अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन, जिला अध्यक्ष परमेश्वर वर्णवाल ने कहा - 'संस्कृति का मेरुदंड...'

24 | Prabhat Khabar Network
बोकारो में अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में वक्ताओं ने सनातन संस्कृति और गुरु पूर्णिमा के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
बोकारो: अखिल भारतीय साहित्य परिषद की बोकारो जिला इकाई की ओर से रविवार देर शाम काव्य गोष्ठी आयोजित की गयी. साहित्यकारों ने गुरु पूर्णिमा (व्यास जयंती) की प्रासंगिकता व मानव जीवन में इसके महत्व पर चर्चा की. अध्यक्षता जिला अध्यक्ष परमेश्वर वर्णवाल व मंच संचालन दीनानाथ ठाकुर ने किया.
गोष्ठी की शुरुआत गुरु वंदना से हुई. श्री वर्णवाल ने कहा कि वेद व व्यास दोनों एक-दूसरे से सूर्य व उनकी किरणों के समान जुड़े हुए हैं. इसीलिए उन्हें भी व्यास कहा गया है. इनकी जयंती को गुरु पूर्णिमा के रूप में सर्वत्र मनाया जाता है. सनातन संस्कृति के मेरुदंड के रूप में व्यास व उनके वेद अपना प्रभाव बिखेर रहे हैं. सनातन संस्कृति में अनेकता में एकता का भाव वेदों से ही अभिप्रेत है.
जमी कवियों की महफिलगोष्ठी में देशप्रेम, प्रकृति व सामाजिक चेतना से जुड़ी रचनाएं छायी रही. दीनानाथ ठाकुर ने 'करने दो गुणगान वतन का ', डॉ नरेंद्र कुमार राय ने 'सच छुपाया गया था, बताने चले ' व परमेश्वर वर्णवाल ने 'कैसे हैं श्री राम हमारे? ', प्रो परमेश्वर भारती ने लोकगीत 'हमार मनमा भावै... ', सोनी कुमारी ने 'कारगिल दिवस ' शीर्षक पर काव्य पाठ किया. दयानन्द सिंह ने 'महिला चरित्र ', आचार्य सचिन ब्रजनाथ ने 'मैं तेरे शहर से ', अमृता शर्मा ने 'जिससे शुरू उसी से खत्म ', अमूल्य मालव्या ने 'पड़े रिम-झिम रिम-झिम फुहार ', डॉ रंजना श्रीवास्तव ने 'मेरे स्नेहिल बच्चे ', कनक लता राय ने 'जीवन बदल गया है, दुनिया बदल गयी ', सुप्रिया कुमारी 'सरस' ने 'सूर्य बनो ', अनिल कुमार श्रीवास्तव ने 'वंदेमातरम् ', प्रेमलता सिन्हा ने 'गुरु ' व क्रांति श्रीवास्तव ने 'संवाद ' शीर्षक रचना प्रस्तुत की. धन्यवाद ज्ञापन दयानंद सिंह ने किया. मौके पर जितेंद्र प्रसाद, विकास पांडेय समेत अन्य मौजूद थे.
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