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Bokaro News : शिफ्टिंग व विस्थापन की समस्या के कारण बाधित है कई खदानों का विस्तारीकरण

Updated at : 11 Apr 2025 10:45 PM (IST)
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Bokaro News : शिफ्टिंग व विस्थापन की समस्या के कारण बाधित है कई खदानों का विस्तारीकरण

Bokaro News : बेरमो कोयलांचल अंतर्गत सीसीएल के ढोरी, बीएंडके व कथारा एरिया में फिलहाल 400 मिलियन टन कोयला खनन के लिए खदानों का विस्तारीकरण जरूरी है.

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राकेश वर्मा, बेरमो : बेरमो कोयलांचल अंतर्गत सीसीएल के ढोरी, बीएंडके व कथारा एरिया में फिलहाल 400 मिलियन टन कोयला खनन के लिए खदानों का विस्तारीकरण जरुरी है. लेकिन शिफ्टिंग व विस्थापन समस्या के कारण कई खदानों का विस्तारीकरण बाधित है और कई बंद खदानों को चालू करने में भी सफलता नहीं मिल पा रही है. हालांकि कई प्रोजेक्ट रिपोर्ट को सीसीएल बोर्ड से एप्रुवल मिल गया और कई इंतजार में हैं. कई खदानों की नया पीआर बनाने का कार्य अंतिम चरण में है. कई खदानों का इनवायरमेंट व फोरेस्ट क्लीयरेंस भी लेना है.

ढोरी एरिया की एएओडीसीएम (अमलो परियोजना) का ऑरिजनल पीआर सालाना पांच मिलियन टन का है. यहां 100 मिलियन टन कोल रिजर्व है. इसमें पहले 15 मिलियन टन कोयला निकाला जा चुका है. अमलो माइंस सालाना तीन मिलियन टन का है. इस वर्ष इसे बढ़ा कर 3.6 मिलियन किया गया है. इसके बाद 4.5 मिलियन टन का मेन प्लान कुछ दिनों में सीसीएल बोर्ड से एप्रुव हो जायेगा. इसके बाद इसी इनहासमेंट लिया जायेगा. अमलो में सीसीएल की पहली हाइवाल माइनिंग करने की दिशा में तेज गति से काम चल रहा है. इससे तीन साल में 13 लाख टन कोयला का उत्पादन होगा. पहले साल तीन लाख टन तथा इसके बाद के वर्षों में सालाना पांच-पांच लाख टन उत्पादन होगा. एसडीओसीएम में 35 मिलियन टन का नया प्रोजेक्ट आयेगा, जो करीब 20 साल का होगा. फिलहाल यहां 756 हेक्टेयर की पीआर बन रही है, जो अंतिम चरण में है. इस वर्ष बोर्ड से इसका एप्रुवल मिलने की उम्मीद है. इसमें 46 मिलियन टन वाशरी ग्रेड-3 तथा जी-9 का कोल रिजर्व है. पुरानी तारमी, पुराना कल्याणी एवं तिसरी को मिला कर सालाना 2.7 लाख टन की कल्याणी एक्सपेंशन के नाम से माइंस होगी. बंद पिछरी माइंस को चालू करने के लिए आउटसोर्स का प्रपोजल बनाया जा रहा है. फॉरेस्ट व रैयती मिला कर कुल 358 एकड़ जमीन में 98.4 एकड़ का एक पैच जो रैयती है, उसमें 30 एकड़ से ज्यादा जमीन का सत्यापन का कार्य हो चुका है. शेष जमीन का सत्यापन कार्य जारी है. सीएमपीडीआइ ने इसका माइनिंग प्लान बना कर दे दिया है, जो जल्द ही एप्रुवल के लिए सीसीएल बोर्ड में जायेगा. इसके बाद इसका इनवायरमेंट क्लीयरेंस लेना होगा. तब तक आउटसोर्स का भी प्रपोजल हो जायेगा. इस पैच में 27 लाख टन कोयला तथा 75 लाख घन मीटर टन ओबी है. शुरुआत में सालाना 3.4 लाख टन का उत्पादन का छोटा प्रपोजल बनाया जायेगा. वर्षों से बंद अंगवाली माइंस को भी चालू करने के लिए पीआर बनायी जा रही है. इसमें भी फिलहाल छोटे पैच से उत्पादन शुरू होगा. इस माइंस में 18 लाख टन कोयला तथा करीब 30 लाख घन मीटर टन ओबी है. प्रबंधन के अनुसार ऐसे पूरे माइंस में जियोलॉजिकल रिपोर्ट के अनुसार कुल कोल रिजर्व 15 मिलियन टन से ज्यादा है, जो 85 हेक्टेयर में है. पिछरी माइंस के तर्ज पर इसका भी माइन प्लान बनाया जा रहा है. यहां की रैयती जमीन के लिए वर्षों पहले प्रबंधन 75 नौकरी देने का दावा कर रहा है. फिलहाल यहां की जिस जमीन पर कोयला खनन किया जाना है, उस पर विस्थापन समस्या नहीं है. इसे भी आउटसोर्स मोड में चलाया जायेगा.

