Bokaro News : ललपनिया-चार नंबर मुख्य पथ शाम ढलते ही हो जाता है सुनसान
Updated at : 06 Feb 2026 1:05 AM (IST)
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Bokaro News : क्षेत्र में हाथियों का दहशत व्याप्त
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Bokaro News : प्रतिनिधि, महुआटांड़.
ललपनिया से चार नंबर मुख्य पथ पिछले करीब तीन महीनों से शाम ढलते ही सुनसान होने लगता है. क्षेत्र में हाथियों का दहशत व्याप्त है. बहुत जरूरी होने पर ही लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं. वह भी दोस्तों, रिश्तेदारों से जानकारी लेने के बाद. दरअसल, इसी मुख्य मार्ग के किनारे तिलैया, खखंडा, चोरगांवां के जंगल स्थित हैं. जहां से हाथियों का मूवमेंट शाम ढलते ही शुरू हो जाता है. कई बार राहगीरों का आमना- सामना हाथियों से हो चुका है. वहीं, बीते 18 जनवरी को कंडेर के सिमराबेड़ा में चलती कार से चालक सब्जी विक्रेता को खींच कर हाथियों ने मार डाला था. इस घटना के बाद से लोग और दहशत में हैं.महुआटांड़ क्षेत्र के कानीडीह, कुसुमडीह, होन्हें, तिलैया सहित लुगू के तराई जंगल हैं हाथियों के पसंदीदा बसेरा :
विदित हो कि महुआटांड़ क्षेत्र अंतर्गत सभी 11 पंचायत हाथी प्रभावित हैं. आये दिन किसी न किसी गांव टोलों से हाथियों के हमले और नुकसान की खबरें आती रहती हैं. लेकिन जो सर्वाधिक हाथी प्रभावित हैं, उनमें बड़कीपुन्नू भी शामिल है. बड़कीपुन्नू में दामोदर नदी के किनारे स्थित बोकारो-रामगढ़ सीमा में कानीडीह और कुसुमडीह तथा दूधमटिया जंगल हाथियों का बसेरा बना रहता है. यहीं से हाथी गोमिया के बड़कीपुन्नू और दूसरे गांव टोलों में सक्रिय रहते हैं. वहीं, गोला रेंज को भी टारगेट करते रहते हैं. इसी तरह, कंडेर का होन्हें जंगल भी हाथियों का पसंदीदा बसेरा है. इसके बाद लुगू पहाड़ का तराई जंगल हाथियों के लिए सुरक्षित स्थल है. यहां से हाथी ललपनिय-जगेश्वर बिहार मुख्य सड़क के दोनों ओर स्थित गांवों खखंडा, मुरपा, लावालौंग, चोरगांवां, तिलैया, टीकाहारा आदि में सक्रिय रहते हैं. वहीं, लुगू के तराई तिलैया जंगल को भी हाथी पसंद करते हैं. दरअसल, इन जंगलों में हाथियों को भरपूर मात्रा में बांस और पानी मिल जाता है. वहीं, कई गांव भी बसे हुए हैं. खेतों में धान और बारी में सब्जियों की फसल, महुआ के दिनों में घरों से महुआ की महक और धान कुटाई के बाद अनाजों की खुशबू से हाथी गांवों की ओर से आकर्षित होते हैं. सबसे अधिक नुकसान कच्चे घरों को उठाना पड़ता है. हाथी ऐसे घरों में सीधे उसी दीवार पर हमला कर तोड़ते हैं, जिसके अंदर अनाज, आलू या महुआ रखा होता है.कुजू और पेटरवार की टीमें हाथी झुंड को ट्रैक करने में जुटीं :
बड़कीपुन्नू की घटना के बाद कुजू और पेटरवार से वन विभाग की हाथी भगाओ दल पहुंचा. दोनों ही टीमें हाथियों को ट्रैक कर खदेड़ने का काम करेगी. आपको बता दें कि गुरुवार की रात हाथियों को खदेड़ने में जुटी गोमिया की हाथी भगाओ दल पर हाथियों ने कमलागढ़ा के पास हमला कर दिया था. लेकिन हाथियों से बचाव के अपनी दक्षता के चलते सभी बाल बाल बच गये.बाउंड्री और लोहे का गेट भी किया क्षतिग्रस्त :
करमाली टोला में हाथियों ने घटनास्थल के आसपास दूसरे घरों को भी निशाना बनाया. मृतकों के घरों के अलावे रमेश करमाली के घर का लोहे का गेट क्षतिग्रस्त कर दिया. मनोज करमाली के घर की चहारदीवारी, संजय करमाली के घर की चहारदीवारी को क्षतिग्रस्त किया. संजय करमाली की पत्नी ने कहा कि हम सभी परिवार बाल बाल बच गए. लेकिन वन विभाग हम ग्रामीणों की सुधि ले और हाथियों को इलाके से बाहर खदेड़ कर ग्रामीणों को राहत दिलाये. .प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
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