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लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में हैं संतालियों की जड़ें, यहीं बने थे सारे रीति-रिवाज, कोरोना के कारण अंतर्राष्ट्रीय सरना महाधर्म सम्मेलन स्थगित

By Prabhat Khabar Digital Desk
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लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में हैं संतालियों की जड़ें, यहीं बने थे सारे रीति-रिवाज, कोरोना के कारण अंतर्राष्ट्रीय सरना महाधर्म सम्मेलन स्थगित.
लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में हैं संतालियों की जड़ें, यहीं बने थे सारे रीति-रिवाज, कोरोना के कारण अंतर्राष्ट्रीय सरना महाधर्म सम्मेलन स्थगित.
Prabhat Khabar

बेरमो, महुआटांड़ (राकेश वर्मा, रामदुलार पंडा) : संतालियों का 20वां अंतर्राष्ट्रीय सरना महाधर्म सम्मेलन को स्थगित कर दिया गया है. इस बार लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ में 20वां अंतर्राष्ट्रीय सरना महाधर्म सम्मेलन (राजकीय महोत्सव) होना था, लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना के चलते लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ समिति ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर इसे स्थगित करने की बात कही है. समिति ने सिर्फ पूजा-पाठ करने की अनुमति मांगी थी.

इस संबंध में बेरमो के अनुमंडल पदाधिकारी ने 24 बिंदुओं (शर्तों) का उल्लेख करते हुए अनुमति प्रदान कर दी है. कहा गया है कि इन शर्तों का हर हाल में पालन करना होगा. जो शर्तें लगायी गयी हैं, उसमें कहा गया है कि इस बार न तो कोई मेला लगेगा, न ही बाहर से आगंतुक श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति होगी. इसके लिए प्रशासन भी विशेष तैयारी कर रहा है.

प्रशासन के आदेश के बाद दोरबार चट्टानी स्थित पुनाय थान (सरना मंदिर) में 29 व 30 नवंबर को सोहराय कुनामी (कार्तिक पूर्णिमा) के अवसर पर आयोजक समिति द्वारा पूरे विधि-विधान के साथ पूजा का आयोजन होगा. प्रशासन की शर्तों का पालन करते हुए. 29 नवंबर को को पुनाय थान में पाहन व सहयोगियों के द्वारा आराध्यों को स्नान कराया जायेगा. अगरबत्ती व दीये जलाये जायेंगे. अगले दिन यानी 30 नवंबर को सोहराय कुनामी पर वार्षिक पूजन का आयोजन होगा.

संताली समाज के लोग यहां मरांगबुरु, लुगुबुरु, लुगू आयो, कुड़िकिन बुरु, कपसा बाबा, बीरा गोसाईं, घांटाबाड़ी गो बाबा आदि की पूजा व आराधना करते हैं. इस प्रकार, सात किलोमीटर ऊपर भी लुगुबुरु की मुख्य गुफा (पुनाय थान) में भी पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान होगा. यहां की तैयारी व व्यवस्था लुगुबुरु पुनाय थान सरना धोरोमगाढ़ समिति देखती है.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि बोकारो जिला के ललपनिया स्थित लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगाढ़ संतालियों की धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी है. मान्यता है कि लाखों वर्ष पूर्व इसी स्थान पर लुगु बाबा की अध्यक्षता में संतालियों के जन्म से लेकर मृत्यु तक के रीति-रिवाज यानी संताली संविधान की रचना हुई थी. इस प्रकार, लुगुबुरु घांटाबाड़ी हर संताली के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. हर अनुष्ठान में संताली लुगुबुरु का बखान करते हैं.

Posted By : Mithilesh Jha

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