कारो बस्ती की शिफ्टिंग के बाद मिलेगा 40 मिलियन टन कोयला

बीएंडके एरिया की कारो परियोजना में कारो बस्ती के शिफ्ट हो जाने के बाद लगभग 40 मिलियन टन कोयला मिलेगा. कारो परियोजना के क्वायरी-टू में करीब 60 मिलियन टन कोल रिजर्व है. यह पूरा एरिया फोरेस्ट लैंड है. इसका वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार से स्टेज-वन व स्टेज दो क्लीयर हो गया है. कारो परियोजना में काम कर रही आउटसोर्स कंपनी को सात साल में 210 मिलियन टन कोयला तथा 210 मिलियन टन ओबी निस्तारण करना है. बरवाबेड़ा गांव की शिफ्टिंग के बाद मेगा एकेके प्रोजेक्ट को करीब 40 मिलियन टन कोयला मिलेगा. सालाना सात से लेकर 11 मिलियन टन कोयला सात साल तक खनन किया जा सकेगा. एकेके परियोजना का कोल रिजर्व मार्च 2021 की प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार 87.04 मिलियन टन है. सौ साल से ज्यादा पुरानी बोकारो कोलियरी को लॉन्ग टर्म आउटसोर्स से चलाने को लेकर 15 साल की प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनायी गयी है. 84 मिलियन घन मीटर टन ओबी निस्तारण के बाद 21 मिलियन टन कोयला मिलेगा. हर साल दो मिलियन (20 लाख टन) कोयला उत्पादन किया जायेगा. गत वर्ष सीसीएल बोर्ड में इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट को एप्रुवल मिला है. इस साल यह टेंडर में जायेगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्पादन शुरू हो जायेगा. कथारा एरिया में स्वांग-गोविंदपुर परियोजना के विस्तार के लिए मोटिंको नाला को शिफ्ट किया गया है. इसके बाद इस परियोजना का भविष्य 15 साल तक के लिए सुरक्षित हो गया. यहां करीब 22 मिलियन टन कोयला है. हर साल से 25 लाख टन कोयला खनन होगा. जारंगडीह परियोजना के विस्तार के लिए बनायी गयी प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार सालाना 15 लाख टन कोयला उत्पादन करने की योजना है. माइंस विस्तार के लिए जारंगडीह स्थित ढोरी माता के अलावा टाटा ब्लॉक, एसबीआइ, एटीएम आदि को शिफ्ट करना है. बंद पिपराडीह माइंस को चालू करने के लिए सीसीएल बोर्ड से एप्रुवल मिलने के बाद प्रोजेक्ट रिपोर्ट बना ली गयी है. इस माइंस से कोयला खनन के लिए आउटसोर्स का प्रपोजल बनाया जा रहा है. इसके बाद सीसीएल मुख्यालय में टेंडर होगा. इस माइंस को दो फेज में चालू किया जायेगा. फिलहाल पहले पेज में 21 मिलियन टन कोयला का उत्पादन किया जायेगा. 77 घन मीटर टन ओबी का निस्तारण होगा. हर साल दो मिलियन (20 लाख टन) कोयला उत्पादन होगा. दूसरे फेज में 15 मिलियन टन कोयला का उत्पादन और 46 घन मीटर टन ओबी का निस्तारण होगा. इस माइंस में वाशरी ग्रेड 3.4.5 का कोल भंडार है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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