच्यू आदि को देखकर बच्चे रोमांचित और हर्षित हुए बिना नहीं रह पाते थे.

वैसे तो अन्य पार्कों की तरह ही सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन और गांधी मैदान के पास शहर का सबसे पुराना शहीद पार्क भी विरान पड़ा है, लेकिन इस पार्क के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उद्योगपति टीपी साव ने संभाल रखी है. यहां सुरक्षा गार्ड तैनात किये गये हैं. वहीं, इस पार्क की रोजाना साफ- सफाई की जाती है. पार्क के सुरक्षा गार्ड जयराम बोदरा बताते हैं कि उन्हें हर माह तनख्वाह के रूप में 6 हजार मिलते हैं. मजदूरों के मागे पर्व में चले जाने के कारण 2 दिनों से साफ- सफाई का काम नहीं हो सका है. यहां पूर्व में रोजाना करीब 200 से 250 लोग घूमने आते थे.
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गांधी टोला मार्ग पर नगर परिषद द्वारा बनाये गये दादा- दादी पार्क में रोजाना सुबह- शाम 150 से 200 बुजुर्ग पहुंचते थे. यहां पहुंचते ही पार्क में घूमकर अपना मन बहला लेते थे. थकान महसूस होने पर वे यहां बैठकर आराम भी कर लेते थे. बुजुर्गों के यहां पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो जाता था. कोरोना संक्रमण काल में लॉकडाउन लागू होने के बाद से यह पार्क सूना है. यहां लगे करीब 200 फाउंडेशन लाइट में अब 15 लाइटें ही जल रही है.
गांधी टोला मार्ग पर ही दादा- दादी पार्क के पास नन्हें- मुन्ने बच्चों का भी पार्क है. पूर्व में यहां रोजाना 100 से 150 बच्चे घूमने और झूला झूलने के लिए आते थे. बच्चों से यह पार्क गुंजायमान होता था, लेकिन लॉकडाउन के बाद से नगर परिषद द्वारा संचालित यह पार्क भी विरान पड़ा है. अब इस पार्क बच्चों की किलकारियां तो दूर, पंछियों के चहचहाने की आवाज भी सुनायी नहीं देती है.
इस संबंध में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अभय कुमार झा ने कहा कि पार्क खोलने के लिए राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आदेश नहीं आया है. बिना आदेश के पार्क नहीं खोले जा सकते हैं. यदि आदेश मिलता है, तो पार्क खोलने की अनुमति दे दी जायेगी.
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