Bokaro News : धधक रहे कसमार-जरीडीह के जंगल

Updated at : 31 Mar 2025 1:01 AM (IST)
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Bokaro News : धधक रहे कसमार-जरीडीह के जंगल

Bokaro News : हर दिन हो रही अगलगी, झुलस कर नष्ट हो रहे लाखों पौधे

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Bokaro News : दीपक सवाल, कसमार. पेटरवार वन पर क्षेत्र अंतर्गत कसमार के जंगलों में आग लगी की घटनाएं लगातार घट रही हैं. पिछले करीब 15 दिनों से प्राय: दिन किसी ने किसी जंगल में आग लग रही है और उससे बड़ी संख्या में पेड़ पौधे जल कर नष्ट हो रहे हैं. अब तक हिसीम, मसरीडीह, चौड़ा, रोरिया, लाहरजारा, भस्की, टेंगीकुदर, जोगीडीह, जोलोटुंगरी, दुर्गापुर, चैनपुर, डुमरकुदर, चोली आदि जंगलों में अगलगी की घटना घटित हो चुकी है. शनिवार को त्रियोनाला के जंगल में भी आग लग गयी और उसका फैलाव तेजी से हुआ. काफी मशक्कत से बुझाया गया, लेकिन रविवार को पुनः अगलगी की घटना हो गयी. रविवार को लीपु व बाधागोड़ा के जंगल भी धधक उठे. आये दिन हो रही अगलगी से वनों को काफी क्षति हो रही है. ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 15 दिनों में अगलगी से लाखों छोटे-बड़े पौधे झुलस कर नष्ट हो चुके हैं.

वन सुरक्षा समिति के कसमार प्रखंड अध्यक्ष गंगाधर महतो ने आरोप लगाया है कि अगलगी की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग ने अभी तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया है. उन्होंने कहा कि जब भी विभागीय कर्मियों को इसकी सूचना दी जाती है, कोई न कोई बहाना बना दिया जाता है. कहा कि आग बुझाने के लिए विभाग के पास मशीन भी उपलब्ध है, लेकिन समितियों को वह भी मुहैया नहीं करायी जाती है. इसके चलते ग्रामीणों को आग बुझाने में काफी दिक्कतें होती है. श्री महतो ने कहा कि इन दिनों हवा तेज से चल रही है. इसके चलते आग काफी तेजी से जंगल में फैल जाती है और उसे बुझाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. विभाग की ओर से कोई प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण भी ग्रामीण निराश हैं.

पहले मिलती थी प्रोत्साहन राशि :

बोकारो के पूर्व डीएफओ एमपी सिंह के कार्यकाल में आग बुझाने के लिए समितियों को प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करायी जाती थी. इसके तहत समितियों के बीच प्रतिस्पर्धा का आयोजन भी किया जाता था. जिन जंगलों में अगलगी की घटनाएं नहीं होती थी, उसकी समितियां को प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया जाता था. इससे ग्रामीणों के बीच अपने जंगल में किसी भी हाल में अगलगी की घटनाओं को रोकने के लिए काफी सजगता रहती थी. ग्रामीण उत्साहपूर्वक इसके लिए काम करते थे, लेकिन बाद के कुछ वर्षों में प्रोत्साहन राशि और इस तरह की प्रतिस्पर्धा बंद कर दिए जाने के कारण अगलगी की घटनाओं को रोकने के प्रति ग्रामीणों में भी दिलचस्पी कम हो गयी. समितियां का मानना है कि विभाग अथवा सरकार को पुनः इस तरह की व्यवस्था करने की जरूरत है.

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