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कोल इंडिया: लीज पर क्वार्टर दिये जाने को लेकर सब कमेटी की बैठक का है इंतजार

Updated at : 17 Jun 2024 11:25 PM (IST)
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कोल इंडिया: लीज पर क्वार्टर दिये जाने को लेकर सब कमेटी की बैठक का है इंतजार

कोल इंडिया: लीज पर क्वार्टर दिये जाने को लेकर सब कमेटी की बैठक का है इंतजार

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राकेश वर्मा, बेरमो : रिटायर्ड कोलकर्मियों को लीज पर क्वार्टर दिये जाने को लेकर कुछ माह पूर्व जेबीसीसीआइ मानकीकरण कमेटी की बैठक में सब कमेटी का गठन किया गया था. इसमें कोल इंडिया के अधिकारियों के अलावा मान्यता प्राप्त मजदूर संगठनों के नेताओं को शामिल किया गया था. इस कमेटी की पहली बैठक लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद बीसीसीएल के धनबाद में हुई थी. लेकिन आचार संहिता के कारण इस बैठक में किसी तरह का फैसला नहीं लिया जा सका. अब चुनाव संपन्न होने के बाद रिटायर्ड कोलकर्मी बेसब्री से सब कमेटी की बैठक का इंतजार कर रहे हैं, ताकि कोई निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके. एटक नेता व जेबीसीसीआइ सदस्य लखनलाल महतो कहते हैं सब कमेटी की बैठक में इस बात पर चर्चा होनी कि क्वार्टर किन शर्तों पर लीज पर देना है. इसका रिकोमडेशन कर जेबीसीसीआइ मानकीकरण की बैठक में सबमिट करना है, ताकि कोल इंडिया इस पर कोई ठोस फैसला ले सके.

नवंबर 2021 में जारी किया गया था सर्कुलर :

मालूम हो कि नवंबर 2021 में कोल इंडिया के तत्कालीन निदेशक कार्मिक ने कोल इंडिया की सभी अनुषांगिक इकाइयों में एक सर्कुलर जारी किया था. इसमें कहा गया था कि रिटायर कर्मी को कंपनी को क्वार्टर हैंड ओवर करने के बाद ही उनकी ग्रेच्युटी राशि का भुगतान किया जायेगा. इसलिए रिटायर्ड कोलकर्मी अगर तीन माह के अंदर क्वार्टर कंपनी को हैंड ओवर नहीं कर रहे हैं तो उनकी ग्रेच्युटी राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है. कोल इंडिया में हजारों ऐसे रिटायर्ड कर्मी हैं. बेरमो के तीन एरिया कथारा, बीएंडके व ढोरी एरिया में लगभग 300 रिटायर्ड सीसीएल कर्मियों का ग्रेच्युटी भुगतान रुका हुआ है. इतना ही नही रिटायर करने वाले कोल कर्मियों से रिटायर के बाद मिलने वाली लीव इनकेसमेंट सहित अन्य मद से रिटायर के बाद से जितने दिन वो क्वार्टर में रह रहे है उसका टाइप क्वार्टर के अनुसार पैनल रैंट भी प्लीमनथ एरिया के हिसाब से काट लिया जा रहा है. छह हजार से लेकर 12 हजार रुपये तक हर माह कोल कर्मी का पैनल रैंट काटा जा रहा है.

जेबीसीसीआइ सदस्यों ने कोल इंडिया चेयरमैन के समक्ष उठाया था मामला :

वेतन समझौता-11 में जेबीसीसीआइ की पहली बैठक में ही जेबीसीसीआइ सदस्यों ने कोल इंडिया चेयरमैन के समक्ष इस मामले को उठाया था. साथ ही वेतन समझौता-11 में रिटायर होने वाले कर्मियों को क्वार्टर को लीज देने की मांग प्रबंधन को दिये गये संयुक्त मांग पत्र में शामिल की गयी थी. जेबीसीसीआइ की पहली बैठक में इस मामले को उठाने के बाद नवंबर 2021 में कोल इंडिया ने इसको लेकर सर्कुलर जारी कर दिया. इसके बाद जेबीसीसीआइ की पांचवी बैठक में पुन: जेबीसीसीआइ सदस्यों ने कोल इंडिया चेयरमैन के समक्ष इस मामले को उठाया तथा कहा कि जब पहली बैठक में इस पर बात हुई थी तो इसके बावजूद कोल इंडिया की ओर से क्वार्टर को लेकर सर्कुलर क्यों जारी किया. इस पर कोल इंडिया चेयरमैन ने जेबीसीसीआइ सदस्यों को आश्वस्त किया था कि इसको लेकर कोई रास्ता निकाला जायेगा. बाद में जेबीसीसीआइ मानकीकरण कमेटी की बैठक में इसको लेकर सब कमेटी का गठन किया गया.

जेसीएसी की बैठक में कमेटी का किया गया था गठन :

चार-पांच साल पहले इस मामले को लेकर सीसीएल में संयुक्त सलाहकार संचालन समिति की बैठक में प्रबंधन के समक्ष पुरजोर रूप से उठाया गया था. इसके बाद प्रबंधन व जेसीएसी सदस्यों को मिला कर एक कमेटी का गठन किया गया था. इसमें कहा गया था कि कमेटी सेल व एचइसी का भ्रमण कर वहां की स्थिति को पटल पर रखेगी. पाया गया कि एचइसी व सेल में लाइसेंस फी के आधार पर रिटायर होने वाले कर्मियों को क्वार्टर दिये जाने का प्रावधान है. बाद में इसे सीसीएल के एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) में शामिल भी किया गया. लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि कमेटी गठन के बाद से आज तक इस कमेटी की एक भी बैठक नहीं हुई.

वर्कर कहते हैं 30-40 साल कंपनी को सेवा देने वाले लोगों का सम्मान नहीं :

कई रिटायर कोल कर्मी कहते है कि 30-40 साल कोयला खदानों में जान जोखिम में डाल कर कार्य करने वालों के साथ प्रबंधन का रवैया सम्मानजनक नहीं है. एक तरफ रिटायर कर्मी की ग्रेच्युटी राशि रोक दी जा रही है. वहीं पावना राशि से क्वार्टर का पैनल रेंट काटा जा रहा है. यह न्यायसंगत नहीं है. जेबीसीसीआइ व जेसीएसी के नेता भी इस गंभीर मुद्दे पर मौन हैं. दूसरी ओर कंपनी के हजारों क्वार्टरों पर अवैध कब्जा है. सेल की तरह कोल इंडिया के क्वार्टरों को भी लीज पर दे देना चाहिए. एक आकलन के अनुसार सीसीएल का मैन पावर वर्तमान में लगभग 32 हजार है. जबकि पूरे कंपनी में टाइप क्वार्टरों की संख्या 45 हजार के करीब है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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