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लोकसभा चुनाव 2024: गिरिडीह सीट से इकलौते सांसद थे बिंदेश्वरी दुबे, जो बने केंद्र में मंत्री

Lok Sabha Election 2024: झारखंड की गिरिडीह लोकसभा सीट से बिंदेश्वरी दुबे इकलौते सांसद थे, जो केंद्र में मंत्री बने. लोकसभा का चुनाव लड़ने से पहले वे विधानसभा की सीट जीतकर विधायक बनते रहे.

Lok Sabha Election 2024: बेरमो, राकेश वर्मा-गिरिडीह संसदीय सीट पर वर्ष 1952 से वर्ष 2019 तक हुए लोकसभा चुनाव में जितने भी सांसद हुए, उसमें एकमात्र बिंदेश्वरी दुबे ही केंद्र में मंत्री बने थे. हालांकि कांग्रेस ने इस सीट से पांच बार जीत दर्ज की थी. इसमें वर्ष 1952 में नागेश्वर प्रसाद सिन्हा, 1967 में डॉ इम्तियाज अहमद, 1971 में चपलेंदू भट्टाचार्य, 1980 में बिंदेश्वरी दुबे एवं 1984 में कांग्रेस के डॉ सरफराज अहमद ने जीत दर्ज की थी. वर्ष 1980 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे कांग्रेस व इंटक के दिग्गज नेता बिंदेश्वरी दुबे ने जनता पार्टी के प्रत्याशी रामदास सिंह को पराजित किया था. बिंदेश्वरी दुबे लोकसभा चुनाव लड़ने से पूर्व 1952, 1962,1967, 1972, 1979 में बेरमो से बतौर कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव जीतकर विधायक बनते रहे.

1988 में बिंदेश्वरी दुबे बने राज्यसभा के सदस्य
लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद वर्ष 1988 में बिंदेश्वरी दुबे को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया. उस वक्त देश के तात्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में उन्हें केंद्रीय श्रम व कानून मंत्री बनाया गया था. वह 1972 से 1977 तक एकीकृत बिहार सरकार में शिक्षा, विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी, परिवहन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री भी बनाये गये थे. बिंदेश्वरी दुबे के अलावा कांग्रेस के डॉ सरफराज अहमद वर्ष 1984 में गिरिडीह लोस सीट से झामुमो प्रत्याशी बिनोद बिहारी महतो को पराजित कर पहली बार सांसद बने थे. हालांकि इसके बाद वर्ष 1989 एवं 1991 के लोस चुनाव में सरफराज अहमद पराजित हो गये. सरफराज अहमद को एआइसीसी का महासचिव बनाया गया था. साथ ही वे बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर भी रहे.

1971 में भाकपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे चतुरानन मिश्र
1971 में गिरिडीह लोकसभा सीट से भाकपा व एटक के दिग्गज नेता चतुरानन मिश्र चुनाव लड़े तथा उन्हें तीसरा स्थान प्राप्त हुआ था. चतुरानन मिश्र को 32,168 मत प्राप्त हुआ था. इस चुनाव में कांग्रेस के चपलेंदू भट्टाचार्य ने जीत दर्ज की थी. बाद के वर्षों में श्री मिश्र केंद्र में कृषि मंत्री बने थे. इसके बाद वर्ष 1980 के लोकसभा चुनाव में बेरमो के भाकपा व एटक के नेता मरहूम शफीक खान ने भी भाकपा के टिकट पर चुनाव लड़ा तथा उन्हें 20 हजार से ज्यादा मत मिले थे. इस चुनाव में कांग्रेस व इंटक नेता बिंदेश्वरी दुबे ने जीत दर्ज की थी.

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झामुमो मार्डी गुट ने तीन बार गिरिडीह से दिया लोकसभा प्रत्याशी
गिरिडीह लोकसभा सीट पर तीन बार झामुमो मार्डी गुट ने भी अपना प्रत्याशी दिया था. 1996 के लोकसभा चुनाव में झामुमो मार्डी गुट से पूर्व सांसद स्व. बिनोद बिहारी महतो के पुत्र राजकिशोर महतो ने चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था. उन्हें कुल 99518 मत प्राप्त हुआ था. इसके बाद 1998 के लोस उप चुनाव में पुन: राजकिशोर महतो झामुमो मार्डी प्रत्याशी बने तथा फिर से उन्हें तीसरा स्थान मिला. इस चुनाव में उन्हें कुल 76124 मत मिला. इसके बाद 1999 के लोस चुनाव में डुमरी के पूर्व विधायक शिवा महतो झामुमो मार्डी गुट के प्रत्याशी बनाये गये. वे भी तीसरे स्थान पर रहे तथा उन्हें कुल 42802 मत प्राप्त हुआ.

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