चाईबासा. ओडिशा सीमा से सटे झारखंड के ग्रामीण क्षेत्र में आतंक का पर्याय दंतैल हाथी करीब छह दिनों बाद एक फिर पश्चिमी सिंहभूम के मझगांव प्रखंड में देखा गया है. मझगांव प्रखंड के हल्दिया स्थित बन्दासाई और तिलोकुटी क्षेत्र में दंतैल हाथी को देखा गया. इससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है. स्थानीय लोगों ने तुरंत वन विभाग के कर्मियों को सूचना दी. वन विभाग की टीम ने आग जलाकर और पटाखे के सहारे हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने में जुट गया. ग्रामीणों का कहना है कि संयोग था कि हम रतजगा कर रहे हैं. इससे बड़ी घटना टल गयी. घटना से ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गयी है. ज्ञात हो कि उक्त हाथी ने 22 लोगों की जान ली है. इसके बाद हाथी को खदेड़ने के लिए वन विभाग की टीम युद्ध स्तर पर जुटी है. फिलहाल यह हाथी झारखंड-ओडिशा बॉर्डर पर डेरा जमाये हुये है.
चार राज्यों की टीमें चला रही साझा अभियान:
हाथी के बढ़ते खतरे को देखते हुए वर्तमान में झारखंड और ओडिशा वन विभाग की टीमें मिलकर साझा अभियान चला रही हैं. ओडिशा, झारखंड के साथ-साथ असम और गुजरात से आए वन्यजीव विशेषज्ञों की टीमें हाथी को ट्रैंकुलाइज (बेहोश) करने की योजना पर काम कर रही हैं. हाथी का सटीक लोकेशन जानने के लिए ड्रोन और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम का सहारा लिया जा रहा है.वन विभाग की चिंता बढ़ी:
मझगांव क्षेत्र में हाथी के पहुंचने से अफरा-तफरी मच गयी है. उल्लेखनीय है कि यह दंतैल हाथी आखिरी बार खड़पोस पंचायत के बेनीसागर में देखा गया था. इसके बाद वह आउट ऑफ ट्रैक हो गया था. कुछ समय के लिए ओडिशा सीमा में प्रवेश की खबर थी. लोकेशन स्पष्ट नहीं हो पा रहा था. अब दोबारा मझगांव इलाके में हाथी की सक्रियता ने वन विभाग की चिंता बढ़ गयी है.वन विभाग ने जारी की चेतावनी:
वन विभाग ने झारखंड-ओडिशा सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है. विभाग ने कहा कि रात के समय अकेले घर से बाहर न निकलें, जंगल की ओर जाने से पूरी तरह परहेज करें, हाथी दिखने पर खुद कोई कार्रवाई करने के बजाय विभाग को सूचित करें, जंगल की ओर जाने से पूरी तरह परहेज करें और हाथी दिखने पर खुद कोई कार्रवाई करने के बजाय विभाग को सूचित करें.नोवामुंडी के कुटिंगता में पहुंचे हाथी केले के पौधों और टमाटर को रौंदा
नोवामुंड़ी. नोवामुंडी की कोटगढ़ पंचायत अंतर्गत कुमीरता गांव से होकर बुधवार की रात करीब 12 बजे दो हाथी कुटिंगता बीएसएनएल टावर के पीछे मुंडा साईं टोला पहुंचे. हाथियों ने गांव में हरि चरण तिरिया के बागान में लगे केले के पौधों को नुकसान पहुंचाया. वहीं टमाटर खा गये. मौके पर हाथियों का लीद मिला. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल पहुंची. दोनों हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ा गया. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल है. इस संबंध में फॉरेस्टर अमित महतो ने बताया कि हाथियों ने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है. किसी घर को भी क्षति नहीं पहुंचायी है. दोनों हाथी अलग-थलग केवल भोजन की तलाश में गांव की ओर आये थे. जिन किसानों की फसल या सब्जियों को नुकसान हुआ है, उनकी भरपाई वन विभाग करेगा. इसके लिए प्रभावित किसानों को आवेदन पत्र उपलब्ध कराये गये हैं. फॉरेस्टर ने बताया कि दिन के 4 बजे दोनों हाथियों को दिरीबुरु जंगल क्षेत्र में ट्रेस किया गया. ग्रामीणों ने उन्हें देखा. कुटिंगता मुंडा साई टोला के छोटे-छोटे बच्चों ने रात में हाथियों को देखा, जिससे वे डरकर अपने घरों में छिप गये. बच्चों ने बताया कि हाथी बागान में घुसकर केले के पौधों को उखाड़ रहे थे. वन विभाग ने सभी से अपील की है कि हाथियों को न छेड़ें, उनके पीछे न जाएं, रात में घर के बाहर न सोएं और हाथी दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

