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आस्था का महापर्व चैती छठ नहाय-खाय के साथ शुरू

Updated at : 13 Apr 2024 1:10 AM (IST)
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आस्था का महापर्व चैती छठ नहाय-खाय के साथ शुरू

आस्था का महापर्व चैती छठ नहाय-खाय के साथ शुरू

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– नेम-निष्ठा के साथ आज बनेगा खरना का प्रसाद

– अस्ताचलगामी सूर्य काे कल अर्घ्य देंगे छठ व्रती

वरीय संवाददाता, बोकारो

‘सोना सट कुनिया हो दीनानाथ…छठी मईया सुन ली पुकार…’ शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुद्धता और आस्था का चार दिवसीय महापर्व चैती छठ शुरू हो गया. व्रतियों के घर छठी मईया के गीत गूंज रहे है. नेम-निष्ठा के साथ शनिवार को खरना का प्रसाद बनेगा. छठ व्रती अस्ताचलगामी सूर्य काे रविवार को अर्घ्य देंगे. सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य के बाद व्रतियों के पारण के साथ महापर्व चैती छठ संपन्न होगा.

चावल, चने की दाल व कद्दू की सब्जी

शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ ही लोक आस्था का चार दिवसीय चैती छठ महापर्व शुरू हो गया. व्रतियों ने स्नान करने के बाद अरवा चावल, चने की दाल व कद्दू की सब्जी बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया. कद्दू-भात महाप्रसाद व्रतियों के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्याें ने भी ग्रहण किया. पर्व को लेकर घरों में छठी मइया के गीत गाये जा रहे हैं. धार्मिक गीतों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है.

36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा : खरना शनिवार को होगा. इसे लोहंडा भी कहते हैं. इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखेंगी. शाम में आम की लकड़ी पर गन्ने के रस में बनी चावल की खीर, दूध, चावल का पीठा व घी चुपड़ी रोटी का प्रसाद बनायेंगी. छठी मइया काे अर्पित करने के बाद व्रती उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगी. खरना का प्रसाद स्वजनाें के साथ अन्य लोगों को दिया जायेगा. खरना के साथ ही व्रतियाें का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा.

घाटों की साफ-सफाई अंतिम चरण में : रविवार की शाम छठ व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगी. सोमवार को सूर्योदय से पहले ही नदी या तालाब के पानी में उतरकर सूर्यदेव से दर्शन के लिये प्रार्थना करेंगी. इसके बाद उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूजा का समापन कर व्रत का पारण किया जायेगा. चैती छठ पूजा को लेकर शहर के छठ तालाबों की साफ-सफाई का कार्य अंतिम चरण में है. कुछ छठ पूजा समितियां भी सक्रिय हैं.

छठ पूजा को लेकर बढ़ी बाजार की रौनक : चैती छठ पूजा को लेकर बाजार में खरीदारी के लिए भीड़ बढ़ गयी है. प्रसाद रखने के लिए बांस से बनी टोकरी, बांस या पीतल के सूप, लोटा, थाली, पीतल के गिलास, चावल, लाल सिंदूर, धूप, दीपक, पानी वाला नारियल, ईख, सेब, संतरा, कागजी नीबू, अदरख, मूली, हल्दी के पौधे, गगरा, गन्ना, नये वस्त्र जैसे साड़ी-कुर्ता पजामा आदि की खरीदारी की जा रही है. पूजन सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ हो रही है.

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